नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। तेलंगाना के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने शनिवार को आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अज़हरुद्दीन ने आरोप लगाया कि तेलंगाना के मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 आवेदन दिए गए। उनके मुताबिक, इन आवेदनों के जरिए 30 से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश का आरोप सामने आया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और यदि गड़बड़ी साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
मुशीराबाद में फॉर्म-7 को लेकर विवाद
अज़हरुद्दीन ने कहा कि मुशीराबाद में कई अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जाने की शिकायत सामने आई है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में बूथ लेवल एजेंटों को भी हिरासत में लिया गया।मंत्री ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के नाम को हटाने के लिए प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो यह गंभीर मामला है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए ताकि किसी भी पात्र मतदाता का मतदान अधिकार प्रभावित न हो।हालांकि, मुशीराबाद के मामले में फॉर्म-7 के दुरुपयोग और 30 से ज्यादा नाम हटाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
क्या है फॉर्म-7?
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने या किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए किया जाता है। SIR को लेकर इसी फॉर्म के संभावित दुरुपयोग पर देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक बहस तेज हुई है।सितंबर 2026 में फॉर्म-7 को लेकर उठे सवालों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि मतदाता सूची में नाम हटाने की आपत्ति तय प्रक्रिया और समयसीमा के भीतर ही दर्ज की जानी चाहिए।यही वजह है कि अब राजनीतिक दल और नेता चुनाव आयोग से यह सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं कि किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित सत्यापन के सूची से न हटे।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
अज़हरुद्दीन ने SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के तहत समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं और चुनाव आयोग को इन शिकायतों पर अधिक जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए।CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं। सितंबर 2026 में आयोग के भीतर कथित मतभेदों से संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई और पद छोड़ने की मांग की थी। हालांकि चुनाव आयोग ने आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर मतभेदों के दावों से इनकार किया था और कहा था कि निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
इस्तीफे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं
इस बीच यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़ी सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ खबरों को चुनाव आयोग पहले ही फर्जी बता चुका है। 28 सितंबर 2026 को एक कथित इस्तीफा पत्र वायरल हुआ था, जिस पर आयोग ने कहा था कि ऐसा कोई इस्तीफा नहीं दिया गया है और वायरल पत्र फर्जी है।इसलिए अज़हरुद्दीन की ओर से इस्तीफे की मांग को एक राजनीतिक मांग के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि CEC के वास्तव में इस्तीफा देने की खबर के तौर पर।
SIR को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पिछले कुछ महीनों में राजनीतिक बहस तेज हुई है। विपक्षी दलों और कुछ नेताओं ने प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाताओं के नाम हटाने और फॉर्म-6 तथा फॉर्म-7 के इस्तेमाल से जुड़े सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अद्यतन और सत्यापित करना निर्वाचन प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है।सितंबर में SIR को लेकर चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की कथित आपत्तियों से संबंधित रिपोर्टों के बाद भी विवाद बढ़ा था। आयोग ने कहा था कि उसके अंतिम निर्णय सामूहिक सहमति से लिए गए।
मतदाता अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
मुशीराबाद से सामने आए आरोपों ने एक बार फिर इस सवाल को केंद्र में ला दिया है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया कितनी सावधानी और पारदर्शिता के साथ लागू की जा रही है। किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से हटना उसके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।ऐसे में फॉर्म-7 के इस्तेमाल से जुड़े प्रत्येक आवेदन की जांच, संबंधित मतदाता को उचित सूचना और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर देना महत्वपूर्ण माना जाता है। मुशीराबाद के आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आवेदन नियमों के तहत किए गए थे या प्रक्रिया का दुरुपयोग हुआ।अज़हरुद्दीन ने मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए SIR पर अपनी आपत्तियां दोहराई हैं। अब इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की ओर से मुशीराबाद में लगाए गए आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी।
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