Mumbai:बॉलीवुड के दो बड़े फिल्मी परिवारों कपूर खानदान और बच्चन परिवार से जुड़े अभिषेक बच्चन और करीना कपूर ने जब साथ में फिल्मी दुनिया में कदम रखा, तो इंडस्ट्री में इसे एक बड़ी और मजबूत ऑन-स्क्रीन जोड़ी के रूप में देखा गया। दोनों ने 30 जून 2000 को जेपी दत्ता की फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इस फिल्म से उम्मीदें काफी ज्यादा थीं और माना जा रहा था कि यह जोड़ी आगे चलकर कई हिट फिल्मों का हिस्सा बनेगी।
शुरुआत में दर्शकों और फिल्म निर्माताओं को लगा कि यह नई जोड़ी लंबे समय तक बड़े पर्दे पर राज करेगी, लेकिन समय के साथ हालात बदलते गए। दोनों कलाकारों ने शुरुआती दौर में कुछ और फिल्मों में साथ काम किया, लेकिन उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकीं। लगातार कमजोर प्रदर्शन के चलते यह जोड़ी महज तीन साल और तीन फिल्मों तक ही सीमित रह गई।
साल 2003 इस जोड़ी के करियर के लिए खास तौर पर चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। इस साल रिलीज हुई उनकी फिल्मों को कमर्शियल सफलता नहीं मिल सकी, जिससे फिल्म निर्माताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा। बताया जाता है कि कई प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को आर्थिक रूप से बड़ा झटका लगा, क्योंकि जिन फिल्मों से हिट होने की उम्मीद थी, वे दर्शकों को प्रभावित करने में असफल रहीं।
इंडस्ट्री में इस स्थिति को लेकर यह चर्चा भी शुरू हो गई कि क्या यह जोड़ी बड़े पर्दे पर दर्शकों को आकर्षित करने में सक्षम है या नहीं। लगातार फ्लॉप फिल्मों ने उनके करियर की दिशा बदल दी और धीरे-धीरे दोनों ने अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना शुरू कर दिया। इसके बाद अभिषेक बच्चन और करीना कपूर ने अपने-अपने करियर में अलग राह पकड़ ली और साथ काम करना लगभग बंद कर दिया।
हालांकि बाद में दोनों कलाकारों ने व्यक्तिगत रूप से बॉलीवुड में अपनी पहचान मजबूत की, लेकिन उनकी शुरुआती जोड़ी वैसी सफलता नहीं हासिल कर सकी, जैसी उम्मीद की जा रही थी। अभिषेक बच्चन ने आगे चलकर कई अलग-अलग किरदारों में काम किया, जबकि करीना कपूर ने भी कई हिट फिल्मों के जरिए अपनी जगह बनाई।
फिल्मी इतिहास में अभिषेक और करीना की जोड़ी को एक ऐसी शुरुआत के रूप में देखा जाता है, जिसमें संभावनाएं बहुत थीं, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं रहे। उनकी कहानी यह भी दर्शाती है कि बॉलीवुड में स्टार किड्स होने के बावजूद सफलता हमेशा सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि दर्शकों की पसंद और फिल्मों का प्रदर्शन ही अंतिम फैसला करता है।