मुंबई। फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार हैं, जिनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। छोटे पर्दे से शुरुआत, लगातार संघर्ष, अलग-अलग किरदारों में खुद को साबित करने की कोशिश और आखिरकार बड़े पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता। अभिनेता **विक्रांत मैसी** की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आज उनकी गिनती हिंदी सिनेमा के दमदार कलाकारों में होती है, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ा।
विक्रांत मैसी का नाम एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि वह लोकप्रिय क्राइम फ्रेंचाइजी **'मिर्जापुर'** की फिल्म में बाबलू पंडित के किरदार में लौटे हैं। वेब सीरीज के पहले सीजन में उनका किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। कहानी में बाबलू की मौत के बाद दर्शकों ने शायद ही सोचा होगा कि उन्हें फिर इस किरदार में देखने का मौका मिलेगा।
लेकिन 'Mirzapur: The Movie' ने पुराने किरदारों को एक नए सिनेमाई रूप में पेश किया और विक्रांत की वापसी ने उनके प्रशंसकों को खासा उत्साहित किया।
एक्टिंग से पहले कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी
विक्रांत मैसी का करियर सीधे किसी बड़े फिल्म सेट से शुरू नहीं हुआ था।
अभिनय की दुनिया में पूरी तरह उतरने से पहले उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में भी काम किया। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह एक कॉरपोरेट कंपनी में नौकरी करते थे और वहां उन्हें ठीक-ठाक वेतन भी मिलता था।
लेकिन उनके मन में अभिनय को लेकर अलग आकर्षण था।
एक सुरक्षित नौकरी छोड़कर मनोरंजन जगत में करियर बनाने का फैसला आसान नहीं था। फिल्म और टेलीविजन की दुनिया में काम मिलने की कोई गारंटी नहीं होती। इसके बावजूद विक्रांत ने जोखिम उठाया और अपनी पसंद के क्षेत्र को चुना।
यही फैसला आगे चलकर उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
टीवी से मिली असली पहचान
विक्रांत मैसी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की।
उन्होंने 'धूम मचाओ धूम' जैसे शो में काम किया, लेकिन घर-घर पहचान उन्हें लोकप्रिय धारावाहिक **'बालिका वधू'** से मिली।
इस शो में उन्होंने श्याम सिंह का किरदार निभाया था।
उस दौर में 'बालिका वधू' भारतीय टेलीविजन के सबसे चर्चित धारावाहिकों में शामिल था। शो की बड़ी दर्शक संख्या के कारण विक्रांत भी लोगों के बीच पहचाने जाने लगे।
इसके बाद उन्होंने 'बाबा ऐसो वर ढूंढो' और 'कुबूल है' जैसे टीवी शोज में भी काम किया।
टेलीविजन ने उन्हें लगातार अभिनय करने का मौका दिया और कैमरे के सामने उनकी पकड़ मजबूत होती गई।
टीवी पर सफलता के बावजूद चुना नया रास्ता
टीवी इंडस्ट्री में पहचान मिलने के बाद भी विक्रांत वहीं नहीं रुके।
उनका लक्ष्य फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाना था।
यह फैसला भी जोखिम से भरा था क्योंकि टीवी पर स्थापित अभिनेता होने का मतलब यह नहीं है कि फिल्मों में भी आसानी से मुख्य भूमिकाएं मिल जाएंगी।
कई कलाकार छोटे पर्दे पर बड़ी लोकप्रियता हासिल करने के बाद फिल्मों में अपनी जगह बनाने के लिए वर्षों संघर्ष करते हैं।
विक्रांत के साथ भी ऐसा ही हुआ।
उन्होंने छोटे किरदारों से शुरुआत की और धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
'लुटेरा' से बड़े पर्दे पर कदम
विक्रांत मैसी को 2013 में आई फिल्म **'लुटेरा'** में काम करने का मौका मिला।
रणवीर सिंह और सोनाक्षी सिन्हा अभिनीत इस फिल्म में विक्रांत की भूमिका मुख्य नहीं थी, लेकिन उनके अभिनय पर ध्यान गया।
इसके बाद उन्होंने 'दिल धड़कने दो' और 'हाफ गर्लफ्रेंड' जैसी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं।
इन फिल्मों में उनके पास स्क्रीन टाइम सीमित था, लेकिन वह छोटे किरदारों में भी अपनी छाप छोड़ते रहे।
उनकी यही खासियत धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं और दर्शकों की नजर में आने लगी।
'ए डेथ इन द गंज' बना बड़ा मोड़
विक्रांत मैसी के फिल्मी करियर में **'A Death in the Gunj'** बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।
कोंकणा सेन शर्मा निर्देशित इस फिल्म में उन्होंने शुतु का किरदार निभाया।
यह एक संवेदनशील और जटिल किरदार था।
विक्रांत ने जिस सहजता से इस भूमिका को निभाया, उसने उन्हें गंभीर अभिनेता के रूप में स्थापित करने में मदद की।
फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भले किसी मसाला ब्लॉकबस्टर जैसी कमाई नहीं की, लेकिन आलोचकों और सिनेमा प्रेमियों के बीच विक्रांत के अभिनय की काफी तारीफ हुई।
इसके बाद उनके लिए ज्यादा विविध भूमिकाओं के रास्ते खुलने लगे।
फिर आया 'मिर्जापुर' का बाबलू पंडित
विक्रांत मैसी के करियर में अगला बड़ा पड़ाव 2018 में आया, जब वेब सीरीज **'मिर्जापुर'** रिलीज हुई।
इसमें उन्होंने विनय 'बाबलू' पंडित का किरदार निभाया।
बाबलू पढ़ाई में तेज, शांत स्वभाव वाला युवक होता है, जो परिस्थितियों के कारण अपने भाई गुड्डू पंडित के साथ अपराध की दुनिया में उतर जाता है।
किरदार में बुद्धिमत्ता और अपराध की दुनिया के बीच फंसे एक युवा का द्वंद्व था।
विक्रांत ने इसे बेहद प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतारा।
पहले सीजन में बाबलू की मौत कहानी के सबसे बड़े झटकों में से एक थी।
किरदार खत्म होने के बावजूद बाबलू पंडित 'मिर्जापुर' के सबसे यादगार किरदारों में शामिल रहा।
OTT ने बदल दिया करियर
विक्रांत मैसी उन अभिनेताओं में शामिल रहे जिन्हें भारत में OTT प्लेटफॉर्म के विस्तार का बड़ा फायदा मिला।
'मिर्जापुर' के बाद उन्होंने कई डिजिटल प्रोजेक्ट में काम किया।
'क्रिमिनल जस्टिस' में उनके अभिनय को काफी सराहा गया।
इसके बाद 'ब्रोकन बट ब्यूटीफुल' में भी उन्होंने अपनी रोमांटिक और भावनात्मक अभिनय क्षमता दिखाई।
OTT ने उन्हें ऐसे किरदार निभाने का मौका दिया जो पारंपरिक व्यावसायिक फिल्मों में आसानी से नहीं मिलते थे।
धीरे-धीरे उनकी पहचान एक ऐसे अभिनेता की बनने लगी जो सामान्य दिखने वाले किरदारों में भी गहराई ला सकता है।
'हसीन दिलरुबा' से बढ़ी लोकप्रियता
नेटफ्लिक्स की फिल्म **'हसीन दिलरुबा'** में विक्रांत मैसी ने ऋषभ सक्सेना यानी रिशु का किरदार निभाया।
फिल्म में तापसी पन्नू भी मुख्य भूमिका में थीं।
रिशु का किरदार शुरुआत में बेहद साधारण नजर आता है, लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ उसके व्यक्तित्व की अलग-अलग परतें सामने आती हैं।
इस भूमिका ने विक्रांत को बड़े डिजिटल दर्शक वर्ग तक पहुंचाया।
फिल्म की लोकप्रियता के बाद इसका सीक्वल भी बनाया गया और विक्रांत ने एक बार फिर अपने किरदार को आगे बढ़ाया।
12th Fail' ने बदल दी पूरी तस्वीर
विक्रांत मैसी के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में **'12th Fail'** का नाम सबसे ऊपर आता है।
विधु विनोद चोपड़ा निर्देशित फिल्म IPS अधिकारी मनोज कुमार शर्मा की जिंदगी से प्रेरित थी।
विक्रांत ने इसमें मनोज शर्मा का मुख्य किरदार निभाया।
फिल्म एक ऐसे युवा की कहानी दिखाती है जो बेहद सीमित संसाधनों और लगातार असफलताओं के बावजूद UPSC परीक्षा पास करने के सपने को नहीं छोड़ता।
विक्रांत का अभिनय दर्शकों के दिल तक पहुंचा।
फिल्म ने थिएटर में धीरे-धीरे मजबूत पकड़ बनाई और बाद में OTT पर भी जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की।
मिला नेशनल फिल्म अवॉर्ड
'12th Fail' में विक्रांत मैसी के अभिनय को केवल दर्शकों ने ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला।
उन्हें इस फिल्म के लिए **सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार** मिला।
यह उपलब्धि उनके लंबे अभिनय सफर के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी।
एक समय टीवी में सहायक भूमिकाएं करने वाला कलाकार अब भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित अभिनय पुरस्कारों में शामिल नेशनल अवॉर्ड जीत चुका था।
इस उपलब्धि ने विक्रांत की स्थिति इंडस्ट्री में और मजबूत कर दी।
करियर में आए उतार-चढ़ाव
विक्रांत का सफर केवल सफलता की सीधी कहानी नहीं रहा।
उन्होंने खुद कई बार फिल्म इंडस्ट्री में मिलने वाली अनिश्चितता और कलाकार के मानसिक दबाव के बारे में बात की है।
हर प्रोजेक्ट सफल नहीं हुआ।
कई फिल्मों में मजबूत अभिनय के बावजूद उन्हें उतनी व्यावसायिक सफलता नहीं मिली जितनी बड़े सितारों को आसानी से मिल जाती है।
इसके बावजूद उन्होंने लगातार काम किया और किरदार चुनने में प्रयोग करते रहे।
उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि एक अभिनेता की पहचान कभी-कभी एक बड़ी ब्लॉकबस्टर से नहीं बल्कि लगातार अच्छे प्रदर्शन से बनती है।
अचानक ब्रेक की घोषणा से चौंके थे फैंस
दिसंबर 2024 में विक्रांत मैसी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर अभिनय से कुछ समय दूर जाने की बात कही थी।
उनकी पोस्ट के बाद ऐसी खबरें चलने लगीं कि वह फिल्मों से रिटायर हो रहे हैं।
बाद में विक्रांत ने स्पष्ट किया कि वह स्थायी रूप से अभिनय छोड़ नहीं रहे थे, बल्कि थकान के कारण कुछ समय का ब्रेक चाहते थे।
उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने परिवार, स्वास्थ्य और निजी जीवन पर ध्यान देने की जरूरत महसूस हुई।
इस घटनाक्रम ने दिखाया कि लगातार काम और सफलता के पीछे कलाकारों पर मानसिक और शारीरिक दबाव भी कितना ज्यादा हो सकता है।
'मिर्जापुर द मूवी' में बाबलू की वापसी
अब विक्रांत मैसी एक बार फिर उसी किरदार में लौटे हैं जिसने OTT के शुरुआती दौर में उन्हें जबरदस्त पहचान दिलाई थी।
*'Mirzapur: The Movie'** में विक्रांत फिर बाबलू पंडित के रूप में नजर आए हैं।
फिल्म में पंकज त्रिपाठी के कालीन भैया, अली फजल के गुड्डू पंडित और दिव्येंदु के मुन्ना त्रिपाठी जैसे लोकप्रिय किरदारों की दुनिया को बड़े पर्दे पर पेश किया गया है।
वेब सीरीज में बाबलू और मुन्ना जैसे किरदारों की कहानी अलग मोड़ ले चुकी थी, इसलिए फिल्मी रूपांतरण में उनकी वापसी दर्शकों के लिए खास आकर्षण बनी।
4 सितंबर को सिनेमाघरों में आई फिल्म
'Mirzapur: The Movie' को **4 सितंबर 2026** को सिनेमाघरों में रिलीज किया गया।
यह 'मिर्जापुर' फ्रेंचाइजी को OTT से बड़े पर्दे तक ले जाने वाला बड़ा प्रयोग है।
वेब सीरीज ने वर्षों में मजबूत फैन बेस बनाया है। इसलिए फिल्म के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हीं दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरना रही।
विक्रांत की वापसी ने फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
टीवी से नेशनल अवॉर्ड तक
विक्रांत मैसी की कहानी को केवल सफलता की कहानी कहना शायद अधूरा होगा।
यह लगातार खुद को बदलने की कहानी भी है।
पहले कॉरपोरेट नौकरी छोड़ना, फिर टेलीविजन में काम करना, टीवी की सुरक्षित पहचान छोड़कर फिल्मों में छोटे किरदार स्वीकार करना और उसके बाद OTT के जरिए खुद को नए सिरे से स्थापित करना—हर चरण में उन्होंने जोखिम उठाया।
'मिर्जापुर' ने उन्हें लोकप्रिय बनाया तो '12th Fail' ने उन्हें अभिनय की सबसे मजबूत श्रेणी में पहुंचा दिया।
आज उनके पास नेशनल अवॉर्ड है और बड़े फिल्मी प्रोजेक्ट हैं।
अधूरा नहीं रहा जोखिम लेने का फैसला
विक्रांत मैसी का करियर उन युवाओं के लिए भी दिलचस्प उदाहरण है जो सुरक्षित करियर और अपने पसंदीदा क्षेत्र के बीच फैसला करने की दुविधा से गुजरते हैं।
हालांकि उनकी कहानी का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को नौकरी छोड़कर जोखिम लेना चाहिए। मनोरंजन उद्योग में सफलता की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती।
लेकिन विक्रांत की यात्रा यह जरूर दिखाती है कि उन्होंने अपने फैसले के बाद वर्षों तक लगातार काम किया, छोटे किरदार स्वीकार किए और धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई।
कॉरपोरेट नौकरी से शुरू हुआ यह सफर टीवी, फिल्मों और OTT से गुजरते हुए नेशनल अवॉर्ड तक पहुंचा।
अब 'मिर्जापुर' की दुनिया में बाबलू पंडित के रूप में उनकी वापसी इस यात्रा को एक दिलचस्प पूरा चक्र देती है।
जिस कलाकार ने कभी छोटे पर्दे से पहचान बनानी शुरू की थी, आज वही बड़े पर्दे पर देश की सबसे लोकप्रिय क्राइम फ्रेंचाइजी के प्रमुख चेहरों में शामिल है।
**विक्रांत मैसी की कहानी रातोंरात स्टार बनने की नहीं, बल्कि लगातार संघर्ष, जोखिम, असफलताओं और अलग-अलग किरदारों के जरिए धीरे-धीरे अपनी जगह बनाने की कहानी है।**
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