मुंबई : साउथ और बॉलीवुड अभिनेत्री रश्मिका मंदाना अब भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान हस्ती और भारत रत्न से सम्मानित गायिका एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का किरदार पर्दे पर निभाने जा रही हैं। उनकी जिंदगी पर बनने वाली बायोपिक का नाम ‘M.S – A Legacy On Screen’ रखा गया है। फिल्म की घोषणा के साथ ही यह प्रोजेक्ट चर्चा में आ गया है। इस फिल्म में रश्मिका को ‘अम्मा’ यानी एमएस सुब्बुलक्ष्मी के रूप में दिखाया जाएगा। निर्माताओं के अनुसार, इस किरदार को पर्दे पर उतारने के लिए लंबे समय तक रिसर्च की गई है। करीब 8 साल तक उनकी जिंदगी, संगीत यात्रा, निजी जीवन और उपलब्धियों को समझने के बाद फिल्म की कहानी तैयार की गई है।

कौन थीं एमएस सुब्बुलक्ष्मी?
एमएस सुब्बुलक्ष्मी भारतीय कर्नाटक संगीत की सबसे प्रसिद्ध आवाजों में से एक थीं। उनका जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै में हुआ था। बचपन से ही संगीत का माहौल मिलने के कारण उन्होंने छोटी उम्र में ही गायन की शुरुआत कर दी थी। उनकी मां वीणा वादक थीं और परिवार में संगीत की मजबूत परंपरा थी। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पहचान दिलाई। एमएस सुब्बुलक्ष्मी भारत रत्न से सम्मानित होने वाली पहली संगीत कलाकारों में शामिल रहीं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया था।
रश्मिका के लिए बड़ी जिम्मेदारी
रश्मिका मंदाना ने इस भूमिका को अपने करियर की खास जिम्मेदारी बताया है। अभिनेत्री ने कहा कि एमएस सुब्बुलक्ष्मी जैसी महान हस्ती का किरदार निभाना उनके लिए सम्मान की बात है। फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल एक कलाकार की कहानी नहीं होगी, बल्कि भारतीय संगीत, संस्कृति और एक महिला की प्रेरणादायक यात्रा को दिखाने का प्रयास होगा।
कमल हासन ने भी जताई अहमियत
फिल्म के लॉन्च कार्यक्रम में अभिनेता कमल हासन भी शामिल हुए। उन्होंने एमएस सुब्बुलक्ष्मी की विरासत को पर्दे पर दिखाने की चुनौती को बेहद बड़ा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्व को निभाना किसी अंतरराष्ट्रीय आइकन के किरदार को निभाने जैसा कठिन काम है।
फिल्म का निर्देशन और संगीत
इस बायोपिक का निर्देशन गौतम तिन्नानुरी कर रहे हैं, जो इससे पहले ‘जर्सी’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी अनिरुद्ध रविचंदर को दी गई है। फिल्म निर्माताओं का लक्ष्य है कि एमएस सुब्बुलक्ष्मी की संगीत यात्रा, संघर्ष, सफलता और समाज पर उनके प्रभाव को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।
दर्शकों की बढ़ी उम्मीदें
एमएस सुब्बुलक्ष्मी जैसी महान कलाकार की कहानी को बड़े पर्दे पर देखने को लेकर संगीत प्रेमियों में उत्सुकता है। वहीं रश्मिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके व्यक्तित्व, आवाज, भावनाओं और संगीत की गहराई को सही तरीके से प्रस्तुत करना होगी। यह फिल्म भारतीय कला और संगीत की विरासत को सम्मान देने वाली एक बड़ी सिनेमाई कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

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