135 साल पुरानी लाइब्रेरी पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, आज अहम सुनवाई
ऐतिहासिक पुस्तकालय
नई दिल्ली: देश के ऐतिहासिक केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (Central Secretariat Library-CSL) के भविष्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के कारण शास्त्री भवन से 135 साल पुराने इस पुस्तकालय के प्रस्तावित स्थानांतरण और उसके विशाल संग्रह के लिए पर्याप्त जगह की उपलब्धता को लेकर उठे सवालों पर शीर्ष अदालत सोमवार, 5 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ मामले की सुनवाई करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को “In Re: 135-Yr-Old Library 8.5 Lakh Books – And No Room In The New Central Vista Plan” शीर्षक से स्वतः संज्ञान याचिका के रूप में दर्ज किया गया है। मामला 3 अक्टूबर को दर्ज हुआ था। पुस्तकालय के स्थानांतरण से जुड़ी खबरों के बाद इसके ऐतिहासिक संग्रह की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता सामने आई थी।
केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय संस्कृति मंत्रालय के अधीन संचालित होता है। इसकी स्थापना वर्ष 1891 में तत्कालीन कलकत्ता में 'इम्पीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी' के रूप में हुई थी। वर्ष 1911 में देश की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद पुस्तकालय को भी दिल्ली लाया गया। वर्ष 1969 से यह शास्त्री भवन में संचालित हो रहा है। केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यहां करीब 8.5 लाख मुद्रित और गैर-मुद्रित दस्तावेजों का संग्रह है और यह कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय के बाद केंद्र सरकार का दूसरा सबसे बड़ा पुस्तकालय है।
वर्तमान में पुस्तकालय शास्त्री भवन में चार मंजिलों पर करीब 5,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके संग्रह में दुर्लभ पुस्तकें, सरकारी प्रकाशन, आधिकारिक रिकॉर्ड और गजेटियर सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद हैं। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत शास्त्री भवन के भविष्य को देखते हुए पुस्तकालय को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की आवश्यकता सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, संस्कृति मंत्रालय ने पुनर्विकसित केंद्रीय सचिवालय में पुस्तकालय के लिए करीब 5,466 वर्ग मीटर जगह की आवश्यकता बताई थी। इसके विपरीत कर्तव्य भवन-2 में लगभग 300 वर्ग मीटर के दो कमरों का प्रस्ताव सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया। संस्कृति मंत्रालय ने इस जगह को पुस्तकालय के पूरे संग्रह और सुविधाओं के लिए अपर्याप्त माना था।
हालांकि केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कर्तव्य पथ पुनर्विकास योजना में केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के लिए जगह का प्रावधान किया गया है और पुस्तकालय के निर्माण से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया जारी है। ऐसे में मामला केवल पुस्तकालय के स्थानांतरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके विशाल और ऐतिहासिक संग्रह को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान और सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।
केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय लंबे समय से सरकारी अधिकारियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान केंद्र रहा है। यहां मौजूद कई दुर्लभ दस्तावेज और सरकारी प्रकाशन देश के प्रशासनिक तथा ऐतिहासिक विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराते हैं। इसलिए पुस्तकालय को स्थानांतरित करते समय पुस्तकों और दस्तावेजों की सुरक्षा, संरक्षण, सूचीकरण और पाठकों की पहुंच बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत के सामने यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि ऐतिहासिक पुस्तकालय को स्थानांतरित करने की योजना क्या है, इसके लाखों दस्तावेजों को कहां रखा जाएगा और नई व्यवस्था में पुस्तकालय को उसकी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त जगह तथा संरक्षण संबंधी सुविधाएं मिलेंगी या नहीं। शीर्ष अदालत की सुनवाई से केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के भविष्य को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।