विमल इलायची ऐड पर FDA का एक्शन SRK अजय और टाइगर को नोटिस
विमल इलायची मामले में बॉलीवुड सितारों पर FDA की कार्रवाई
मुंबई: महाराष्ट्र FDA ने एक्टर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को 'विमल इलायची' के विज्ञापन के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। FDA का कहना है कि यह विज्ञापन पहली नज़र में प्रतिबंधित पान मसाला और तंबाकू से जुड़े प्रोडक्ट्स का "अप्रत्यक्ष या सरोगेट" प्रमोशन है।
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने कहा कि विज्ञापन में "विमल इलायची" शब्द का इस्तेमाल 'विमल पान मसाला' ब्रांड से जुड़ाव पैदा करता है और इससे कंज्यूमर्स गुमराह हो सकते हैं, साथ ही यह प्रतिबंधित प्रोडक्ट का अप्रत्यक्ष रूप से प्रमोशन भी करता है।
FDA के ग्रेटर मुंबई डिवीज़न ने 11 अगस्त को जारी नोटिस में कहा कि यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि विज्ञापन में उसी ब्रांड पहचान का इस्तेमाल किया गया है जो 'विमल पान मसाला' से जुड़ी है। नोटिस में तीनों एक्टर्स को ब्रांड एंडोर्सर बताया गया और उनसे 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया।
नोटिस को "आखिरी चेतावनी" बताते हुए कहा गया कि यह विज्ञापन पहली नज़र में खाने-पीने की चीज़ों से जुड़ा गुमराह करने वाला विज्ञापन लगता है और यह 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' और इसके तहत बने नियमों के खिलाफ है।
इसमें दूसरे कानूनों और गाइडलाइंस के तहत सरोगेट या अप्रत्यक्ष विज्ञापन से जुड़े संभावित उल्लंघनों की ओर भी इशारा किया गया।
FDA ने एक्टर्स को निर्देश दिया है कि वे 'विमल पान मसाला/इलायची' विज्ञापन में अपनी भागीदारी और एंडोर्समेंट तुरंत बंद करें और अपने कंट्रोल वाले ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल, वेबसाइट और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रमोशनल कंटेंट हटा दें।
साथ ही, उन्हें यह भी निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी रूप में विज्ञापन के प्रसारण, प्रकाशन, प्रसार या प्रमोशन में कोई और सहयोग या मदद न दें। नोटिस में एक्टर्स से यह भी कहा गया है कि वे कैंपेन में शामिल होने से पहले अपने या अपनी एजेंसियों द्वारा की गई जांच-पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) का विवरण दें।
यह कार्रवाई FDA द्वारा 'विमल इलायची' के विज्ञापन की जांच के बाद की गई है। FDA का कहना है कि यह विज्ञापन टीवी चैनलों, डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूसरे प्रमोशनल माध्यमों से फैलाया जा रहा था। नोटिस के अनुसार, महाराष्ट्र में 'विमल' ब्रांड मुख्य रूप से पान मसाला से जुड़ा है, और यहां प्रतिबंधित पदार्थों वाले पान मसाले पर रोक है।
नोटिस में एक्टर्स से दस्तावेजी सबूत मांगे गए हैं ताकि यह पता चल सके कि क्या 'विमल इलायची' वास्तव में बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध एक स्वतंत्र प्रोडक्ट है या फिर यह 'विमल पान मसाला' या तंबाकू से जुड़े प्रोडक्ट्स को प्रमोट करने के मकसद से किया गया सरोगेट या ब्रांड-एक्सटेंशन कम्युनिकेशन है। आदेश में कहा गया है कि उनसे अपने एंडोर्समेंट एग्रीमेंट, कैंपेन ब्रीफ, प्रोडक्ट की जानकारी, पेमेंट या एंडोर्समेंट से जुड़ी व्यवस्थाओं की कॉपी और डिटेल देने के साथ-साथ कैंपेन में शामिल एडवरटाइजिंग एजेंसी और ब्रांड के मालिक की जानकारी भी मांगी गई है।
FDA ने उन सभी टीवी चैनलों, डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूसरे मीडिया की जानकारी मांगी है जिन पर एक्टर्स की मौजूदगी वाले विज्ञापन दिखाए या छापे गए थे, साथ ही यह भी बताया जाए कि ये विज्ञापन कितने समय तक दिखाए गए। नोटिस में एंडोर्स करने वालों और विज्ञापन देने वाले या ब्रांड के मालिक के बीच किसी भी तरह के संबंध का खुलासा करने के लिए भी कहा गया है।
एक्टर्स को नोटिस मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण और सहायक दस्तावेज जमा करने के लिए कहा गया है। वे खुद या किसी अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध भी कर सकते हैं।
FDA ने चेतावनी दी है कि अगर तय समय के भीतर कोई स्पष्टीकरण नहीं मिलता है, या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो बिना किसी और नोटिस के आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
यह नोटिस महाराष्ट्र फूड सेफ्टी कमिश्नर द्वारा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट की धारा 30(2)(a) के तहत 13 जुलाई को जारी किए गए प्रतिबंध आदेश के बाद आया है। यह आदेश एक साल तक लागू रहेगा और इसमें तंबाकू, निकोटीन और सुपारी (अरेका-नट) वाले प्रतिबंधित खाद्य उत्पाद शामिल हैं।
FDA ने कहा कि बाजार में विमल ब्रांड मुख्य रूप से पान मसाला से जुड़ा हुआ है और राज्य में प्रतिबंधित पान मसाला उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
विभाग ने जानकारी और उचित कार्रवाई के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) और सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी को भी नोटिस की कॉपी भेजी हैं।
इसमें फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (विज्ञापन और दावे) रेगुलेशन, 2018 का भी जिक्र है, जिसमें दावों के सच्चे, स्पष्ट और गुमराह न करने वाले होने के प्रावधान और विज्ञापन बंद करने और सुधारात्मक विज्ञापन से संबंधित रेगुलेशन 15 शामिल हैं।
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 21 के तहत, सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी गुमराह करने वाले विज्ञापन को बंद करने या उसमें बदलाव करने का निर्देश दे सकती है, एंडोर्स करने वालों पर जुर्माना लगा सकती है और कुछ खास परिस्थितियों में, एंडोर्स करने वाले को तय समय के लिए उत्पादों या सेवाओं का एंडोर्समेंट करने से रोक सकती है।
महाराष्ट्र FDA, कमिश्नर तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में, सुरक्षा और स्वच्छता की जांच के लिए खाद्य आउटलेट्स और उत्पादों का बड़े पैमाने पर निरीक्षण कर रहा है।