Hunger strike के बीच वांगचुक अस्पताल में भर्ती, बढ़ा विवाद

Update: 2026-07-18 08:35 GMT

New Delhi नई दिल्ली :   सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से अस्पताल में भर्ती करा दिया। वांगचुक पिछले करीब 20 दिनों से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया है।

सोनम वांगचुक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। शनिवार सुबह पुलिस टीम मौके पर पहुंची और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल ले जाया गया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।

आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह सत्ता का अहंकार है और शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे व्यक्ति की मांगों को सुनने के बजाय उन्हें जबरन हटाया जा रहा है। संजय सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि सोनम वांगचुक को जबरन हटाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अब शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को भी स्वीकार नहीं कर रही है।

डिंपल यादव ने अपने दूसरे पोस्ट में कहा कि जब शांतिपूर्ण आवाजों को दबाया जाता है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने सोनम वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाज को देश की आवाज बताते हुए कहा कि ऐसी आवाजों का सम्मान किया जाना चाहिए।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने भी पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को खत्म करने का यह कौन सा तरीका है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार हर नागरिक को प्राप्त है।

वहीं, सोनम वांगचुक के समर्थकों ने भी पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। समर्थकों का कहना है कि वांगचुक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे और उन्हें जबरन हटाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि सरकार को आंदोलन खत्म कराने के बजाय उनकी मांगों पर बातचीत करनी चाहिए।

सोनम वांगचुक देश में शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं। वह लद्दाख से जुड़े कई विषयों को लेकर भी आवाज उठाते रहे हैं। उनके आंदोलन को लेकर देश के कई हिस्सों में चर्चा हो रही थी।

पुलिस की ओर से अभी तक इस कार्रवाई को लेकर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, आमतौर पर प्रशासन ऐसे मामलों में प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने की बात कहता है।

सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। विपक्ष जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहा है, वहीं प्रशासन की ओर से कार्रवाई के कारणों और आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

Tags:    

Similar News