नई दिल्ली। देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च पदों पर बैठे नेताओं से मिलने के दौरान आपने अक्सर देखा होगा कि सुरक्षा अधिकारी लोगों को उनसे दूरी बनाए रखने के लिए कहते हैं। कई बार लोग सम्मान के तौर पर पैर छूने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोक दिया जाता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या यह सिर्फ प्रोटोकॉल का हिस्सा है या इसके पीछे कोई बड़ा सुरक्षा कारण है?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व **एड-डी-कैंप (ADC) मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल** ने इस खास सुरक्षा व्यवस्था के पीछे की वजह बताई है। उन्होंने एक पॉडकास्ट में बताया कि राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के बेहद करीब जाने की अनुमति हर किसी को नहीं दी जा सकती, क्योंकि किसी व्यक्ति की मंशा को पूरी तरह पहले से नहीं जाना जा सकता।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा का उद्देश्य केवल किसी हमले को रोकना नहीं होता, बल्कि देश के सर्वोच्च पद की गरिमा और छवि को भी सुरक्षित रखना होता है।
पैर छूने से क्यों रोका जाता है?
भारत में पैर छूना सम्मान और आशीर्वाद लेने की परंपरा से जुड़ा हुआ है। आम लोगों के बीच यह एक सामान्य व्यवहार है, लेकिन राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे वीवीआईपी पदों पर सुरक्षा नियम अलग होते हैं।
मेजर ऋषभ सांब्याल ने बताया कि जब कोई व्यक्ति राष्ट्रपति के बहुत करीब आता है तो सुरक्षा टीम को उसकी हर गतिविधि पर नजर रखनी होती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई व्यक्ति हाथ मिलाने या सम्मान दिखाने के बहाने भी कुछ गलत कर सकता है। सुरक्षा अधिकारी किसी भी व्यक्ति की नीयत को 100 प्रतिशत पहले से नहीं जान सकते।
अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रपति के बहुत करीब पहुंचकर कोई अप्रिय हरकत करता है तो इसका असर केवल सुरक्षा पर नहीं बल्कि पूरे पद की गरिमा पर पड़ता है।
सुरक्षा में भरोसे से ज्यादा सतर्कता जरूरी
मेजर ऋषभ ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण चीज सतर्कता होती है।
कई बार सामने वाला व्यक्ति बहुत सम्मानजनक व्यवहार करता हुआ दिखाई देता है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां केवल दिखावे के आधार पर फैसला नहीं कर सकतीं।
राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास या किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में सुरक्षा टीम हर व्यक्ति को संभावित जोखिम के नजरिए से देखती है।
यह किसी व्यक्ति पर शक करने की बात नहीं होती, बल्कि जिम्मेदारी का हिस्सा होती है।
हाथ मिलाना भी क्यों नियंत्रित होता है?
कई लोगों के मन में सवाल होता है कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ हाथ मिलाना चाहता है तो उसमें क्या खतरा हो सकता है?
मेजर ऋषभ ने इसी सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सुरक्षा अधिकारी किसी अज्ञात व्यक्ति की मंशा नहीं जान सकते।
हाथ मिलाने के दौरान भी कोई व्यक्ति गलत हरकत कर सकता है। भले ही ऐसी घटना के बाद कानूनी कार्रवाई हो जाए, लेकिन राष्ट्रपति जैसे पद की गरिमा और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।
यही कारण है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रमों में लोगों के संपर्क को नियंत्रित रखा जाता है।
ADC कौन होता है?
ADC यानी **Aide-de-Camp (एड-डी-कैंप)** एक विशेष सैन्य अधिकारी होता है जो राष्ट्रपति, राज्यपाल या बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के साथ काम करता है।
यह केवल एक औपचारिक पद नहीं होता, बल्कि इसमें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल होती हैं।
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC के रूप में करीब तीन साल सेवा दी। इस दौरान वह राष्ट्रपति के कार्यक्रमों, प्रोटोकॉल और कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं से जुड़े रहे।
ADC राष्ट्रपति के आसपास रहने वाले सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में शामिल होता है।
राष्ट्रपति के हर कदम पर नजर
मेजर ऋषभ ने बताया कि ADC की भूमिका सिर्फ राष्ट्रपति के पीछे खड़े रहने तक सीमित नहीं होती।
उसे राष्ट्रपति की जरूरतों, कार्यक्रमों, समय-सारणी और कई छोटी-बड़ी व्यवस्थाओं का ध्यान रखना होता है।
अगर राष्ट्रपति को किसी अधिकारी या प्रधानमंत्री से बातचीत करनी हो तो ADC संबंधित कार्यालयों से संपर्क कर समन्वय करता है।
यानी ADC राष्ट्रपति के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पानी के गिलास तक की होती है सुरक्षा
मेजर ऋषभ ने सुरक्षा की गंभीरता बताते हुए एक दिलचस्प उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के लिए रखे गए पानी के गिलास तक को लेकर सावधानी बरती जाती है।
सुरक्षा टीम यह सुनिश्चित करती है कि जिस वस्तु का इस्तेमाल राष्ट्रपति करें, वह पूरी तरह सुरक्षित हो।
क्योंकि सुरक्षा में छोटी से छोटी चीज भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
राष्ट्रपति की सुरक्षा में हर चीज क्यों महत्वपूर्ण?
आम व्यक्ति के लिए छोटी लगने वाली चीजें भी वीवीआईपी सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
किस स्थान पर कौन खड़ा है, कौन व्यक्ति कितनी दूरी पर है, कौन राष्ट्रपति के पास आ रहा है—इन सभी बातों पर नजर रखी जाती है।
सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर काम करती है।
ADC, सुरक्षा अधिकारी और अन्य एजेंसियां मिलकर राष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
मेजर ऋषभ ने बताया अपना अनुभव
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल भारतीय सेना के अधिकारी रहे हैं और पैरा रेजिमेंट में भी सेवा दे चुके हैं। राष्ट्रपति के ADC के रूप में काम करने के कारण वह काफी चर्चा में आए थे।
उनकी तस्वीरें और वीडियो कई बार सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसमें वह राष्ट्रपति के साथ कार्यक्रमों में बेहद सतर्क नजर आते थे।
बारिश के दौरान राष्ट्रपति के लिए छाता पकड़ने से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी तत्परता ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया था।
ADC की नौकरी में निजी जीवन का त्याग
मेजर ऋषभ ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ADC की जिम्मेदारी बेहद कठिन होती है।
इस पद पर रहने वाले अधिकारी को लगभग हर समय सतर्क रहना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि इस जिम्मेदारी के दौरान निजी जीवन काफी प्रभावित होता है और कई व्यक्तिगत त्याग करने पड़ते हैं।
उनके अनुसार यह नौकरी केवल वर्दी पहनने और कार्यक्रमों में शामिल होने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की तैयारी जरूरी होती है।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में समान नियम
राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख होते हैं।
दोनों पदों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है।
इसी वजह से दोनों के सार्वजनिक कार्यक्रमों में लोगों के सीधे संपर्क को नियंत्रित किया जाता है।
चाहे कोई व्यक्ति पैर छूना चाहता हो, हाथ मिलाना चाहता हो या करीब जाकर फोटो लेना चाहता हो, सुरक्षा टीम पहले जोखिम का आकलन करती है।
सम्मान और सुरक्षा के बीच संतुलन
भारत में नेताओं और जनता के बीच जुड़ाव की परंपरा रही है।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी आम लोगों से मिलते हैं, बच्चों से बातचीत करते हैं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं।
लेकिन सुरक्षा नियमों के कारण कुछ सीमाएं तय करनी पड़ती हैं।
मेजर ऋषभ के मुताबिक यह किसी की भावनाओं का अपमान नहीं बल्कि जिम्मेदारी का हिस्सा है।
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुआ बयान?
मेजर ऋषभ का यह खुलासा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया क्योंकि लोगों को पहली बार पता चला कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आसपास सुरक्षा कितनी बारीकी से काम करती है।
लोग अक्सर केवल अंतिम तस्वीर देखते हैं, जिसमें नेता जनता से मिलते दिखाई देते हैं।
लेकिन उस एक तस्वीर के पीछे कई घंटों की योजना, जांच और सुरक्षा व्यवस्था काम करती है।
सुरक्षा का असली उद्देश्य
सुरक्षा अधिकारियों का मुख्य लक्ष्य किसी खतरे को होने से पहले रोकना होता है।
घटना होने के बाद कार्रवाई करना आसान होता है, लेकिन वीवीआईपी सुरक्षा में कोशिश होती है कि कोई खतरा पैदा ही न हो।
इसी वजह से कई बार सुरक्षा अधिकारी सख्त दिखाई देते हैं।
उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को रोकना नहीं बल्कि देश के महत्वपूर्ण पद की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।