नीट पेपर लीक मुद्दे पर सोनम वांगचुक ने समाप्त किया अनशन

Update: 2026-07-24 03:50 GMT

नई दिल्ली : जलवायु कार्यकर्ता और सामाजिक चिंतक सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे अपने अनशन को समाप्त कर दिया है। शुक्रवार को उन्होंने अनशन समाप्त करने के पीछे की वजह सार्वजनिक करते हुए कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं करने तथा नीट पेपर लीक प्रकरण से जुड़े उन पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने पर सहमति जताई है, जिनके परिजनों ने कथित रूप से इस मामले से जुड़े मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से फिलहाल कोई ठोस या तत्काल आश्वासन नहीं मिला है।

सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका अनशन किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए था। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हुई, जिसके बाद कुछ महत्वपूर्ण मांगों पर सकारात्मक रुख सामने आया। इन्हीं आश्वासनों को देखते हुए उन्होंने फिलहाल अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।

उन्होंने बताया कि सरकार ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों, युवाओं और अन्य प्रतिभागियों के खिलाफ नए मुकदमे दर्ज नहीं करने का भरोसा दिया है। इसके अलावा उन परिवारों के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाने पर सहमति बनी है, जिन्होंने नीट पेपर लीक विवाद के बाद अपने बच्चों को खो दिया। वांगचुक ने कहा कि ऐसे मामलों में आर्थिक सहायता और मुआवजे की पहल पीड़ित परिवारों को कुछ राहत दे सकती है, हालांकि इससे उनकी अपूरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं है।

सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि आंदोलन की प्रमुख मांगों में से एक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी था। उनका आरोप है कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामले में नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। हालांकि सरकार की ओर से इस मांग पर कोई तत्काल सहमति या आश्वासन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संघर्ष आगे भी जारी रहेगा और जवाबदेही तय करने की मांग नहीं छोड़ी जाएगी।

उन्होंने अपने समर्थकों और देशभर के छात्रों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा से जुड़ा नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने का प्रयास है। उनका कहना था कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे तो लाखों मेहनती छात्रों का मनोबल प्रभावित होगा और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता कमजोर पड़ेगी।

नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले कई महीनों से देशभर में व्यापक बहस और विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की मांग की है। इस मुद्दे ने संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को भी प्रभावित किया है।

सोनम वांगचुक ने कहा कि अनशन समाप्त करने का अर्थ आंदोलन समाप्त होना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार अपने आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू नहीं करती या शिक्षा सुधारों की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तो भविष्य में आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के लिए व्यापक सुधार किए जाएं।

इस बीच, आंदोलन से जुड़े कई छात्र संगठनों ने वांगचुक के निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा कुछ प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाना आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि उन्होंने भी शिक्षा मंत्री की जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग दोहराई है।

राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है, जबकि सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने और अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नीट जैसे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी सुधार, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना, पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानूनी प्रावधान और जवाबदेही तय करने की प्रभावी व्यवस्था भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक है।

फिलहाल सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होने से आंदोलन को एक नया मोड़ मिला है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों के हितों की सुरक्षा और जवाबदेही तय करने की मांग अभी भी बरकरार है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार अपने दिए गए आश्वासनों को किस प्रकार और कितनी तेजी से अमल में लाती है तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।

Tags:    

Similar News