एंटरटेनमेंट :  बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता गोविंदा अपनी शानदार कॉमेडी, जबरदस्त डांस और बेहतरीन अभिनय के लिए जाने जाते हैं। लेकिन अपनी निजी जिंदगी में वह हमेशा अपनी मां निर्मला देवी के बेहद करीब रहे हैं। गोविंदा कई मौकों पर अपनी मां के प्रति प्यार और सम्मान जाहिर कर चुके हैं। यहां तक कि उनकी पत्नी सुनीता आहूजा भी गोविंदा को एक अच्छा बेटा बता चुकी हैं। अब अभिनेता ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में अपनी मां के संघर्ष और बलिदान से जुड़ा ऐसा किस्सा सुनाया है, जिसने उनके परिवार के कठिन दिनों की कहानी सामने ला दी है।
गोविंदा ने खुलासा किया कि एक समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि घर का सामान तक चला गया था। ऐसे मुश्किल दौर में उनकी मां ने बच्चों की परवरिश के लिए अपने सिर के बाल और भौहें तक मुंडवा ली थीं। इतना ही नहीं, उन्होंने साध्वी जैसा जीवन भी अपना लिया था।
कभी फिल्मों की हीरोइन थीं गोविंदा की मां
गोविंदा ने एबीपी न्यूज के कार्यक्रम 'चर्चा विद चित्रा' में अपनी मां निर्मला देवी के जीवन से जुड़े कई अनसुने किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि उनकी मां केवल एक गृहिणी नहीं थीं, बल्कि अभिनय और शास्त्रीय संगीत से भी जुड़ी हुई थीं।
निर्मला देवी ने हिंदी फिल्मों में काम किया था और वह हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गायिका भी थीं। हालांकि, बाद में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। गोविंदा के मुताबिक, उनकी मां ने अपने सपनों से ज्यादा बच्चों की परवरिश को महत्व दिया।अभिनेता ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही अपनी मां को कठिन परिस्थितियों में परिवार की जिम्मेदारियां निभाते देखा था। यही वजह है कि उनके मन में मां के लिए सम्मान लगातार बढ़ता गया।
जब आर्थिक तंगी के कारण घर का सामान भी चला गया
गोविंदा ने इंटरव्यू में अपने परिवार की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए बताया कि एक दौर ऐसा भी आया, जब उनके परिवार ने लगभग सब कुछ खो दिया था।उनके अनुसार, फिल्मों में काम कर चुकी उनकी मां को भी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। हालात इतने खराब हो गए कि उनके बंगले का सामान तक चला गया।इस मुश्किल समय में निर्मला देवी के सामने बच्चों की परवरिश और परिवार की जरूरतें पूरी करने की बड़ी चुनौती थी। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी और परिवार को संभालने का फैसला किया।गोविंदा ने बताया कि उनकी मां ने कठिनाइयों के बावजूद बच्चों को बड़ा करने के लिए लगातार संघर्ष किया।
पिता की एक बात सुनकर मां ने मुंडवा लिया सिर
गोविंदा ने अपनी मां के जीवन से जुड़ा सबसे चौंकाने वाला किस्सा बताते हुए कहा कि आर्थिक तंगी के दौरान उनके पिता अरुण कुमार आहूजा ने निर्मला देवी की खूबसूरती को लेकर चिंता जाहिर की थी।
अभिनेता के मुताबिक, उनके पिता को आशंका थी कि अगर निर्मला देवी काम मांगने बाहर जाएंगी, तो कुछ लोग उन्हें गलत नजर से देख सकते हैं।गोविंदा ने बताया कि पिता की इस बात के बाद उनकी मां ने बेहद बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपने सिर के बाल मुंडवा लिए और भौहें भी हटवा लीं।इसके बाद निर्मला देवी साध्वी जैसे वस्त्र पहनने लगीं। उनके लिए अपनी खूबसूरती और व्यक्तिगत इच्छाओं से ज्यादा जरूरी बच्चों का भविष्य था।गोविंदा के अनुसार, उनकी मां की इच्छा बस यही थी कि उनके बच्चे सुरक्षित रहें और अच्छी तरह बड़े हो सकें।
मां को भगवान की तरह पूजते हैं गोविंदा
गोविंदा ने बताया कि बचपन में मां के संघर्ष को देखने के बाद उनके मन में उनके प्रति गहरी श्रद्धा पैदा हो गई थी। वह अपनी मां को केवल जन्म देने वाली महिला नहीं, बल्कि अपने जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा मानने लगे।अभिनेता ने कहा कि मां ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ बच्चों के भविष्य के लिए कई कठिन फैसले लिए।गोविंदा के अनुसार, उन्होंने कम उम्र में ही ठान लिया था कि वह अपनी मां को जीवन की सभी खुशियां देना चाहते हैं। उनका पहला लक्ष्य फिल्मों में नाम कमाना नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना और मां को सुख देना था।
पत्नी सुनीता आहूजा भी कर चुकी हैं तारीफ
गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा का रिश्ता अक्सर चर्चाओं में रहता है। सुनीता कई इंटरव्यू में अपने वैवाहिक जीवन से जुड़ी बातें खुलकर रख चुकी हैं।हालांकि, पति के साथ मतभेदों की चर्चा के बीच भी वह गोविंदा के अपनी मां के प्रति समर्पण की तारीफ कर चुकी हैं। सुनीता ने उन्हें एक अच्छा बेटा बताया था।वहीं, गोविंदा ने भी स्वीकार किया है कि उनकी जिंदगी में मां का स्थान बेहद खास रहा है। मां के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व और सोच पर गहरा प्रभाव डाला है।
मां के निधन के बाद भी महसूस करते हैं उनकी मौजूदगी
गोविंदा की मां निर्मला देवी का निधन 15 जून 1996 को हुआ था। उस समय उनकी उम्र 69 वर्ष थी।अभिनेता ने बताया कि मां के निधन के कई वर्षों बाद भी वह उनकी मौजूदगी महसूस करते हैं। उनके लिए मां की यादें आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने यह भी कहा कि मां के संघर्ष ने उन्हें दूसरों की आलोचनाओं का सामना करना सिखाया है। वह लोगों की बातों से ज्यादा उनके हालात और परिस्थितियों को समझने में विश्वास रखते हैं।
मां का संघर्ष बना गोविंदा की जिंदगी की सबसे बड़ी सीख
बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने वाले गोविंदा की जिंदगी में उनकी मां का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। अभिनेता का मानना है कि उन्होंने अपनी मां से त्याग, धैर्य और कठिन परिस्थितियों में मजबूत बने रहने की सीख ली।निर्मला देवी की कहानी बताती है कि उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए निजी इच्छाओं और अभिनय की दुनिया से दूरी बनाकर परिवार की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी।
गोविंदा के इस खुलासे ने एक बार फिर उनकी मां के प्रति गहरी श्रद्धा और परिवार के संघर्ष को चर्चा में ला दिया है। पर्दे पर करोड़ों दर्शकों को हंसाने वाले अभिनेता की जिंदगी का यह पहलू उनके बचपन की कठिन परिस्थितियों और मां-बेटे के भावनात्मक रिश्ते को उजागर करता है।
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