IIT कानपुर जॉब पर साफ किया सच

खबरों को झूठ करार दिया है

Update: 2026-06-11 09:59 GMT

Jharkhand झारखंड : के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने हाल ही में आईआईटी कानपुर से जुड़ी एक झूठी खबर का खंडन किया है। सोशल मीडिया और कुछ न्यूज पोर्टल्स में यह दावा किया जा रहा था कि सार्थक को आईआईटी कानपुर में नौकरी मिल गई है। हालांकि, सार्थक ने स्पष्ट किया कि उन्हें आईआईटी कानपुर की ओर से कोई जॉब ऑफर नहीं आया है। रांची के रहने वाले यह 12वीं कक्षा के छात्र पिछले कुछ समय से चर्चा में हैं, क्योंकि उन्होंने सीबीएसई की ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) टेंडरिंग प्रक्रिया में पाई गई खामियों को उजागर किया था।

सीबीएसई ओएसएम सिस्टम की कमियों को लेकर सार्थक ने कई तकनीकी पहलुओं को सामने रखा था, जिससे यह साबित हुआ कि मार्किंग प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है। उनकी यह सक्रियता शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बनी। हालांकि, आईआईटी कानपुर ने इस मुद्दे पर नौकरी देने वाले छात्र को लेकर भ्रम फैल गया। असल में आईआईटी कानपुर ने सीबीएसई के OSM सिस्टम की खामियों को उजागर करने वाले एक अन्य छात्र, निसर्ग अधिकारी, को नौकरी पर रखा है।

निसर्ग अधिकारी ने सीबीएसई के ऑनस्क्रीन पोर्टल में मिली खामियों पर ब्लॉग पोस्ट लिखी थी। इसके आधार पर उन्हें आईआईटी कानपुर के टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब C3iHub में ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के तौर पर नियुक्त किया गया। इस नियुक्ति की खबर गलत तरीके से सार्थक सिद्धांत से जोड़ दी गई, जिससे भ्रम फैल गया। सार्थक ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें इस तरह का कोई ऑफर नहीं मिला है।

सार्थक के इस खुलासे ने यह भी सामने लाया कि मीडिया और सोशल मीडिया पर खबरों की पुष्टि करना कितना जरूरी है। अक्सर छात्र या युवा अपनी उपलब्धियों के चलते चर्चा में रहते हैं, और ऐसे में गलत जानकारियां फैल सकती हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल शिक्षा प्रणाली में सुधार लाना और सीबीएसई OSM सिस्टम की खामियों को उजागर करना था।

इस बीच, शिक्षा विशेषज्ञ और तकनीकी विश्लेषक भी मानते हैं कि ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम में सुधार की सख्त जरूरत है। सार्थक और निसर्ग जैसे छात्रों की सक्रियता इस दिशा में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। वे दोनों ही छात्रों के रूप में तकनीकी और विश्लेषणात्मक क्षमता दिखा चुके हैं।

सारांश में, झारखंड के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने अपनी ओर से यह साफ कर दिया है कि आईआईटी कानपुर से उन्हें नौकरी नहीं मिली। हालांकि उन्होंने OSM सिस्टम की खामियों को उजागर किया था, लेकिन नौकरी का प्रस्ताव उनसे नहीं जुड़ा। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के फैल रही खबरें लोगों के नाम और उपलब्धियों को गलत तरीके से जोड़ सकती हैं।

सार्थक का योगदान शिक्षा प्रणाली में सुधार और तकनीकी जागरूकता के लिए सराहनीय माना जा रहा है। उनकी सक्रियता से न केवल सीबीएसई सिस्टम में सुधार की जरूरत उजागर हुई है, बल्कि युवाओं को भी यह संदेश गया कि सही जानकारी और शोध आधारित रिपोर्टिंग कितना महत्वपूर्ण है।

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