नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुवाहाटी, उत्तराखंड, केरल और आंध्र प्रदेश के हाई कोर्ट में 12 अतिरिक्त जजों को स्थायी जज के तौर पर नियुक्त करने की सिफारिश की है।
गुरुवार को जारी एक बयान में, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कहा कि 23 सितंबर को हुई बैठक में उसने जस्टिस कौशिक गोस्वामी को गुवाहाटी हाई कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी।
बयान में कहा गया, "सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 23 सितंबर, 2026 को हुई अपनी बैठक में अतिरिक्त जज जस्टिस कौशिक गोस्वामी को गुवाहाटी हाई कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी है।"
एक अलग बयान में, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस सुभाष उपाध्याय को उत्तराखंड हाई कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त करने को मंज़ूरी दी। इसमें कहा गया, "सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 23 सितंबर, 2026 को हुई अपनी बैठक में अतिरिक्त जज जस्टिस सुभाष उपाध्याय को उत्तराखंड हाई कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी है।"
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केरल हाई कोर्ट के पांच अतिरिक्त जजों को स्थायी जज के तौर पर नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दी। ये जज हैं - जस्टिस पी. कृष्णा कुमार, जस्टिस के.वी. जयकुमार, जस्टिस मुरली कृष्णा एस., जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन और जस्टिस पी.वी. बालकृष्णन।
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के लिए, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पांच अतिरिक्त जजों को स्थायी जज के तौर पर नियुक्त करने के प्रस्तावों को मंज़ूरी दी। ये हैं - जस्टिस महेश्वर राव कुंचेम @ कुंचम, जस्टिस थूटा चंद्र धना सेकर @ टी.सी.डी. सेखर, जस्टिस चल्ला गुना रंजन, जस्टिस अवधानम हरि हरनाध शर्मा और डॉ. जस्टिस यादवल्ली लक्ष्मणा राव।
बयान में कहा गया, "सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 23 सितंबर, 2026 को हुई अपनी बैठक में निम्नलिखित अतिरिक्त जजों को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त करने के प्रस्तावों को मंज़ूरी दी है।"
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और जजों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 के क्लॉज़ (1) के तहत राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। किसी एडिशनल जज को परमानेंट जज के तौर पर नियुक्त करने की सिफारिश करते समय, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को विस्तृत आंकड़े देने होते हैं। इन आंकड़ों में संबंधित जज द्वारा महीने-दर-महीने निपटाए गए केस और दिए गए फैसले, साथ ही लॉ जर्नल्स में रिपोर्ट किए गए केसों की संख्या शामिल होनी चाहिए, और ये सभी उनके द्वारा प्रमाणित होने चाहिए।
इस डेटा में कुल कामकाजी दिनों, जज के असल में कोर्ट में मौजूद रहने के दिनों और उस अवधि के दौरान अनुपस्थिति के दिनों की जानकारी भी शामिल होनी चाहिए, जिसके लिए केस निपटाने के आंकड़े दिए जा रहे हैं। एडिशनल जजों की नियुक्ति संविधान के आर्टिकल 224 के क्लॉज़ (1) के तहत राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।