उत्तर भारत: इस बार मानसून का असर सामान्य से अलग दिखाई दे रहा है। जहां जुलाई के महीने में आमतौर पर बारिश के कारण मौसम सुहावना रहता है, वहीं दिल्ली-NCR समेत कई मैदानी राज्यों में लोग इन दिनों भीषण गर्मी और असहनीय उमस से परेशान हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश सहित कई इलाकों में तापमान और हवा में नमी के असामान्य मेल ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस स्थिति के पीछे मानसून में आया लंबा ब्रेक और कुछ प्रमुख भौगोलिक कारण जिम्मेदार हैं।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के सामान्य चक्र में बंगाल की खाड़ी से आने वाली पुरवइया हवाएं अहम भूमिका निभाती हैं। ये पूर्वी हवाएं अपने साथ बड़ी मात्रा में नमी लेकर आती हैं, जिससे बादलों का निर्माण होता है और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। लेकिन इस बार मानसून की गतिविधियों में बदलाव देखने को मिला है। प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो की स्थिति ने मानसून प्रवाह को प्रभावित किया है, जिससे उत्तर भारत में बारिश का सिलसिला कमजोर पड़ा है।
अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसूनी हवाओं के प्रवाह में करीब 10 से 12 दिनों का लंबा ठहराव देखने को मिला। इस दौरान बारिश की गतिविधियां काफी कम हो गईं और वातावरण में गर्मी बढ़ती चली गई। पुरवइया हवाओं के कमजोर पड़ने के कारण बंगाल की खाड़ी से मिलने वाली नमी भी कम हो गई। इसके विपरीत थार रेगिस्तान की ओर से आने वाली गर्म और शुष्क पश्चिमी हवाएं मैदानी इलाकों पर हावी हो गईं, जिससे तापमान में बढ़ोतरी के साथ-साथ गर्म हवाओं का असर भी बढ़ गया।
मौसम में बदलाव का एक बड़ा कारण मानसून की कम दबाव वाली रेखा का अपनी सामान्य स्थिति से खिसकना भी बताया जा रहा है। सामान्य परिस्थितियों में यह रेखा उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों के ऊपर सक्रिय रहती है, जिसके कारण नियमित अंतराल पर बारिश होती रहती है। लेकिन इस बार यह कम दबाव की रेखा उत्तर की ओर खिसककर हिमालयी क्षेत्रों के करीब पहुंच गई। इसके चलते दिल्ली-NCR और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां लगभग थम गईं।
बारिश की कमी के बावजूद हवा में नमी बनी रही। यही स्थिति उमस बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बनी। विशेषज्ञों के अनुसार, निचले वायुमंडल में मौजूद नमी जब गर्म और शुष्क हवाओं के संपर्क में आती है तो वातावरण में चिपचिपाहट बढ़ जाती है। यही कारण है कि लोगों को बिना बारिश के भी भारी उमस और बेचैनी का सामना करना पड़ रहा है।
दिल्ली-NCR में पिछले कई दिनों से लोग गर्मी और उमस से परेशान हैं। दिन के समय तेज धूप और रात के समय भी हवा में नमी के कारण राहत नहीं मिल पा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहने वाली है। मानसून की कम दबाव वाली रेखा अब धीरे-धीरे दक्षिण की ओर मैदानी इलाकों की तरफ लौट रही है।
स्काइमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार, रविवार रात से मौसम में बदलाव शुरू होने की संभावना है। इसके बाद सोमवार से अगले तीन से चार दिनों तक दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। बारिश होने से तापमान में गिरावट आएगी और लंबे समय से जारी उमस से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून का यह ब्रेक असामान्य जरूर है, लेकिन इसके पीछे प्राकृतिक मौसमी प्रक्रियाएं जिम्मेदार हैं। आने वाले दिनों में मानसूनी हवाओं के दोबारा सक्रिय होने से उत्तर भारत में बारिश का दौर लौट सकता है। इससे जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलेगी, वहीं कृषि क्षेत्र को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।