नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को उन लोगों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाने का निर्देश दिया है जो केरल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गणना फॉर्म जमा करने में असमर्थ थे। ऐसे व्यक्ति सीधे आयोग से संपर्क कर सकते हैं, अदालत ने आयोग को उनके अभ्यावेदन को स्वीकार करने, तथ्यों की जांच करने और उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया कि आयोग को की गई कार्रवाई का विवरण देते हुए एक रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि केरल में एसआईआर अभ्यास के लिए समय सीमा का कोई और विस्तार आवश्यक नहीं है, यह देखते हुए कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक सतत प्रक्रिया है। केरल से संबंधित मुद्दा वकीलों द्वारा अदालत के ध्यान में लाया गया था जब वह विभिन्न राज्यों में एसआईआर अभ्यास से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि केरल में एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और विधानसभा चुनाव भी हो चुका है. अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में हस्तक्षेप किया। कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया और समाजवादी पार्टी के नेता अरविंद कुमार सिंह सहित याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश में एसआईआर अभ्यास के दौरान फॉर्म 7 के कथित व्यापक दुरुपयोग पर चिंता जताई। फॉर्म का उपयोग मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने पर आपत्तियां उठाने या निर्धारित आधार पर मौजूदा प्रविष्टि को हटाने की मांग करने के लिए किया जाता है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस प्रावधान का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है, राजनीतिक दलों के बूथ स्तर के एजेंट भी ऐसी आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने बड़ी संख्या में झूठे फॉर्म 7 आवेदन प्राप्त होने की बात स्वीकार की, लेकिन अदालत को बताया कि उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अनसुलझी अनियमितताओं का विवरण आयोग को सौंपने का निर्देश दिया और चुनाव पैनल से तथ्यों की जांच करने, आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने और एक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।