शर्मिला टैगोर ने बच्चों को दी इस्लाम की तालीम सबा पटौदी ने किया खुलासा
सबा पटौदी ने धर्म पर तोड़ी चुप्पी बताया कैसे हुई उनकी परवरिश
मुंबई: बॉलीवुड के मशहूर पटौदी परिवार की धार्मिक परवरिश को लेकर सबा अली खान पटौदी ने कई दिलचस्प बातें साझा की हैं। दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी की बेटी सबा ने बताया कि उनकी मां ने शादी के बाद इस्लाम अपनाया था और बच्चों को इस्लाम के बारे में समझाने में उनकी अहम भूमिका रही। हालांकि सबा ने यह भी साफ किया कि उनके माता-पिता ने कभी बच्चों पर किसी धर्म को जबरन नहीं थोपा।
सबा ने हालिया इंटरव्यू में अपने बचपन और घर के धार्मिक माहौल के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि उनके घर में मंदिर नहीं था और वे हिंदू धर्म का सक्रिय रूप से पालन नहीं करते थे। दूसरी ओर उनकी मां ने उन्हें इस्लाम के बारे में सिखाया। इसके बावजूद परिवार में धार्मिक मामलों को लेकर बच्चों को अपनी समझ विकसित करने की स्वतंत्रता दी गई।
शादी के बाद शर्मिला टैगोर ने अपनाया था इस्लाम
शर्मिला टैगोर का जन्म एक बंगाली हिंदू परिवार में हुआ था। उन्होंने 1968 में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी से शादी की। शादी से पहले शर्मिला ने इस्लाम स्वीकार किया और उनका नाम आयशा रखा गया। उनकी बेटी सोहा अली खान भी पहले इस बारे में सार्वजनिक रूप से बता चुकी हैं। दिलचस्प बात यह है कि फिल्मी दुनिया में शर्मिला अपने पुराने नाम से ही पहचानी जाती रहीं। सोहा ने बताया था कि कभी उनकी मां दस्तावेजों पर आयशा नाम से हस्ताक्षर करती थीं और कभी शर्मिला नाम से, जिसके कारण परिवार में भी कभी-कभी भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती थी। शर्मिला स्वयं भी धर्म परिवर्तन को लेकर पहले खुलकर बात कर चुकी हैं। उन्होंने बताया था कि शादी से पहले वह बहुत ज्यादा धार्मिक नहीं थीं। इस्लाम अपनाने के बाद उन्होंने हिंदू और इस्लाम दोनों धर्मों के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल की।
बच्चों को इस्लाम के बारे में मां ने बताया
सबा के मुताबिक उनकी धार्मिक परवरिश में मां शर्मिला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शर्मिला ने बच्चों को उस धर्म के बारे में बताया जिसे उन्होंने विवाह के बाद स्वीकार किया था। लेकिन यहां सबा ने एक महत्वपूर्ण बात भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि माता-पिता ने उन पर धार्मिक पहचान थोपने की कोशिश नहीं की। परिवार के भीतर धर्म को लेकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता का माहौल था। पटौदी परिवार में सैफ अली खान, सबा अली खान और सोहा अली खान तीन भाई-बहन हैं। तीनों ने धर्म और निजी जीवन को लेकर अलग-अलग रास्ते चुने हैं।
'हम हिंदू धर्म का पालन नहीं करते थे'
सबा के बयान का सबसे ज्यादा चर्चा वाला हिस्सा उनकी हिंदू धर्म को लेकर कही गई बात है। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि घर में मंदिर नहीं था और परिवार सक्रिय रूप से हिंदू धर्म का पालन नहीं करता था। इसे यह कहने से अलग समझना जरूरी है कि परिवार हिंदू धर्म का विरोध करता था। सबा की बात मुख्य रूप से उनके घर में धार्मिक अभ्यास और परवरिश के संदर्भ में थी। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि उनके माता-पिता ने बच्चों पर धर्म नहीं थोपा।
धार्मिक पहचान को लेकर हुई उलझन
अलग धार्मिक पृष्ठभूमि वाले माता-पिता के घर जन्म लेने के कारण सबा ने अपनी धार्मिक पहचान और परवरिश से जुड़ी जटिलताओं पर भी बात की। एक तरफ उनकी मां हिंदू परिवार में जन्मी थीं और बाद में इस्लाम स्वीकार कर चुकी थीं, जबकि उनके पिता मंसूर अली खान पटौदी मुस्लिम परिवार से थे। ऐसे माहौल में बच्चों के सामने अलग-अलग सांस्कृतिक प्रभाव मौजूद थे। सबा के मुताबिक उनकी मां ने इस्लाम की जानकारी दी, लेकिन माता-पिता ने बच्चों को किसी निश्चित धार्मिक रास्ते पर चलने के लिए मजबूर नहीं किया