असम का रामायण-महाभारत कनेक्शन, फिल्म के बीच बढ़ी चर्चा

Update: 2026-08-02 14:09 GMT

नई दिल्ली। फिल्म निर्माता नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। इसी बीच असम के प्राचीन इतिहास और रामायण-महाभारत से जुड़े कथित संबंधों को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। सोशल मीडिया और विभिन्न चर्चाओं में यह सवाल उठ रहा है कि क्या असम का संबंध वास्तव में इन प्राचीन भारतीय महाकाव्यों से जुड़ा हुआ है।

रामायण को महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य माना जाता है, जिसमें भगवान राम के जीवन, उनके आदर्शों और धर्म के मार्ग का वर्णन किया गया है। इस ग्रंथ में सात कांड और करीब 24 हजार श्लोक बताए जाते हैं। सदियों से यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

हाल ही में इतिहासकार डॉ. सौरदीप नाथ ने एक पॉडकास्ट बातचीत में असम के प्राचीन इतिहास और पौराणिक संदर्भों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आज का असम क्षेत्र प्राचीन समय में प्रागज्योतिष के नाम से जाना जाता था और इसका उल्लेख रामायण, महाभारत तथा कई अन्य प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।

इतिहासकारों के अनुसार, प्रागज्योतिषपुर को प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण राज्यों में से एक माना जाता था। माना जाता है कि यह क्षेत्र वर्तमान असम के आसपास स्थित था। प्राचीन ग्रंथों में इस राज्य और यहां के शासकों का उल्लेख मिलता है, जिससे असम की सभ्यता की प्राचीनता का संकेत मिलता है।

डॉ. सौरदीप नाथ के अनुसार, असम का इतिहास केवल अहोम राजवंश तक सीमित नहीं है। अहोम राजवंश ने 13वीं से 19वीं शताब्दी तक इस क्षेत्र पर शासन किया, लेकिन असम की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ें इससे भी कई सदियों पुरानी हैं।

रामायण और महाभारत में प्रागज्योतिष का उल्लेख मिलता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, प्रागज्योतिषपुर की राजधानी वर्तमान गुवाहाटी क्षेत्र के आसपास मानी जाती है। कामाख्या मंदिर के आसपास के क्षेत्र को भी प्राचीन प्रागज्योतिष से जोड़कर देखा जाता है।

पौराणिक कथाओं में नरकासुर का नाम प्रागज्योतिष के शासक के रूप में मिलता है। मान्यता है कि नरकासुर पृथ्वी देवी और भगवान विष्णु के वराह अवतार के पुत्र थे। कई धार्मिक ग्रंथों में उनका वर्णन एक शक्तिशाली राजा के रूप में किया गया है। भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की कथा भी भारतीय पौराणिक परंपरा में प्रसिद्ध है।

महाभारत में भी प्रागज्योतिष के राजा भगदत्त का उल्लेख मिलता है। उन्हें कौरवों की ओर से युद्ध करने वाले प्रमुख योद्धाओं में शामिल बताया गया है। भगदत्त को हाथियों की सेना और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध माना जाता था। इस तरह प्राचीन ग्रंथों में असम क्षेत्र का उल्लेख कई महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा हुआ दिखाई देता है।

फिल्म 'रामायण' को लेकर बढ़ी चर्चा ने एक बार फिर भारत के प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पौराणिक परंपराओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। असम के लोग भी अपने क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को लेकर गर्व महसूस करते हैं और इसे भारतीय सभ्यता के पुराने अध्यायों से जोड़कर देखते हैं।

हालांकि इतिहास और पौराणिक कथाओं के बीच अंतर को समझना भी जरूरी है। कई स्थानों और घटनाओं का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, लेकिन उनके ऐतिहासिक प्रमाणों को लेकर अलग-अलग मत हो सकते हैं। फिर भी यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि असम की संस्कृति और परंपरा भारत के प्राचीन इतिहास का एक अहम हिस्सा रही है।

नितेश तिवारी की 'रामायण' के कारण शुरू हुई यह चर्चा केवल फिल्म तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने भारतीय महाकाव्यों, प्राचीन राज्यों और सांस्कृतिक विरासत को लेकर लोगों की रुचि भी बढ़ा दी है।

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