नई दिल्ली/पटना। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने खुला समर्थन दिया है। सोशल मीडिया के माध्यम से रोहिणी आचार्य जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के पक्ष में अभियान चला रही हैं। इसी बीच शनिवार को सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरभ दास और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा।

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित आंदोलन के बीच रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बनी हुई है। सीजेपी नेताओं की हिरासत की खबरों ने इस प्रदर्शन से जुड़े राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। हालांकि, हिरासत में लिए जाने की परिस्थितियों और रोहिणी आचार्य की सोशल मीडिया टिप्पणियों के सटीक शब्दों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन को रोहिणी आचार्य का समर्थन

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के जरिए सीजेपी के प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन के पक्ष में अपना रुख जाहिर किया है। वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान का समर्थन कर रही हैं।

इस आंदोलन के जरिए सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग उठा रही है। रोहिणी आचार्य का समर्थन सामने आने के बाद यह मुद्दा दिल्ली के साथ बिहार की राजनीतिक चर्चा से भी जुड़ गया है।

हालांकि, रोहिणी आचार्य ने आंदोलन के समर्थन में कितनी पोस्ट साझा की हैं और उनमें कौन-कौन से आरोप लगाए हैं, इसका पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है।

सीजेपी नेताओं की हिरासत पर जताई नाराजगी

शनिवार को सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। इसी क्रम में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है।

इन खबरों के बाद रोहिणी आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया।

उनकी नाराजगी का संबंध प्रदर्शन से पहले नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरों से बताया जा रहा है।

हालांकि, ध्रुव राठी की हिरासत, सभी व्यक्तियों की कानूनी स्थिति और संबंधित पुलिस कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। हिरासत और गिरफ्तारी अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं, इसलिए दोनों को एक समान नहीं माना जाना चाहिए।

पीएम मोदी और अमित शाह पर लगाए आरोप

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों को रोकने की कार्रवाई केंद्र सरकार के इशारे पर की गई। उन्होंने इस घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की।

उन्होंने अपनी टिप्पणी में अभिजीत दीपके, सौरभ दास, आशुतोष रांका और ध्रुव राठी का उल्लेख किया। साथ ही प्रदर्शन में शामिल होने वाले अन्य युवाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।

रोहिणी ने इस कार्रवाई को सरकार की कथित तानाशाही का उदाहरण बताया। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है। हिरासत के आदेश सीधे प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के निर्देश पर दिए गए थे, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

सीजेपी का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया है। संगठन ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं में गड़बड़ियां हुई हैं। हालांकि, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूचियों का सत्यापन चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।

इन्हीं मुद्दों को लेकर सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था।

 दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था सख्त की गई। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई तथा प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए प्रतिबंध लगाए गए।

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कार्रवाई की गई। दूसरी ओर, सीजेपी ने अपने नेताओं और समर्थकों को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया।

संगठन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने, बैरिकेड नहीं तोड़ने और किसी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील भी की थी।

ध्रुव राठी की हिरासत भी चर्चा में

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को शनिवार सुबह गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई है।

राठी ने सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही थी। उनके हिरासत में लिए जाने के बाद संगठन ने इस कार्रवाई की निंदा की और रिहाई की मांग उठाई।

वहीं, अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इन घटनाओं के बाद प्रदर्शन से संबंधित राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।

लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर उठे सवाल

इस घटनाक्रम के बाद विरोध प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित उचित कानूनी प्रतिबंधों के अधीन है।

ऐसे में किसी प्रदर्शन के आयोजन, अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसलों का कानूनी महत्व होता है।

सीजेपी नेताओं की हिरासत पर रोहिणी आचार्य ने राजनीतिक सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस ने अपनी कार्रवाई के पीछे सुरक्षा और अनुमति से जुड़े कारण बताए हैं।

रोहिणी के समर्थन से आंदोलन पर बढ़ा ध्यान

रोहिणी आचार्य की सोशल मीडिया प्रतिक्रिया ने सीजेपी के आंदोलन को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चा में एक और पक्ष जोड़ दिया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग, प्रदर्शनकारियों की हिरासत और दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंध इस पूरे घटनाक्रम के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

शनिवार को सामने आए घटनाक्रम में रोहिणी आचार्य ने सीजेपी के आंदोलन का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना की। दूसरी ओर, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े सवाल भी चर्चा में हैं। अब आंदोलनकारियों की आगे की रणनीति तथा हिरासत में लिए गए लोगों की कानूनी स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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