दिल्ली में टीबी का बढ़ा खतरा 42 दिनों में मिले 12078 नए मरीज
खांसी से ज्यादा इन संकेतों पर दें ध्यान टीबी को लेकर बढ़ी चिंता
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में टीबी (तपेदिक) को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग की विशेष जांच मुहिम में 42 दिनों के भीतर टीबी के 12,078 नए मामले सामने आए हैं। यह आंकड़े राजधानी में टीबी की चुनौती को दिखाते हैं और लोगों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए स्क्रीनिंग अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जांच की गई। सामने आए मामलों में कई मरीज ऐसे भी मिले, जिनमें बीमारी की पहचान समय पर हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी का जल्दी पता चलने पर इसका इलाज संभव है और मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती है। इसके संक्रमण का मुख्य कारण संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाले बैक्टीरिया होते हैं।
टीबी के इन लक्षणों पर दें ध्यान
डॉक्टरों के अनुसार, टीबी के कुछ सामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
दो सप्ताह से ज्यादा समय तक लगातार खांसी रहना
खांसी के साथ बलगम या खून आना
शाम के समय बुखार आना
रात में ज्यादा पसीना आना
अचानक वजन कम होना
भूख कम लगना
कमजोरी और थकान महसूस होना
सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी
अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं तो उसे तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करवानी चाहिए।
समय पर जांच और इलाज जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी को लेकर डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए। सही समय पर जांच और नियमित इलाज से टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इलाज के दौरान डॉक्टरों द्वारा बताई गई दवाओं का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी होता है। दिल्ली में टीबी के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने हाई रिस्क इलाकों में स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान पर जोर दिया है। झुग्गी-झोपड़ी और अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में बीमारी की पहचान के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
बचाव के लिए रखें सावधानी
टीबी से बचाव के लिए घर और आसपास साफ-सफाई रखना, कमरे में हवा का उचित आवागमन बनाए रखना और लंबे समय तक खांसी रहने पर तुरंत जांच कराना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं को दूर करना भी जरूरी है। यह बीमारी इलाज से ठीक हो सकती है और मरीज के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। दिल्ली में सामने आए 12,078 मामलों ने एक बार फिर यह साबित किया है कि टीबी के खिलाफ लगातार निगरानी, जांच और जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं। समय पर पहचान और इलाज ही इस बीमारी को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।