मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल ने अपने जीवन के एक ऐसे सपने का खुलासा किया है, जिसे वह पिता धर्मेंद्र की वजह से पूरा नहीं कर सके। फिल्मों में अपने दमदार एक्शन और संवादों से दर्शकों का दिल जीतने वाले सनी देओल असल जिंदगी में पेशेवर फॉर्मूला 1 रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे। हालांकि धर्मेंद्र अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित रहते थे और इसी कारण उन्होंने सनी को इस जोखिम भरे खेल में आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।
सनी देओल ने यह खुलासा अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति में किया। वह अपनी फिल्म बंटवारा 1947 के प्रचार के लिए शो में पहुंचे थे। उनके साथ फिल्म के निर्माता आमिर खान और अभिनेत्री प्रीति जिंटा भी मौजूद थीं। तीनों कलाकारों ने अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म, निजी जीवन और पुराने अनुभवों से जुड़े कई किस्से साझा किए।
बातचीत के दौरान अमिताभ बच्चन ने सनी से पूछा कि क्या वह कभी रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे और फॉर्मूला 1 में उनकी विशेष दिलचस्पी थी। सवाल सुनकर सनी ने स्वीकार किया कि उन्हें बचपन और युवावस्था से ही कार चलाने तथा रेसिंग का बहुत शौक था। वह इस क्षेत्र को पेशेवर रूप से अपनाने की इच्छा रखते थे, लेकिन परिवार की अनुमति नहीं मिलने से उनका सपना बीच में ही छूट गया।
सनी ने बताया कि उनके पिता धर्मेंद्र अपने बच्चों को लेकर बेहद सुरक्षात्मक थे। परिवार में कोई भी बच्चा जोखिम भरे खेल या दूसरी खतरनाक गतिविधियों में शामिल होना चाहता तो धर्मेंद्र उसे आसानी से अनुमति नहीं देते थे। सनी के मुताबिक फॉर्मूला 1 रेसिंग को लेकर भी यही हुआ। तेज रफ्तार और दुर्घटना के खतरे को देखते हुए पिता ने उन्हें पेशेवर रेसिंग में जाने की इजाजत नहीं दी।
अभिनेता ने कहा कि उन्हें ड्राइविंग के अलावा खेलों से जुड़ी दूसरी गतिविधियों में भी काफी दिलचस्पी थी, लेकिन पिता की चिंता के कारण वह कई चीजों को आगे नहीं बढ़ा सके। उन्होंने धर्मेंद्र के फैसले को शिकायत की तरह नहीं, बल्कि पिता के प्यार और सुरक्षा की भावना के रूप में याद किया। ने भी सनी के इस अधूरे सपने और धर्मेंद्र के सुरक्षात्मक स्वभाव का उल्लेख किया है।
भले ही सनी देओल फॉर्मूला 1 रेसिंग ड्राइवर नहीं बन पाए, लेकिन उन्होंने हिंदी फिल्म उद्योग में लंबा और सफल सफर तय किया। उन्होंने 1983 में राहुल रवैल के निर्देशन में बनी फिल्म बेताब से अभिनय की शुरुआत की थी। पहली ही फिल्म से उन्हें दर्शकों के बीच पहचान मिली और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
अपने करियर में सनी ने अर्जुन, त्रिदेव, घायल, दामिनी, घातक, बॉर्डर, जिद्दी, इंडियन और गदर जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्म घायल ने उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी दिलाया। दामिनी में बोला गया उनका तारीख पे तारीख संवाद आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित संवादों में शामिल है। गदर और गदर 2 की सफलता ने नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उनकी लोकप्रियता को मजबूत किया।
सनी की नई फिल्म बंटवारा 1947 देश के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा, करण देओल, शबाना आजमी और अली फजल प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म को आमिर खान प्रोडक्शंस ने प्रस्तुत किया है। फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है, हालांकि सनी के अभिनय की प्रशंसा की जा रही है।
बंटवारा 1947 का बॉक्स ऑफिस पर इमरान हाशमी की आवारापन 2 से मुकाबला है। शुरुआती ट्रेड रिपोर्टों में आवारापन 2 को बढ़त मिली है। अलग-अलग बॉक्स ऑफिस ट्रैकर्स के आंकड़ों में अंतर है।
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