नई दिल्ली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के मुस्लिम युवाओं को राजनीतिक नेतृत्व में आगे लाने वाले बयान पर सियासी विवाद छिड़ गया है। कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने सोमवार, 19 अक्टूबर को ओवैसी के बयान पर सवाल उठाते हुए उनकी चुनावी रणनीति की आलोचना की। उन्होंने पूछा कि जब ओवैसी मुस्लिम युवाओं को नेतृत्व देने की बात करते हैं, तो उनकी पार्टी तेलंगाना की सभी 119 विधानसभा सीटों पर चुनाव क्यों नहीं लड़ती।शमा मोहम्मद ने कहा कि ओवैसी की पार्टी का राजनीतिक आधार तेलंगाना में है, लेकिन वहां सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद वह दूसरे राज्यों में मुस्लिम युवाओं को राजनीतिक अवसर देने की बात करते हैं। उन्होंने AIMIM की रणनीति और उसके दावों के बीच अंतर होने का आरोप लगाया।
शमा मोहम्मद ने ओवैसी से पूछे सवाल
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शमा मोहम्मद ने कहा कि तेलंगाना विधानसभा में कुल 119 सीटें हैं। इसके बावजूद ओवैसी की पार्टी केवल नौ सीटों पर चुनाव लड़ती रही है।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि AIMIM वास्तव में मुस्लिम युवाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना चाहती है, तो वह अधिक सीटों पर उम्मीदवार क्यों नहीं उतारती।शमा मोहम्मद ने कहा कि ओवैसी को पहले अपने गृह राज्य में युवाओं के लिए राजनीतिक अवसर बढ़ाने चाहिए। उन्होंने दूसरे राज्यों में जाकर राजनीतिक नेतृत्व से जुड़े बयान देने पर भी सवाल उठाए।
मुस्लिम युवाओं को नेतृत्व देने की ओवैसी ने कही थी बात
दरअसल, असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुस्लिम युवाओं को राजनीतिक नेतृत्व में आगे आने का आह्वान किया था।उन्होंने कहा था कि मुस्लिम समुदाय के युवाओं में प्रतिभा और नेतृत्व करने की क्षमता है, लेकिन उन्हें पर्याप्त राजनीतिक अवसर नहीं मिल पाते।ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी पार्टी युवाओं को ऐसा मंच उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है, जिसके माध्यम से वे राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकें और वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए आवाज उठा सकें।उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम युवाओं को केवल दूसरे नेताओं का समर्थन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्वयं नेतृत्व करने के लिए आगे आना चाहिए।
तेलंगाना में AIMIM ने जीती थीं सात सीटें
तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य की 119 सीटों में से AIMIM ने नौ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से सात सीटों पर पार्टी ने जीत हासिल की थी, जबकि दो सीटों पर उसके उम्मीदवार पराजित हुए थे।निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पार्टी को कुल 5,19,379 वोट मिले थे। इस चुनाव में कांग्रेस ने 64 और भारत राष्ट्र समिति ने 39 सीटों पर जीत दर्ज की थी।इन्हीं आंकड़ों को आधार बनाकर शमा मोहम्मद ने ओवैसी की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाया है। हालांकि, किसी पार्टी का सीमित सीटों पर चुनाव लड़ना उसकी संगठनात्मक और चुनावी रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है।
उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के बीच मतदाता प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय और नेतृत्व के मुद्दों पर बहस तेज हो रही है।ओवैसी लगातार मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल उठा रहे हैं। वहीं, कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दल उनकी रणनीति पर सवाल खड़े कर रहे हैं।शमा मोहम्मद की प्रतिक्रिया को भी इसी राजनीतिक बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।
मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर छिड़ी बहस
इस विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक दलों में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी और उन्हें चुनाव लड़ने के अवसर देने का मुद्दा सामने ला दिया है।शमा मोहम्मद का सवाल AIMIM द्वारा उम्मीदवार उतारने की संख्या पर केंद्रित है, जबकि ओवैसी अपने राजनीतिक संदेश में समुदाय के युवाओं को नेतृत्व के लिए तैयार करने पर जोर दे रहे हैं।दोनों नेताओं के बयानों के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व और चुनावी रणनीति पर चर्चा बढ़ गई है। फिलहाल शमा मोहम्मद के इन सवालों पर ओवैसी की अलग से कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है।
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