जब Majrooh's की कलम बनी विवाद की वजह, कविता पर भेजे गए जेल

Update: 2026-07-11 09:20 GMT

Mumbai मुंबई : हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे गीतकार और शायर हुए हैं, जिन्होंने अपनी कलम से समाज, राजनीति और देश के हालात पर बेबाकी से लिखा। उनकी रचनाओं में कभी देशभक्ति की भावना नजर आई तो कभी समाज की कुरीतियों और सत्ता व्यवस्था पर सवाल उठाए गए। ऐसे ही महान शायरों में एक नाम मजरूह सुल्तानपुरी का भी आता है, जिनकी लेखनी ने न सिर्फ फिल्मी दुनिया को यादगार गीत दिए, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी मजबूत आवाज उठाई।

मजरूह सुल्तानपुरी का असली नाम असरार उल हसन खान था। उनका जन्म साल 1919 में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में हुआ था। शुरुआती शिक्षा उन्होंने मदरसे में हासिल की, जहां उन्होंने उर्दू भाषा पर मजबूत पकड़ बनाई। इसके साथ ही उन्होंने अरबी और फारसी का भी अध्ययन किया। धीरे-धीरे उनकी पहचान एक बेहतरीन शायर के रूप में बनने लगी और वह कई मुशायरों में अपनी रचनाएं सुनाने लगे।

मजरूह सुल्तानपुरी की शायरी में समाज की सच्चाई, आम लोगों की परेशानियां और व्यवस्था के खिलाफ आवाज देखने को मिलती थी। यही बेबाक अंदाज कई बार उनके लिए मुश्किलें भी लेकर आया।

कविता को लेकर हुआ था विवाद

कहा जाता है कि देश की आजादी के बाद के शुरुआती वर्षों में मजरूह सुल्तानपुरी एक मजदूर आंदोलन से जुड़े थे। इस दौरान उन्होंने एक ऐसी कविता सुनाई, जिसे लेकर तत्कालीन सरकार नाराज हो गई थी। इस कार्यक्रम में अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता बलराज साहनी भी उनके साथ मौजूद थे।

मीडिया रिपोर्ट्स और कुछ लेखों के अनुसार, मजरूह की इस कविता को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की नीतियों की आलोचना के रूप में देखा गया। कविता को लेकर विवाद बढ़ गया और उस समय के बॉम्बे राज्य के गवर्नर मोरारजी देसाई के आदेश पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

इस घटना का जिक्र लेखक कमलेश कपूर की किताब ‘पार्टिशन: द लिगेसी ऑफ एमके गांधी’ में भी किया गया है। किताब के अनुसार, मजरूह सुल्तानपुरी से अपनी कविता के लिए माफी मांगने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया।

दो साल जेल में रहे मजरूह

बताया जाता है कि मजरूह सुल्तानपुरी को करीब दो साल तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने अपने विचारों से समझौता नहीं किया और अपनी बात पर कायम रहे। जेल में रहने के दौरान भी उनकी रचनात्मकता जारी रही। उन्होंने वहां भी कई गीत और कविताएं लिखीं।

बाद में मजरूह सुल्तानपुरी ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा और अपनी लेखनी से एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने कई फिल्मों के लिए ऐसे गीत लिखे, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनकी कलम से निकले गीतों में प्रेम, दर्द, जिंदगी और समाज की गहरी समझ दिखाई देती है।

मजरूह सुल्तानपुरी को हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली गीतकारों में गिना जाता है। उन्होंने अपने लंबे करियर में कई यादगार गीत दिए और फिल्म संगीत को नई ऊंचाइयां दीं। उनकी बेबाक लेखनी और विचारों के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें बाकी गीतकारों से अलग बनाती है।

उनका जीवन यह संदेश देता है कि एक सच्चा रचनाकार अपनी कलम के जरिए समाज के सामने सच रखने का साहस करता है। यही वजह है कि मजरूह सुल्तानपुरी आज भी अपनी शायरी और गीतों के जरिए लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

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