विवाह समारोह के आयोजकों ने दावा किया कि यह एक शानदार अनुभव है, लेकिन इस कदम को लेकर कई मेहमानों ने इसे ‘नॉर्मल नहीं’ और ‘बेहद सस्तापन’ करार दिया। कई लोगों ने इसे एक गलत कदम माना, क्योंकि वे शादी जैसे खास मौके पर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के शरीक होने की उम्मीद रखते थे।
सोशल मीडिया पर इस निर्णय पर बहस छिड़ गई और कुछ यूज़र्स ने इसे तंज करते हुए कहा कि इस तरह के फैसले शादी के पारंपरिक मूल्यों से भटकाव को दर्शाते हैं। एक यूज़र ने लिखा, "यह स्वागत नहीं बल्कि एक व्यवसायिक कदम है। शादी में इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता।"
इस मामले ने यह भी सवाल उठाया कि आजकल के महंगे आयोजन और अनावश्यक खर्चों के दौर में पारंपरिक और सादगीपूर्ण विवाह समारोह की महत्ता कहीं न कहीं खोती जा रही है। वहीं कुछ लोगों ने इस फैसले का समर्थन करते हुए इसे एक "अनूठी और यादगार" पहल माना, जो मेहमानों को अलग तरह का अनुभव प्रदान करती है।
हालांकि, यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि शादी समारोहों के बढ़ते खर्च और विशेष आयोजनों में बदलाव ने पारंपरिक रिश्तों और स्वागतम् के तरीके को भी प्रभावित किया है।