Delhi दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में हुए दंगों के मामले में दंगे भड़काने का दोषी ठहराया, जबकि 12 अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह ने हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगा करने की सज़ा) और धारा 109 (उकसाने/सहायता करने) के तहत दोषी ठहराया, जबकि अन्य आरोपों से उन्हें बरी कर दिया।
अदालत ने हुसैन को सज़ा सुनाने पर बहस के लिए मामले की सुनवाई 16 नवंबर को तय की है। विस्तृत आदेश का इंतज़ार है। 13 आरोपियों में हुसैन, मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद, मोहम्मद रिहान, मोहम्मद आबिद, अरशद कय्यूम, इरशाद अहमद, दीपक सिंह सैनी, नवनीत और महक सिंह शामिल थे। उन पर दंगा करने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आग से नुकसान करने और आपराधिक साज़िश रचने जैसे आरोप थे।
हुसैन को फरवरी 2020 में AAP से निकाल दिया गया था, जब दंगों के सिलसिले में उनके ख़िलाफ़ FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटे बाद यह कार्रवाई की गई थी। जुलाई में, दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े एक अलग मामले में हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया था। यह मामला शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़ा है। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी, कई अन्य घायल हुए थे और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा था।