दिल्ली : 1999 का कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ा गया एक ऐसा संघर्ष था, जिसने दोनों देशों की सैन्य रणनीति और सुरक्षा नीतियों को बदल दिया। इस युद्ध में पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर भारतीय क्षेत्र की ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा करने की कोशिश की थी। भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।
इस युद्ध के दौरान पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकाने भारतीय सेना की नजर में थे। इनमें पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में स्थित **स्कार्दू एयरबेस** भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था। यह वही एयरबेस था, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने कारगिल मोर्चे पर अपनी सैन्य गतिविधियों और रसद पहुंचाने के लिए किया था।
स्कार्दू एयरबेस क्यों था इतना अहम?
स्कार्दू पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित है और यह कारगिल क्षेत्र के बेहद करीब है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान की सेना ने ऊंचाई वाले इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए कई सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया। स्कार्दू बेस से सैनिकों, हथियारों और जरूरी सामान की सप्लाई में मदद मिलने की बात सामने आई थी।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस बेस की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं क्योंकि यह पाकिस्तान के लिए उत्तरी मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र था।
भारत ने क्यों बनाई थी स्कार्दू को निशाना बनाने की योजना?
कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना और वायुसेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि दुश्मन ऊंची चोटियों पर मजबूत स्थिति में बैठा था। पाकिस्तान की सप्लाई लाइन को कमजोर करना भारतीय रणनीति का अहम हिस्सा था।
इसी वजह से स्कार्दू एयरबेस को निशाना बनाने पर भी विचार किया गया। अगर इस बेस को नुकसान पहुंचाया जाता तो पाकिस्तान की सैन्य आपूर्ति और कारगिल क्षेत्र में उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती थी।
हालांकि भारत ने युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय दबाव और राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई रणनीतिक फैसले लिए।
LoC पार न करने की नीति ने बदली रणनीति
कारगिल युद्ध में भारत ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया था कि वह नियंत्रण रेखा पार नहीं करेगा। भारतीय सेना और वायुसेना को अपने क्षेत्र के अंदर रहकर ही कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।
भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया और मिग-27, मिग-29 तथा मिराज-2000 जैसे विमानों का इस्तेमाल किया।
इस रणनीति का उद्देश्य पाकिस्तान को सैन्य रूप से जवाब देना था, लेकिन युद्ध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ने से रोकना भी था।
स्कार्दू पर हमला क्यों नहीं हुआ?
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्कार्दू जैसे ठिकानों पर हमला करने से युद्ध का दायरा बढ़ सकता था। पाकिस्तान इसे बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई के लिए इस्तेमाल कर सकता था।
भारत उस समय केवल कारगिल क्षेत्र से घुसपैठियों को बाहर निकालने के लक्ष्य पर केंद्रित था। इसलिए सीमित सैन्य कार्रवाई की रणनीति अपनाई गई।
भारत ने ऊंची चोटियों पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को निशाना बनाया और धीरे-धीरे टाइगर हिल समेत कई महत्वपूर्ण स्थान वापस हासिल किए।
कारगिल युद्ध में वायुसेना की भूमिका
कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान वायुसेना ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले किए।
मिराज-2000 विमानों के जरिए किए गए हमलों ने युद्ध की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई। ऊंचे पहाड़ी इलाकों में मौजूद पाकिस्तानी ठिकानों को निशाना बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका साबित हुआ युद्ध
कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की रणनीति को बड़ा झटका लगा। भारत ने सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर बढ़त बनाई।
26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में विजय हासिल की। इस दिन को हर साल कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
स्कार्दू आज भी क्यों है चर्चा में?
स्कार्दू एयरबेस आज भी भारत की सुरक्षा रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी स्थिति चीन, पाकिस्तान और भारत के रणनीतिक क्षेत्रों के करीब होने के कारण इसे संवेदनशील सैन्य क्षेत्र माना जाता है।
समय-समय पर इस बेस के आधुनिकीकरण और सैन्य गतिविधियों को लेकर चर्चा होती रही है।
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