कभी बॉक्स ऑफिस का बादशाह, फिर हुआ आर्थिक संकट

Update: 2026-07-20 12:51 GMT

मनोरंजन: भारतीय सिनेमा में कई ऐसे सितारे हुए हैं, जिन्होंने बेहद संघर्ष भरे दौर से निकलकर अपनी पहचान बनाई। इन्हीं में से एक नाम है हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता राजेंद्र कुमार का, जिन्हें प्यार से ‘जुबली कुमार’ कहा जाता था। एक समय ऐसा था जब उनके पास मुंबई आने के लिए सिर्फ 50 रुपये थे, लेकिन अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने बॉलीवुड में ऐसा मुकाम हासिल किया कि उनकी फिल्में लगातार कई हफ्तों तक सिनेमाघरों में चलती रहीं।

राजेंद्र कुमार का जन्म 20 जुलाई 1929 को पंजाब में हुआ था। देश के बंटवारे के समय वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई पहुंचे थे। उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे। उन्होंने अपने पिता की दी हुई घड़ी बेचकर 50 रुपये जुटाए और मायानगरी का रुख किया। आंखों में अभिनेता बनने का सपना था, लेकिन शुरुआती दौर बेहद मुश्किलों से भरा रहा।

मुंबई आने के बाद राजेंद्र कुमार ने सबसे पहले फिल्म निर्देशक एचएस रवैल के साथ बतौर असिस्टेंट काम करना शुरू किया। करीब पांच साल तक उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखीं और कई फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने ‘पतंगा’, ‘सगाई’ और ‘पॉकेट मार’ जैसी फिल्मों से जुड़े काम किए।

साल 1955 में उन्हें पहली बार बतौर अभिनेता बड़ा मौका मिला। निर्देशक देवेंद्र गोयल की फिल्म ‘वचन’ में उन्होंने गीता बाली के साथ मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म दर्शकों को काफी पसंद आई और राजेंद्र कुमार को पहचान मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

राजेंद्र कुमार ने अपने करियर में 80 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 1960 के दशक में उनका स्टारडम चरम पर पहुंच गया था। उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सिल्वर जुबली साबित हुईं यानी सिनेमाघरों में 25 हफ्तों से ज्यादा समय तक चलीं। इसी वजह से उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में ‘जुबली कुमार’ के नाम से पहचान मिली।

राजेंद्र कुमार ने अपने करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया। महबूब खान की ऐतिहासिक फिल्म ‘मदर इंडिया’ में उनकी भूमिका को काफी सराहा गया। इसके बाद उन्होंने लगातार सात ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर साबित कर दिया कि वह उस दौर के बड़े सितारों में शामिल हैं।

हालांकि हर कलाकार की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं। राजेंद्र कुमार के जीवन में भी एक समय ऐसा आया जब उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई। लगातार सफलता और शोहरत हासिल करने वाले इस अभिनेता को बाद के वर्षों में पैसों की परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात इतने मुश्किल हो गए कि उन्हें अपना बंगला तक बेचना पड़ा।

बताया जाता है कि आर्थिक संकट के दौरान राजेंद्र कुमार ने अपना बंगला अभिनेता राजेश खन्ना को बेच दिया था। यह बंगला उन्होंने करीब 3.5 लाख रुपये में बेचा था, जबकि उस समय उसकी कीमत काफी ज्यादा बताई जाती थी। यह दौर उनके लिए काफी कठिन था, क्योंकि कभी जिस अभिनेता की फिल्मों के लिए दर्शक सिनेमाघरों में लंबी कतार लगाते थे, वही अभिनेता आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था।

राजेंद्र कुमार ने अपने जीवन के आखिरी वर्षों में भी फिल्मों से जुड़ाव बनाए रखा। उनकी लोकप्रियता और योगदान को हमेशा याद किया जाता रहेगा। जुलाई 1999 में 71 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। बताया जाता है कि नींद में ही कार्डियक अरेस्ट के कारण उनकी मौत हुई।

राजेंद्र कुमार की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, मेहनत और जीवन के उतार-चढ़ाव की कहानी भी है। 50 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे इस कलाकार ने भारतीय सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं और अपने अभिनय से करोड़ों दिलों में जगह बनाई। उनकी जिंदगी यह सिखाती है कि सफलता पाने के लिए संघर्ष जरूरी है, लेकिन समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता।

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