नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बड़े मंच पर जब दुनिया के दिग्गज नेता एक साथ दिखाई देते हैं, तो हर तस्वीर पर लोगों की नजर टिक जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे बड़े नेताओं के साथ एक भारतीय अधिकारी की मुस्कुराती हुई तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई। तस्वीर देखने के बाद सवाल उठने लगा कि आखिर इन तीनों नेताओं के इतने करीब दिखाई दे रहा यह शख्स कौन है? चर्चा के केंद्र में आए इस अधिकारी का नाम सिद्धार्थ बाबू बताया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान कई ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, जिनमें राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के साथ पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारी भी दिखाई देते हैं। आम तौर पर इन अधिकारियों की चर्चा कम होती है, लेकिन कभी-कभी कोई तस्वीर उन्हें अचानक सुर्खियों में ला देती है। सिद्धार्थ बाबू के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। मोदी, पुतिन और जिनपिंग के साथ उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींच लिया।
आखिर कौन हैं सिद्धार्थ बाबू?
सिद्धार्थ बाबू भारतीय विदेश सेवा से जुड़े अधिकारी हैं और राजनयिक जिम्मेदारियों के तहत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं होता। विदेश मंत्रालय के अधिकारी, राजनयिक और विशेषज्ञ पर्दे के पीछे लगातार काम करते हैं। बैठकों की तैयारी से लेकर द्विपक्षीय वार्ताओं और नेताओं के कार्यक्रमों के समन्वय तक अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
यही कारण है कि किसी बड़े सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के आसपास भारतीय राजनयिकों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी सामान्य बात है। हालांकि आम लोगों की नजर अक्सर नेताओं पर ही रहती है। इस बार सिद्धार्थ बाबू की मुस्कुराती हुई तस्वीर ने उन्हें भी चर्चा में ला दिया।
मोदी पुतिन और जिनपिंग एक फ्रेम में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक साथ दिखाई देना अपने आप में वैश्विक राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत, रूस और चीन दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल हैं। तीनों देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कूटनीति में बड़ी भूमिका है।
ऐसे में जब तीनों नेता किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बातचीत करते या अनौपचारिक अंदाज में दिखाई देते हैं तो तस्वीरों का विश्लेषण भी शुरू हो जाता है। नेताओं की बॉडी लैंग्वेज से लेकर उनके आसपास मौजूद अधिकारियों तक पर नजर जाती है। इसी दौरान सिद्धार्थ बाबू की मौजूदगी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।
तस्वीर ने सोशल मीडिया पर बढ़ाई उत्सुकता
सोशल मीडिया पर बड़ी राजनीतिक और कूटनीतिक तस्वीरें अक्सर तेजी से वायरल होती हैं। इस तस्वीर के साथ भी ऐसा ही हुआ। मोदी, पुतिन और जिनपिंग जैसे नेताओं के बीच भारतीय अधिकारी को सहज और मुस्कुराते हुए देखकर कई यूजर्स उनकी पहचान जानने में दिलचस्पी दिखाने लगे।
दरअसल आम लोगों को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की तस्वीरों में दिखाई देने वाले अधिकारियों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती। यही वजह है कि किसी अधिकारी की प्रमुख नेताओं के साथ तस्वीर सामने आने पर उसकी जिम्मेदारी और भूमिका को लेकर उत्सुकता पैदा होती है।
पर्दे के पीछे अधिकारियों की अहम भूमिका
किसी भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की विदेश यात्रा केवल नेताओं की मुलाकात तक सीमित नहीं होती। इसके पीछे महीनों की तैयारी और अधिकारियों की बड़ी टीम काम करती है। द्विपक्षीय बैठक के एजेंडे से लेकर बातचीत के विषय, दस्तावेज, समझौते, कार्यक्रम और प्रोटोकॉल जैसी कई जिम्मेदारियां राजनयिक स्तर पर संभाली जाती हैं।
विदेश सेवा के अधिकारी संबंधित देशों के अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहते हैं। किसी बैठक से पहले दोनों देशों के बीच चर्चा के विषय तय करने और आवश्यक जानकारी नेतृत्व तक पहुंचाने में भी उनकी भूमिका होती है। सम्मेलन के दौरान कार्यक्रमों का समन्वय और कूटनीतिक संवाद सुचारू रखना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल होता है।
इसी वजह से बड़े वैश्विक नेताओं के आसपास विदेश मंत्रालय के अधिकारी और राजनयिक अक्सर नजर आते हैं। वे भले ही कैमरे के केंद्र में न हों, लेकिन किसी भी सफल कूटनीतिक कार्यक्रम में उनका योगदान महत्वपूर्ण होता है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती सक्रियता
हाल के वर्षों में भारत ने विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाई है। वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, तकनीक और वैश्विक संस्थानों में सुधार जैसे विषयों पर भारत लगातार अपनी बात रखता रहा है।
रूस के साथ भारत के पुराने रणनीतिक संबंध हैं, जबकि चीन के साथ सहयोग और मतभेद दोनों ही कूटनीतिक संबंधों का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की किसी भी मुलाकात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहती है। तीनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत केवल संबंधित देशों के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
राजनयिकों के लिए क्यों खास होते हैं ऐसे सम्मेलन?
बहुपक्षीय सम्मेलन राजनयिकों के लिए बेहद व्यस्त कार्यक्रम होते हैं। एक ही जगह कई देशों के शीर्ष नेता मौजूद होते हैं और कम समय में कई द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय बैठकें आयोजित की जाती हैं। इस दौरान समय प्रबंधन और प्रोटोकॉल से लेकर विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों के बीच समन्वय तक हर स्तर पर सावधानी जरूरी होती है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अधिकारियों को प्रधानमंत्री की बैठकों से संबंधित तैयारी के साथ अन्य देशों के प्रतिनिधियों से संपर्क बनाए रखना पड़ता है। इसलिए किसी अधिकारी का बड़े नेताओं के बेहद करीब दिखाई देना उसकी आधिकारिक जिम्मेदारियों का हिस्सा हो सकता है।
एक तस्वीर और सिद्धार्थ बाबू की चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात यह है कि जहां तस्वीर का मुख्य आकर्षण मोदी, पुतिन और जिनपिंग जैसे वैश्विक नेता थे, वहीं लोगों की नजर सिद्धार्थ बाबू पर भी टिक गई। उनकी सहज मौजूदगी और मुस्कुराते चेहरे ने तस्वीर को अलग पहचान दे दी।
सोशल मीडिया के दौर में कई बार किसी बड़े आयोजन की एक तस्वीर ऐसी कहानी सामने ले आती है, जो मुख्य कार्यक्रम से अलग होते हुए भी लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बन जाती है। सिद्धार्थ बाबू की चर्चा इसी का उदाहरण है।
कूटनीति की दुनिया में अक्सर कैमरे के सामने नेताओं को देखा जाता है, जबकि उनके पीछे अधिकारियों की एक पूरी टीम लगातार काम करती रहती है। सिद्धार्थ बाबू की वायरल होती तस्वीर ने इसी पर्दे के पीछे काम करने वाली व्यवस्था की ओर लोगों का ध्यान खींचा है।
फिलहाल मोदी, पुतिन और जिनपिंग के साथ उनकी तस्वीर लोगों के बीच उत्सुकता पैदा कर रही है। एक फ्रेम में दुनिया के तीन प्रभावशाली नेताओं के साथ दिखाई देने के कारण सिद्धार्थ बाबू का नाम भी चर्चा में आ गया है। यह तस्वीर एक बार फिर दिखाती है कि वैश्विक कूटनीति के बड़े मंच पर नेताओं के साथ उन अधिकारियों की भूमिका भी अहम होती है, जो पर्दे के पीछे रहकर पूरे कूटनीतिक तंत्र को आगे बढ़ाते हैं।