Delhiदिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को कहा कि 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में आरोपी एक्टिविस्ट शरजील इमाम ने मीडियाकर्मियों से बातचीत न करने की शर्त का "साफ़ तौर पर उल्लंघन" किया है, लेकिन उनकी ज़मानत रद्द करने से इनकार कर दिया क्योंकि वह पहले ही सरेंडर करने के लिए रास्ते में थे। एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने राज्य की ओर से इमाम की अंतरिम ज़मानत रद्द करने के लिए दायर अर्ज़ी पर यह आदेश दिया। आदेश में कहा गया, "जहां तक ​​अंतरिम ज़मानत रद्द करने की बात है, आरोपी पहले ही फ़्लाइट में बैठ चुके हैं और शाम तक दिल्ली पहुँचकर सरेंडर कर देंगे। इसलिए, इन हालात में अदालत के लिए ज़मानत रद्द करने का आदेश देना सही नहीं होगा।"
22 सितंबर को इमाम को अपने कज़िन की शादी में शामिल होने के लिए 4 से 10 अक्टूबर तक सात दिन की ज़मानत दी गई थी। यह राहत कई शर्तों के साथ दी गई थी, जिसमें सोशल मीडिया का इस्तेमाल न करना और मीडिया से बातचीत न करना शामिल था।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि इमाम ने अपने भाई द्वारा एक पत्रकार को दिए गए इंटरव्यू के दौरान मौजूद रहकर शर्तों का उल्लंघन किया। YouTube और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर अपलोड किए गए वीडियो की जाँच करने पर अदालत ने पाया कि इमाम उसी कमरे में बैठे थे जहाँ इंटरव्यू हो रहा था। बचाव पक्ष के इस तर्क को खारिज करते हुए कि फ़ुटेज अलग-अलग क्लिप का कलेक्शन था और इंटरव्यू के दौरान इमाम मौजूद नहीं थे, अदालत ने कहा कि वीडियो से पता चलता है कि क्लिप एक ही कमरे में लगभग एक ही समय पर रिकॉर्ड किए गए थे। अदालत ने माना कि कमरे में इमाम की मौजूदगी 22 सितंबर के अंतरिम ज़मानत आदेश में लगाई गई शर्त का उल्लंघन है।
अदालत ने कहा कि हालाँकि, इमाम को शनिवार शाम तक जेल में सरेंडर करना था, और उनके वकील के अनुसार, वह पहले ही फ़्लाइट में बैठ चुके थे और जल्द ही दिल्ली पहुँचने वाले थे। यह मामला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सिलसिले में दर्ज FIR से जुड़ा है। इमाम पर गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप हैं।
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