केंद्र सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए गेहूं की स्टॉक सीमा घटाई

Update: 2025-08-26 14:44 GMT

DELHI नई दिल्ली। आगामी त्योहारी सीजन से पहले गेहूं की कीमतों पर नियंत्रण और बाजार में कृत्रिम कमी रोकने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मंगलवार को घोषणा की कि अब देशभर में थोक और खुदरा व्यापारियों के साथ-साथ गेहूं प्रसंस्करणकर्ताओं पर लागू स्टॉक सीमा को 31 मार्च 2026 तक घटा दिया गया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब थोक विक्रेता अधिकतम 2,000 मीट्रिक टन (एमटी) तक गेहूं रख सकेंगे, जबकि पहले यह सीमा 3,000 एमटी थी। इसी प्रकार, खुदरा विक्रेताओं की सीमा प्रति दुकान 10 एमटी से घटाकर 8 एमटी कर दी गई है। गेहूं प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए भी सीमा कम की गई है। अब वे केवल अपनी मासिक स्थापित क्षमता (MIC) का 60 प्रतिशत तक ही गेहूं रख पाएंगे, जबकि पहले यह सीमा 70 प्रतिशत थी।सरकार ने साफ किया है कि देशभर की सभी गेहूं भंडारण संस्थाओं को हर शुक्रवार को गेहूं स्टॉक पोर्टल पर अपने स्टॉक की स्थिति अपडेट करनी होगी। जो भी संस्था पोर्टल पर पंजीकृत नहीं होगी या निर्धारित सीमा का उल्लंघन करेगी, उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 6 और 7 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी व्यापारी या प्रसंस्करणकर्ता के पास तय सीमा से अधिक स्टॉक है, तो उन्हें अधिसूचना जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपने भंडार को कम करना होगा। केंद्र और राज्य सरकारें इस पूरी प्रक्रिया की कड़ी निगरानी करेंगी, ताकि देश में गेहूं की कोई कृत्रिम कमी या जमाखोरी न हो।

मंत्रालय ने बताया कि फसल वर्ष 2024-25 में देश में 1175.07 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं का उत्पादन हुआ है। यह उत्पादन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इसके साथ ही, 2025-26 रबी विपणन सत्र में राज्य एजेंसियों और भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा 300.35 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है। यह स्टॉक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए पूरी तरह पर्याप्त है।  सरकार का कहना है कि त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के चलते बाजार में कीमतें न बढ़ें और उपभोक्ताओं को सस्ते दामों पर गेहूं उपलब्ध हो, इसके लिए यह कदम उठाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग देशभर में गेहूं के स्टॉक की स्थिति पर निरंतर नजर रख रहा है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी हस्तक्षेप किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से बाजार में जमाखोरी पर लगाम लगेगी और आपूर्ति की पारदर्शिता बनी रहेगी। इससे आम उपभोक्ता को राहत मिलेगी और व्यापारी अनावश्यक भंडारण नहीं कर पाएंगे। सरकार का यह कदम सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के हित में है और त्योहारी सीजन में महंगाई को नियंत्रित करने में मदद करेगा।

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