SC ने आसाराम की याचिका पर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा

Update: 2026-06-30 08:07 GMT

Delhi दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजस्थान सरकार से स्वयंभू धर्मगुरु Asaram Bapu की उस याचिका पर जवाब तलब किया है, जिसमें उन्होंने राज्य उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी है। यह मामला 2013 के नाबालिग से जुड़े रेप केस में सुनाई गई उम्रकैद की सजा से संबंधित है, जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिका में आसाराम ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी सजा और आजीवन कारावास को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला फिलहाल विचाराधीन है और अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस चरण में कोई अंतरिम राहत यानी जमानत नहीं दी जा रही है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि अभी जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही इस पर विचार किया जाएगा कि क्या किसी विशेष परिस्थिति में जमानत पर विचार किया जा सकता है, जैसे कि यदि याचिकाकर्ता की जान को खतरा हो या कोई गंभीर चिकित्सकीय स्थिति हो।

अदालत की टिप्पणी से यह स्पष्ट संकेत मिला कि फिलहाल न्यायालय मामले की गंभीरता को देखते हुए सावधानीपूर्वक आगे बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

यह मामला वर्ष 2013 के उस चर्चित प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें एक नाबालिग ने आसाराम के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। निचली अदालत ने पहले ही उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया था।

इस फैसले के बाद आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी ओर से दलील दी गई है कि सजा और दोषसिद्धि के फैसले में कानूनी त्रुटियां हैं, जिन पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

वहीं राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कड़ा रुख अपनाए जाने की संभावना है, क्योंकि यह एक संवेदनशील और गंभीर आपराधिक मामला है, जिसमें पहले ही निचली और उच्च अदालतों से दोषसिद्धि हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई अब आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि अदालत के अगले रुख पर इस मामले का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा। फिलहाल अदालत ने सभी पक्षों को विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले में फिलहाल यथास्थिति बनाए रखते हुए राजस्थान सरकार से जवाब मांगा है और स्पष्ट किया है कि बिना विस्तृत सुनवाई के कोई राहत नहीं दी जाएगी।

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