नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को लेकर विवाद बढ़ गया है। सोमवार, 19 अक्टूबर को दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष हुई कार्यवाही के बाद दोनों को राहत नहीं मिल सकी। जमानतदारों के दस्तावेजों में कथित विसंगतियों और शांति व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के बीच उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। इस फैसले के बाद सीजेपी की कानूनी टीम ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लगातार नई आपत्तियां उठाकर दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई में देरी की जा रही है।सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने इस पूरी प्रक्रिया की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जमानतदारों के सत्यापन के लिए बार-बार प्रयास किए गए, लेकिन हर बार अलग-अलग कारण बताकर दस्तावेज स्वीकार नहीं किए गए। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।
'किसी न किसी बहाने से निकाली जा रही कमियां'
रत्ना सिंह ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए जमानत प्रक्रिया पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।सिंह ने कहा, "अदालत में एक तरह का मजाक चल रहा था। पिछले छह दिनों से हम देख रहे हैं कि किसी न किसी बहाने से कमियां निकाली जा रही हैं। कभी कहा जाता है कि जमानतदार का सत्यापन नहीं हुआ है, तो कभी कहा जाता है कि जमानतदार के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज है।"उन्होंने सवाल उठाया कि जब जमानतदारों की व्यवस्था की जा रही है और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जा रहे हैं, तो रिहाई की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ रही है।
14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में हैं दोनों कार्यकर्ता
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।पुलिस के अनुसार, दोनों कार्यकर्ताओं ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए सुरक्षा अवरोधकों को पार किया था। आरोप है कि उन्होंने पहले शांति बनाए रखने के लिए भरे गए बांड की शर्तों का भी उल्लंघन किया।विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। सोमवार को यह अवधि समाप्त होने पर उन्हें फिर से मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।
चार जमानतदारों को अस्वीकार करने का आरोप
सीजेपी की कानूनी टीम का दावा है कि दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए कई जमानतदार प्रस्तुत किए गए, लेकिन उनके दस्तावेजों पर अलग-अलग आपत्तियां उठाई गईं।रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि अब तक चार जमानतदारों को अस्पष्ट कारणों से अस्वीकार किया गया है।उनका कहना है कि जमानत संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद कार्यकर्ताओं को जेल में बनाए रखना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सवाल खड़े करता है।हालांकि, पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों और जमानतदारों के सत्यापन में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है।
मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने का मामला भी सामने आया
इस विवाद के बीच विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी मिलने का मामला भी सामने आया है।दिल्ली पुलिस के अनुसार, मजिस्ट्रेट को दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई के संबंध में धमकियां मिलने की शिकायत प्राप्त हुई थी। इसके बाद अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कथित धमकी से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जा रही है।वहीं, सीजेपी की कानूनी टीम ने कहा कि धमकी का मामला अलग है और इसका उपयोग कार्यकर्ताओं की रिहाई की प्रक्रिया में देरी के आधार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
पुलिस ने शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई
सोमवार को हुई सुनवाई में दिल्ली पुलिस ने दोनों कार्यकर्ताओं की हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया।पुलिस का तर्क था कि दोनों कार्यकर्ताओं ने पहले शांति बनाए रखने की शर्तों पर सहमति जताई थी, लेकिन इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन से संबंधित गतिविधियों में भाग लिया।पुलिस ने आशंका व्यक्त की कि रिहा होने के बाद दोनों फिर से सार्वजनिक शांति प्रभावित करने वाली गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने इन परिस्थितियों के बीच दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया।
सीजेपी ने उठाया व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा
कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं की हिरासत को लेकर चिंता व्यक्त की है।संगठन का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि कानून के अनुसार विरोध प्रदर्शन करने और अपनी बात रखने के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश और पहले निर्धारित शर्तों के कथित उल्लंघन से संबंधित है।फिलहाल सौरव दास और आशुतोष रांका न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी रिहाई का प्रश्न आगे की कानूनी कार्यवाही और सक्षम अधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगा।