नई दिल्ली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने शुक्रवार को लड़ाकू भूमिका में महिला कर्मियों की सेवा के 40 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया। इस अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित विशेष समारोह में CRPF के महानिदेशक जीपी सिंह ने महिला कर्मियों की चार दशक लंबी यात्रा, उनकी बहादुरी, अनुशासन और सेवा को याद किया। उन्होंने कहा कि बल भविष्य में महिला कर्मियों के लिए अवसरों का विस्तार करने के साथ संस्थागत सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।समारोह को संबोधित करते हुए महानिदेशक जीपी सिंह ने कहा कि 40 साल पहले CRPF ने देश की पहली पूरी तरह महिला कॉम्बैट यूनिट बनाकर एक नई मिसाल कायम की थी। इसके बाद से महिला कर्मियों की भूमिका लगातार बढ़ती गई और आज वे देश के अलग-अलग हिस्सों में चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
जीपी सिंह ने कहा, “40 साल पहले, CRPF ने देश की पहली पूरी तरह से महिलाओं वाली कॉम्बैट यूनिट बनाकर नई मिसाल कायम की थी। आज हमारी महिला कर्मी मुश्किल इलाकों, उग्रवाद-विरोधी अभियानों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे अहम कामों को बेहतरीन ढंग से और हिम्मत के साथ अंजाम दे रही हैं।”उन्होंने आगे कहा कि CRPF अपनी महिला योद्धाओं को उनकी साहसिक उपलब्धियों, अटूट अनुशासन और निस्वार्थ सेवा के लिए सलाम करता है। महानिदेशक ने कहा कि बल वर्दीधारी महिलाओं के लिए अवसर और संस्थागत सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महिलाओं की भागीदारी और उनकी जिम्मेदारियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
CRPF में महिलाओं की लड़ाकू भूमिका का इतिहास 1980 के दशक से जुड़ा है। बल ने 1986 में पहली महिला बटालियन 88 (महिला) बटालियन खड़ी की थी। इसे भारत में महिलाओं की पहली पूर्ण केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बटालियन के रूप में जाना जाता है। इसके गठन ने सुरक्षा बलों में महिलाओं को सीधे परिचालन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत की।इसके बाद CRPF में महिला कर्मियों की भूमिका का विस्तार हुआ। आज महिला कर्मियों को कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के अलावा विभिन्न संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी तैनात किया जाता है। बल के मुताबिक महिला कर्मी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में सेवा देने के साथ उग्रवाद विरोधी अभियानों और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं।
देश के अलग-अलग हिस्सों में कानून-व्यवस्था की चुनौती के दौरान भी महिला CRPF कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। खास तौर पर ऐसे प्रदर्शनों, तलाशी अभियानों और सुरक्षा व्यवस्थाओं में जहां बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद हों, महिला कर्मियों की तैनाती सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने में मदद करती है।CRPF देश के सबसे बड़े केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल है। इसकी जिम्मेदारियों में आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था में राज्यों की सहायता, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा संबंधी ड्यूटी और चुनावों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था जैसे कार्य शामिल हैं। इन जिम्मेदारियों में महिला कर्मियों की भागीदारी समय के साथ बढ़ी है।
चार दशक पहले महिला कॉम्बैट यूनिट की शुरुआत के समय सुरक्षा बलों में महिलाओं की संख्या और उनके लिए उपलब्ध भूमिकाएं सीमित थीं। बाद के वर्षों में भर्ती, प्रशिक्षण और तैनाती के स्तर पर बदलाव हुए। इससे महिला कर्मियों को फील्ड ड्यूटी और दूसरी जिम्मेदारियों में अधिक अवसर मिले।CRPF की महिला कर्मियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बल का प्रतिनिधित्व किया है। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा अभियानों के अलावा महिला कर्मियों ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है। इससे केंद्रीय बलों में महिलाओं की परिचालन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली।
महानिदेशक जीपी सिंह ने समारोह के दौरान इस चार दशक की यात्रा को केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आने वाले समय में महिला कर्मियों के लिए अधिक अवसर तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि CRPF महिला कर्मियों को आवश्यक संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने और उनके लिए पेशेवर संभावनाओं को बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखेगा।सुरक्षा बलों में महिला कर्मियों के लिए संस्थागत सहयोग में प्रशिक्षण, कार्यस्थल सुविधाएं, तैनाती से जुड़ी व्यवस्थाएं और पेशेवर विकास जैसे कई पहलू शामिल होते हैं। CRPF की ओर से अवसरों के विस्तार की प्रतिबद्धता का उद्देश्य महिला कर्मियों को उनकी क्षमता और प्रशिक्षण के अनुरूप अधिक जिम्मेदारियां देने की दिशा में आगे बढ़ना है।
महिला कर्मियों की भूमिका विशेष रूप से उन सुरक्षा परिस्थितियों में महत्वपूर्ण होती है जहां स्थानीय महिलाओं से संवाद, तलाशी या भीड़ प्रबंधन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा फील्ड ऑपरेशन में उनकी बढ़ती भागीदारी यह दिखाती है कि उनकी भूमिका केवल सहायक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है।CRPF की महिला कर्मियों ने समय के साथ कठिन इलाकों में तैनाती और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभालकर अपने परिचालन अनुभव को भी बढ़ाया है। प्रशिक्षण के स्तर पर भी उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार किया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में महिला कर्मियों के योगदान को याद करते हुए CRPF नेतृत्व ने उनकी उपलब्धियों को बल की चार दशक की महत्वपूर्ण यात्रा का हिस्सा बताया। 1986 में पहली पूरी तरह महिला कॉम्बैट यूनिट की स्थापना से शुरू हुआ सफर अब 40 वर्ष पूरे कर चुका है।इस अवसर पर महानिदेशक जीपी सिंह का संदेश महिला कर्मियों की मौजूदा भूमिका के साथ भविष्य की दिशा पर भी केंद्रित रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि CRPF वर्दी में सेवा दे रही महिलाओं के लिए अवसरों और संस्थागत समर्थन को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
चार दशकों की इस यात्रा में CRPF की महिला कर्मियों ने कानून-व्यवस्था, कठिन क्षेत्रों में तैनाती और उग्रवाद विरोधी जिम्मेदारियों सहित कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। अब बल का जोर इस भागीदारी को आगे बढ़ाने पर है। CRPF के लिए यह अवसर अपनी पहली महिला कॉम्बैट यूनिट की ऐतिहासिक शुरुआत को याद करने के साथ उन महिला कर्मियों की सेवा और साहस को सम्मान देने का भी रहा, जो आज विभिन्न मोर्चों पर देश की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
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