बेटे के जन्म के साल शुरू हुई बप्पा को घर लाने की परंपरा, 20 साल से निभा रहे हैं दिब्येंदु की आस्था
मुंबई। गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश के प्रति लोगों की आस्था और परंपराएं अलग-अलग रूपों में देखने को मिलती हैं। इसी कड़ी में दिब्येंदु ने अपनी एक खास पारिवारिक परंपरा के बारे में बताया, जो पिछले 20 वर्षों से लगातार चली आ रही है।
दिब्येंदु ने बताया कि उनके घर में गणपति बप्पा को लाने की परंपरा उनके बेटे के जन्म के साल शुरू हुई थी। तब से यह उनके परिवार के लिए गणेश उत्सव का एक विशेष हिस्सा बन गई है।
अपनी इस भावनात्मक यात्रा के बारे में बात करते हुए दिब्येंदु ने कहा, “बप्पा को घर लाने का यह हमारा 20वां साल है। मैं यहां लगभग 26 सालों से रह रहा हूं। हमने बप्पा को घर लाना उस साल शुरू किया था, जब हमारे बेटे का जन्म हुआ था।”
उन्होंने बताया कि उनका बेटा अब 21 साल का हो चुका है और गणपति उत्सव से जुड़ी यह परंपरा उनके परिवार के लिए भावनाओं और यादों से जुड़ी हुई है।
दिब्येंदु ने कहा कि एक साल ऐसा भी आया था, जब वे गणपति बप्पा को घर नहीं ला पाए थे। उन्होंने बताया कि उस समय उनकी मां का निधन हो गया था, जिसके कारण परिवार ने उत्सव नहीं मनाया।
उन्होंने कहा, “एक साल ऐसा भी था जब हम बप्पा को घर नहीं ला पाए थे क्योंकि मेरी मां का निधन हो गया था। उसके अलावा, हम हर साल बप्पा को घर लाते रहे हैं।”
गणेश चतुर्थी का पर्व देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। खासकर महाराष्ट्र और मुंबई में घर-घर गणपति स्थापना की परंपरा देखने को मिलती है। कई परिवार वर्षों से चली आ रही अपनी परंपराओं को आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं।
दिब्येंदु के परिवार के लिए भी गणपति उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पारिवारिक भावनाओं और यादों से जुड़ा अवसर है। बेटे के जन्म के साथ शुरू हुई यह परंपरा अब परिवार के लिए हर साल आने वाला खास पल बन चुकी है।
उन्होंने बताया कि हर साल बप्पा को घर लाने के दौरान परिवार में उत्साह का माहौल रहता है। गणपति की स्थापना से लेकर पूजा और विसर्जन तक की पूरी प्रक्रिया परिवार के सभी सदस्यों के लिए विशेष महत्व रखती है।
ऐसी पारंपरिक मान्यताएं कई परिवारों में पीढ़ियों तक चलती रहती हैं। गणपति उत्सव के दौरान लोग अपने घरों में भगवान गणेश की स्थापना कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
दिब्येंदु की कहानी भी इसी आस्था और पारिवारिक जुड़ाव को दर्शाती है। उनके लिए बप्पा को घर लाने की परंपरा एक धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ जीवन के महत्वपूर्ण पलों की याद भी है।
20 वर्षों से लगातार निभाई जा रही इस परंपरा में परिवार के कई खास अवसर जुड़े हुए हैं। बेटे के जन्म से शुरू हुई यह यात्रा अब दो दशक पूरे कर चुकी है।
गणपति उत्सव के दौरान ऐसे कई उदाहरण सामने आते हैं, जहां लोगों की श्रद्धा और निजी जीवन की यादें एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं। यही वजह है कि गणेश उत्सव केवल पूजा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के लिए भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम भी बन जाता है।
दिब्येंदु ने अपनी बातों के जरिए बताया कि कैसे एक पारिवारिक खुशी के मौके पर शुरू हुई परंपरा आज उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गई है। बीते 20 वर्षों में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन बप्पा के प्रति उनकी आस्था और परंपरा बनी रही।