सरकार ऐसा भी कर सकती

हिमाचल में राजनीतिक दर्शक दीर्घा के सामने सुक्खू सरकार अपने कड़े फैसलों का जोरदार प्रदर्शन करते हुए

Update: 2022-12-24 08:29 GMT

फाइल फोटो 

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | हिमाचल में राजनीतिक दर्शक दीर्घा के सामने सुक्खू सरकार अपने कड़े फैसलों का जोरदार प्रदर्शन करते हुए और कितना आगे निकलेगी, ये कयास मात्र नहीं, बल्कि एक अनूठी पड़ताल है। लगातार दफ्तरों की सांकल बंद करती मौजूदा सरकार ने यह ध्येय बना लिया है कि पिछली सरकार के अंतिम स्पर्श के तमाम निशान मिटा दिए जाएं। स्वास्थ्य के 180, राजस्व के 72 और पीडब्ल्यूडी के 16 कार्यालय बंद कर देने के मायने, राजनीतिक बहस के ढक्कन खोल रहे हैं। भाजपा के लिए इन फैसलों का पीछा करना स्वाभाविक है और इसका असर देखा जा सकता है। सुक्खू सरकार ने खुद को साबित करने के लिए अगर डिनोटिफिकेशन का फैसला लिया है, तो इसके एक ऐसा मानचित्र विकसित हो रहा है, जहां जनता के सामने कुछ न कुछ खोने का सबब पैदा होगा और भाजपा के लिए इन फैसलों का मुद्दा बनाने का ढोल बोल रहा होगा।

बावजूद इसके समय की मांग और हकीकत के मार्ग पर एक दिन तो यह सोचना ही पड़ेगा कि अदने से हिमाचल के लिए कितने दफ्तर, कितने स्कूल-कालेज और कितने चिकित्सा संस्थान चाहिएं। घोषणाएं राजनीतिक भेड़-बकरियां बन जाएं, तो इन काफिलों का कभी अंत नहीं होगा। मजबूरियां बचत और बजट की हो सकती हैं या पिछली सरकार के अंतिम करतब पर बटोरी गई तालियों पर अंकुश लगाने का इससे बड़ा और अवसर क्या होगा, लेकिन अपने नक्शे बदलती सरकार को बताना ही पड़ेगा कि उसका प्रशासनिक व शासनिक मॉडल होगा क्या। बहरहाल यह तो मान सकते हैं कि सरकारें अपने अंतिम दौर में गुंजाइश से अधिक, फरमाइश पर गौर फरमाते हुए सत्ता की सलतनत को परवान चढ़ाते हुए, अंधाधुंध विस्तार करती हैं। सुक्खू सरकार ने सभी विभागों की कांट छांट करते हुए प्रदेश को नई सुर्खियां जरूर प्रदान की हैं। लोग सोच सकते हैं कि सरकारें ऐसा भी कर सकती हैं और ऐसा करने की बाध्यता को समझ सकते हैं, बशर्ते सरकार उन्हें यह समझाने के लिए रोडमैप सामने रखे। सरकार को अपने मायने साबित करने की जरूरत इसलिए भी दिखाई दे रही है, क्योंकि हिमाचल ने अभी तक पूरे मंत्रिमंडल की झलक नहीं देखी है। सरकार का एक सशक्त पक्ष मुख्यमंत्री व डिप्टी सीएम के रूप में सामने आ रहा है, लेकिन सामूहिक जिम्मेदारी में तमाम मंत्रियों के चेहरे सामने आने चाहिएं। प्रदेश में जो हो रहा है, वह एक तरह से सत्ता का हुकम है, लेकिन लोकतांत्रिक परंपराएं सरकार की जवाबदेही में मंत्रिमंडल देखना चाहती हैं। जाहिर है जब कोई स्वतंत्र रूप से स्वास्थ्य, राजस्व व लोक निर्माण मंत्री होगा, तो कार्यालयों के बंद दरवाजों के आगे सरकार के फैसलों का औचित्य भी बताएगा। भले ही सरकार की विवशता रही हो, लेकिन जहां प्रश्र उठेंगे वहां कुछ तो बताना ही पड़ेगा। सरकार की संरचना में एकाधिकार कुछ समय के लिए वरदान सिद्ध हो भी जाए, लेकिन इसकी अहमियत में सामूहिक जिम्मेदारी का एहसास आवश्यक हो जाता है। विभागों की कतरब्यौंत ने मंत्रियों की सुध लेनी शुरू कर दी है, नतीजतन जिज्ञासा यह भी है कि सरकार का सकारात्मक पक्ष दिखाई तो दे। ये कार्यालय बंद हो रहे हैं, तो इसके साथ जुड़ी संवेदना जाग रही है।


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