नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही में दखल देने से इनकार कर दिया। यह मामला 'अखंड कीर्तनी जत्था' (AKJ) को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'बब्बर खालसा इंटरनेशनल' (BKI) से जोड़ने वाले कथित बयानों से जुड़ा है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने बादल की उस चुनौती को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने AKJ सदस्य राजिंदर पाल सिंह द्वारा शुरू की गई कार्यवाही को चुनौती दी थी। सिंह का आरोप था कि पूर्व मंत्री के बयानों ने उन्हें एक प्रतिबंधित संगठन से जोड़कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है।लंबित कार्यवाही में दखल देने का कोई आधार न पाते हुए, बेंच ने बादल की याचिका खारिज कर दी।
यह विवाद 2017 के पंजाब विधानसभा चुनावों के समय का है, जब दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सिंह के घर गए थे। शिकायत के अनुसार, इसके बाद बादल ने केजरीवाल पर पंजाब में "कट्टरपंथियों" से संपर्क करने का आरोप लगाया था।
सिंह का आरोप था कि बादल ने AKJ को BKI का "राजनीतिक मोर्चा" बताया था और उन्हें संगठन का प्रवक्ता कहा था। इन बयानों को मानहानिपूर्ण बताते हुए सिंह ने बादल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की थी।
चंडीगढ़ के एक मजिस्ट्रेट ने शिकायत का संज्ञान लिया और बादल को समन जारी किया। इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में उनकी चुनौती को अक्टूबर 2025 में खारिज कर दिया गया, जिसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
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