नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कांग्रेस के उस फैसले की आलोचना की है, जिसमें पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो पद गाने का निर्णय लिया गया है। VHP ने कांग्रेस के फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी ‘विदेशी सोच’ से प्रभावित है और तुष्टिकरण की राजनीति के बिना आगे नहीं बढ़ सकती।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने बुधवार को ‘वंदे मातरम’ के संबंध में पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था के वर्ष 1937 के प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया था। इस निर्णय के अनुसार कांग्रेस के सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल पहले दो पद ही गाए जाएंगे। कांग्रेस के इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट के जरिए कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वंदे मातरम’ के बाकी चार पदों को नहीं गाने का फैसला केवल राजनीतिक कारणों से लिया गया है। बंसल के अनुसार, इन पदों में ऐसे शब्द और भाव हैं, जो भारतीय मूल्यों, प्राचीन संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रीय भावना से गहराई से जुड़े हुए हैं।
VHP ने कांग्रेस के फैसले को राष्ट्रगीत की मूल भावना से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि आखिर गीत के अन्य पदों को कार्यक्रमों से अलग रखने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई। संगठन का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत है। ऐसे में इसके सभी हिस्सों को लेकर राजनीतिक निर्णय किए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विनोद बंसल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ‘विदेशी सोच’ से प्रभावित रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति के बिना टिक नहीं सकती। VHP प्रवक्ता के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। हालांकि कांग्रेस की ओर से फैसले के पीछे 1937 के प्रस्ताव का हवाला दिया गया है।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी का निर्णय ऐसे समय में सामने आया है, जब ‘वंदे मातरम’ को लेकर देश में राजनीतिक और वैचारिक बहस पहले भी होती रही है। कांग्रेस का 1937 का प्रस्ताव पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के उपयोग के तरीके से जुड़ा रहा है। वर्तमान निर्णय में उसी ऐतिहासिक प्रस्ताव का पालन करने की बात कही गई है।
‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने लोगों को एकजुट करने और ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज भी इसे भारत के राष्ट्रगीत के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है।
VHP का कहना है कि गीत के जिन पदों को कांग्रेस के कार्यक्रमों में नहीं गाने का फैसला किया गया है, उनमें भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े भाव मौजूद हैं। संगठन ने इसी आधार पर कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, कांग्रेस के फैसले को उसके ऐतिहासिक प्रस्ताव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसे पार्टी ने अपने कार्यक्रमों के लिए आधार बनाया है।
इस विवाद में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बीच संवैधानिक एवं औपचारिक अंतर है। ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त है, जबकि ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान है। इसके बावजूद ‘वंदे मातरम’ का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन और देश की सामूहिक स्मृति में विशेष स्थान रहा है।
कांग्रेस के फैसले पर VHP की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है। भाजपा और उससे जुड़े संगठनों की ओर से कांग्रेस पर पहले भी तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगाए जाते रहे हैं। इस मामले में VHP ने भी इसी राजनीतिक तर्क को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के निर्णय की आलोचना की है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए यह निर्णय उसके पुराने प्रस्ताव और पार्टी की परंपरा से जुड़ा मामला है। पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था CWC ने 1937 के प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया है। ऐसे में कांग्रेस इस निर्णय को किसी नए राजनीतिक कदम के बजाय अपने ऐतिहासिक रुख की निरंतरता के तौर पर प्रस्तुत कर सकती है।
विवाद के बीच अब यह मुद्दा केवल ‘वंदे मातरम’ के कितने पद गाए जाएं, तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति, राजनीतिक विचारधारा और तुष्टिकरण की राजनीति जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं। VHP के आरोपों ने इस बहस को और राजनीतिक रंग दे दिया है।
फिलहाल कांग्रेस के फैसले और VHP की प्रतिक्रिया के बाद दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना है। एक ओर कांग्रेस अपने 1937 के प्रस्ताव का पालन करने की बात कर रही है, वहीं VHP ने इसे भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए कांग्रेस की आलोचना की है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दल और संगठन इस मुद्दे पर अपनी-अपनी विचारधारा के अनुरूप प्रतिक्रियाएं दे सकते हैं।