बिहार के लोकगीतों को मिला राष्ट्रीय मंच

लोक संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

Update: 2026-06-15 14:41 GMT

New Delhi नई दिल्ली :  साल 1989 में रिलीज हुई फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ आज भी बॉलीवुड की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म से सलमान खान ने अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन इसी फिल्म के साथ एक ऐसी गायिका ने भी अपनी अलग पहचान बनाई, जिन्होंने भारतीय लोक संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

हम बात कर रहे हैं मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा की, जिनकी आवाज ने इस फिल्म के एक लोकप्रिय गीत ‘कहे तोसे सजना’ को खास पहचान दी। यह गाना उस समय दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ और आज भी लोगों की यादों में बसा हुआ है।

कम लोगों को यह जानकारी है कि यह गीत किसी ओरिजिनल फिल्मी रचना पर आधारित नहीं था, बल्कि यह बिहार के पारंपरिक लोकगीत से प्रेरित था। शारदा सिन्हा ने अपनी सुरीली आवाज के जरिए इस लोकगीत को फिल्मी संगीत के साथ जोड़कर इसे एक नया जीवन दिया।

इस गीत की लोकप्रियता के बाद शारदा सिन्हा को भारतीय लोक संगीत को मुख्यधारा में लाने का श्रेय दिया जाने लगा। उन्होंने अपने करियर में कई ऐसे लोकगीत गाए, जिनमें बिहार और पूर्वी भारत की संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मैंने प्यार किया’ जैसी फिल्मों में लोक संगीत का इस्तेमाल न केवल गानों को लोकप्रिय बनाता है, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद करता है।

शारदा सिन्हा को उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उनकी गायकी ने यह साबित किया कि लोक संगीत केवल परंपरा नहीं, बल्कि आज के दौर में भी उतना ही प्रभावशाली और लोकप्रिय हो सकता है।

आज भी ‘कहे तोसे सजना’ जैसे गीत भारतीय संगीत प्रेमियों के बीच उतने ही पसंद किए जाते हैं और यह शारदा सिन्हा की अमिट पहचान का हिस्सा बन चुके हैं।

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