नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी छोड़ने के अपने फैसले और इस्तीफे में उल्लेख किए गए “कुछ व्यक्तियों” को लेकर एक बार फिर स्थिति स्पष्ट की है। हाल में एक पॉडकास्ट के दौरान उनसे पूछा गया कि आखिर वे लोग कौन थे, जिनके कारण भाजपा छोड़ने का उनका निर्णय और मजबूत हो गया। पूनावाला ने किसी नेता या व्यक्ति का नाम बताने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोग मिलते हैं जो दूसरों को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते और उन्हें नीचे खींचने की कोशिश करते हैं।

शहजाद पूनावाला ने भाजपा अध्यक्ष को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा था कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं और कुछ व्यक्तियों से जुड़ी परिस्थितियों ने उन्हें अपने पुराने फैसले पर कायम रहने के लिए मजबूर किया। इस पंक्ति के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गई थीं। यह सवाल उठने लगा था कि क्या पूनावाला पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता या संगठन के भीतर किसी समूह से नाराज थे।

पॉडकास्ट में इस बारे में पूछे जाने पर पूनावाला ने कहा कि वह संबंधित लोगों का नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते। उन्होंने यह जरूर कहा कि राजनीति और मीडिया सहित सार्वजनिक जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए कठिन संबंध और मतभेद सामने आ सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति के साथ हमेशा अच्छे संबंध बने रहें, यह जरूरी नहीं है। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में कुछ लोग किसी व्यक्ति को आगे बढ़ाने के बजाय उसे नीचे खींचने और असफल होते देखने की कोशिश करते हैं।

हालांकि, पूनावाला ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके इस्तीफे में जिन “कुछ व्यक्तियों” का उल्लेख था, वे भाजपा से जुड़े थे, मीडिया जगत से थे अथवा किसी अन्य क्षेत्र से संबंध रखते थे। इसलिए किसी नेता या पदाधिकारी का नाम उनके इस्तीफे से जोड़ना अटकल माना जाएगा। पूनावाला की ओर से नाम न बताए जाने के कारण इन व्यक्तियों की पहचान अब भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

शहजाद पूनावाला ने लगातार कहा है कि भाजपा छोड़ने का उनका फैसला किसी एक घटना या अचानक पैदा हुए राजनीतिक मतभेद का परिणाम नहीं था। उनके मुताबिक, वह वर्ष 2024 से सक्रिय राजनीति से अलग होने के विकल्प पर विचार कर रहे थे। व्यक्तिगत परिस्थितियों और आर्थिक दबाव ने उनके फैसले में मुख्य भूमिका निभाई। हाल की कुछ घटनाओं ने केवल पहले से लिए जा रहे निर्णय को अंतिम रूप देने का काम किया।

पूनावाला ने एक इंटरव्यू में अपनी आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा था कि उन्हें घर का किराया और दैनिक खर्च चुकाना पड़ता है। राजनीतिक पार्टियां प्रवक्ताओं और कार्यकर्ताओं को नियमित वेतन नहीं देती हैं। उन्होंने कहा कि मकान मालिक इस आधार पर किराया माफ नहीं करेगा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हुए हैं। इसलिए उन्हें आर्थिक स्थिरता और निजी क्षेत्र में काम करने की संभावनाओं पर ध्यान देना जरूरी लगा।

 पूनावाला ने आर्थिक और निजी दबाव को भाजपा के पदों तथा प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की प्रमुख वजह बताया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके फैसले को पार्टी के साथ किसी बड़े वैचारिक टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

पूनावाला ने पहली बार 30 जुलाई को भाजपा के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। पार्टी ने उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक अंतिम निर्णय रोक लिया था। लंबे विचार-विमर्श के बाद उन्होंने 17 अगस्त को दोबारा अपना इस्तीफा भेजते हुए भाजपा नेतृत्व से इसे स्वीकार करने का आग्रह किया।

अपने दूसरे त्यागपत्र में पूनावाला ने लिखा कि वह “व्यवस्था छोड़ रहे हैं, व्यक्ति या विचार नहीं।” इस बयान के माध्यम से उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा से संगठनात्मक रूप से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी की व्यापक विचारधारा के प्रति उनका समर्थन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के लक्ष्य और सरकार के सकारात्मक कार्यों का समर्थन जारी रखने की बात कही।

पूनावाला ने भाजपा में मिले अवसरों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और संगठन के अन्य वरिष्ठ नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखने के लिए मंच दिया। उन्होंने यह भी कहा कि एक युवा, पसमांदा मुस्लिम और गैर-वंशवादी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के रूप में उन्हें भाजपा में जो अवसर मिले, वे उनके लिए महत्वपूर्ण रहे।

पूर्व भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस में वापस जाने की अटकलों को भी खारिज किया है। उनका कहना है कि वह फिलहाल किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर निजी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। वह सार्वजनिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखते रह सकते हैं, लेकिन किसी राजनीतिक संगठन में पद लेने की उनकी तत्काल योजना नहीं है।

भाजपा छोड़ने के बाद भी पूनावाला कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार के फैसलों का समर्थन करते दिखाई दिए हैं। इससे उनके उस बयान की पुष्टि होती है कि उन्होंने पार्टी की संगठनात्मक व्यवस्था से अलग होने का फैसला किया है, न कि अपनी राजनीतिक विचारधारा बदलने का। इस रुख के कारण उनके भविष्य को लेकर भी चर्चा जारी है कि वह स्वतंत्र राजनीतिक टिप्पणीकार के रूप में सक्रिय रहेंगे या निजी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

पॉडकास्ट में दिए गए जवाब के बावजूद इस्तीफे में उल्लिखित व्यक्तियों की पहचान का सवाल पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने नाम बताने के बजाय केवल सार्वजनिक जीवन में लोगों द्वारा नीचे खींचने की प्रवृत्ति की बात कही है। ऐसे में किसी खास भाजपा नेता या पदाधिकारी को उनके इस्तीफे का जिम्मेदार ठहराने का कोई पुष्ट आधार फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

Tags: