मुंबई : रामानंद सागर के लोकप्रिय धार्मिक धारावाहिक ‘रामायण’ में लक्ष्मण की भूमिका निभाकर घर-घर पहचान बनाने वाले अभिनेता सुनील लहरी एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने जेन जी और जेन अल्फा जैसे पीढ़ियों के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्दों पर सवाल उठाया है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कारों की रक्षा के लिए गुरुकुल शिक्षा पद्धति को आवश्यक बताया है।सुनील लहरी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। वह धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपने विचार खुलकर प्रशंसकों के साथ साझा करते हैं। उनके पोस्ट को जहां कई लोगों का समर्थन मिलता है, वहीं कई बार यूजर्स उनकी बातों से असहमति जताते हुए आलोचना भी करते हैं।सुनील लहरी ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि जेन जी और जेन अल्फा जैसे शब्द भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उचित शब्दों का चयन ही वास्तविक आधुनिकता है। अभिनेता ने भारतीय संस्कारों को बचाने के लिए गुरुकुल पद्धति वाले पाठ्यक्रम को जरूरी बताया। उनका यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
कुछ यूजर्स ने किया समर्थन, कई ने उठाए सवाल
सुनील लहरी के विचारों का कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने समर्थन किया। समर्थकों ने कहा कि नई पीढ़ी को भारतीय इतिहास, संस्कृति, संस्कार और पारंपरिक शिक्षा पद्धति से परिचित कराया जाना चाहिए। वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स ने उनकी टिप्पणी को लेकर सवाल भी उठाए।एक यूजर ने कहा कि समय के साथ होने वाले बदलाव को स्वीकार करना भी सनातन संस्कृति की विशेषता है। यूजर के मुताबिक भारतीय संस्कृति की ताकत यही है कि वह सतयुग, द्वापर, गुरुकुल और आधुनिक शिक्षण संस्थानों समेत सभी विचारों को अपने साथ लेकर आगे बढ़ती है। उसने अभिनेता से सवाल किया कि क्या आधुनिक साधनों को छोड़कर फिर से बैलगाड़ी का इस्तेमाल करना संभव है।एक अन्य यूजर ने सुनील लहरी की टी-शर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर अंग्रेजी शब्दों और आधुनिक जीवनशैली को भारतीय संस्कृति के विरुद्ध माना जा रहा है तो पश्चिमी पहनावा भी छोड़ देना चाहिए। कुछ यूजर्स ने उनसे संस्कृत में बात करने और अपने परिवार के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के बजाय संस्कृत की शिक्षा दिलाने की सलाह दी।
कपड़ों और भाषा पर छिड़ी बहस
पोस्ट के बाद बहस केवल जेन जी और जेन अल्फा तक सीमित नहीं रही। कई यूजर्स ने आधुनिकता, कपड़ों, भाषा और शिक्षा को लेकर अपनी राय रखी। कुछ लोगों ने कहा कि विदेशी भाषा या शब्दों का उपयोग करने से किसी की भारतीयता कम नहीं होती। वहीं दूसरे पक्ष ने माना कि आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को भी पाठ्यक्रम में उचित स्थान मिलना चाहिए।जेन जी शब्द का इस्तेमाल सामान्य तौर पर 1990 के दशक के अंतिम वर्षों से लेकर 2010 के शुरुआती वर्षों के बीच जन्मी पीढ़ी के लिए किया जाता है। इसके बाद जन्म लेने वाली पीढ़ी को जेन अल्फा कहा जाता है। ये शब्द सामाजिक व्यवहार, तकनीक के उपयोग और विभिन्न पीढ़ियों की विशेषताओं को समझाने के लिए दुनियाभर में प्रचलित हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन में किया था पोस्ट
इससे पहले सुनील लहरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में वीडियो साझा करने को लेकर चर्चा में आए थे। अभिनेता ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा था कि आलोचना के बावजूद लोगों को माफ करना उनके बड़े दिल को दिखाता है। उन्होंने इस दौरान क्षमा और बड़प्पन से जुड़ा एक पारंपरिक दोहा भी सुनाया था।सुनील ने वीडियो में कहा था कि हो सकता है उनकी बात कई लोगों को पसंद न आए, लेकिन उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने प्रधानमंत्री को नमन करते हुए अपनी बात ‘जय श्रीराम’ के साथ समाप्त की थी। इस पोस्ट पर भी सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।फिलहाल जेन जी और जेन अल्फा को लेकर किया गया सुनील लहरी का नया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। अभिनेता ने यूजर्स की आलोचनात्मक प्रतिक्रियाओं पर अलग से कोई जवाब नहीं दिया है।