कंगना रनौत को लेकर राजीव मसंद का बयान, बोले- मुझे एक्ट्रेस कंगना की याद आती है
नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्ट्रेस और भाजपा सांसद कंगना रनौत को लेकर पूर्व फिल्म क्रिटिक और वरिष्ठ पत्रकार राजीव मसंद का एक बयान चर्चा में है। हाल ही में ‘साइरस सेज़’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान मसंद ने कंगना के अभिनय करियर, उनकी मौजूदा सार्वजनिक छवि और राजनीति में सक्रियता को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें एक अभिनेत्री के रूप में कंगना की याद आती है और उनकी नजर में कंगना की राजनीतिक छवि ने उनके अभिनय वाले व्यक्तित्व को पीछे छोड़ दिया है।
राजीव मसंद ने बातचीत के दौरान कंगना की मौजूदा सार्वजनिक छवि पर कड़ी टिप्पणी की और कहा, “मुझे एक्ट्रेस कंगना की याद आती है। वह अब सिर्फ मजाक बन गई हैं।” यह मसंद की व्यक्तिगत टिप्पणी थी और उन्होंने इसे कंगना के अभिनय करियर की तुलना उनकी मौजूदा सार्वजनिक पहचान से करते हुए कहा।
मसंद ने साफ किया कि एक कलाकार के रूप में वह कंगना की क्षमताओं की काफी सराहना करते हैं। उन्होंने खास तौर पर 2014 में आई फिल्म ‘क्वीन’ में उनके प्रदर्शन का उल्लेख किया और उस फिल्म में उनकी एक्टिंग को बेहद प्रभावशाली बताया। मसंद के अनुसार कंगना उन फिल्मों में सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ती थीं, जिनमें वह खुद से ज्यादा किरदार और कहानी पर केंद्रित रहती थीं।
बातचीत के दौरान मसंद ने यह भी कहा कि उनके अनुसार कंगना एक समय अपने किरदारों में इस तरह ढल जाती थीं कि पर्दे पर अभिनेता की बजाय केवल पात्र दिखाई देता था। उन्होंने कंगना को हिंदी सिनेमा की बेहतरीन अभिनेत्रियों में गिना और उनकी तुलना आलिया भट्ट से भी की।
हालांकि मसंद का कहना था कि समय के साथ कंगना की सार्वजनिक छवि उनके अभिनय पर हावी होती चली गई। उनका मानना है कि पहले कंगना उन फिल्मों का हिस्सा बनती थीं जिनमें कहानी और किरदार प्राथमिकता में होते थे, लेकिन बाद के दौर में उनकी सार्वजनिक पहचान और निजी व्यक्तित्व ज्यादा चर्चा में आने लगे। यह मसंद की आलोचनात्मक राय है, न कि कोई स्थापित तथ्य।
कंगना रनौत ने 2024 के लोकसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी और इसके बाद वह सक्रिय रूप से राजनीति में शामिल हो गईं। तब से वह संसद और सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक मुद्दों को लेकर भी लगातार मुखर रही हैं।
राजीव मसंद ने कंगना के उन पुराने दावों पर भी सवाल उठाए जिनमें उन्होंने बॉलीवुड में प्रभावशाली लोगों द्वारा अवसरों से वंचित किए जाने की बात कही थी। मसंद ने कहा कि उनकी नजर में फिल्म उद्योग आखिरकार सफलता को स्वीकार करता है और किसी कलाकार को शुरुआती संघर्ष के बावजूद सफलता मिलने के बाद उसका सम्मान किया जाता है। यह भी मसंद का अपना आकलन था।
पॉडकास्ट के दौरान बातचीत कंगना की फिल्मों और उनकी सार्वजनिक छवि से आगे भी बढ़ी। मसंद ने बॉलीवुड में मुखर और बेबाक हस्तियों पर भी चर्चा की और कंगना का नाम उन लोगों में लिया जो अपने सीधे और बिना फिल्टर वाले बयानों के कारण लगातार सुर्खियों में रहते हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में राखी सावंत और सुनीता आहूजा का भी उल्लेख किया।
मसंद ने यह भी संकेत दिया कि वह कंगना को फिर से ज्यादा फिल्मों में सक्रिय देखना चाहते हैं। उन्होंने ‘क्वीन’ के निर्देशक विकास बहल के साथ कंगना के संभावित नए काम को लेकर रुचि जताई और कहा कि वह एक बार फिर वही अभिनेत्री देखना चाहेंगे जो अपने किरदारों में पूरी तरह उतर जाती थी।
राजीव मसंद और कंगना रनौत के बीच पहले भी सार्वजनिक मतभेद रहे हैं। कंगना कई मौकों पर बॉलीवुड पत्रकारिता और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां करती रही हैं। ऐसे में मसंद का ताजा बयान एक बार फिर पुराने मतभेदों को चर्चा में ले आया है।
फिल्मी दुनिया में कंगना की पहचान शुरुआत से ही मजबूत अभिनय वाली अभिनेत्री के रूप में रही है। ‘क्वीन’, ‘तनु वेड्स मनु’ और अन्य फिल्मों में उनके प्रदर्शन को व्यापक पहचान मिली। इसके साथ-साथ उनके सार्वजनिक बयान भी अक्सर चर्चा का विषय बने। राजनीति में आने के बाद उनकी पहचान अब केवल अभिनेत्री तक सीमित नहीं रही है।
मसंद की टिप्पणी का केंद्र भी यही बदलाव रहा। उन्होंने कहा कि उन्हें कंगना का वह दौर ज्यादा पसंद था जब उनकी चर्चा मुख्य रूप से उनकी फिल्मों और अभिनय के कारण होती थी।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मसंद का “मजाक” वाला बयान उनकी निजी राय और आलोचना है। इसे कंगना की सार्वजनिक या राजनीतिक भूमिका के बारे में निष्पक्ष निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कंगना की तरफ से मसंद की इस ताजा टिप्पणी पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि वह प्रतिक्रिया देती हैं तो दोनों के बीच पुराना विवाद फिर तेज हो सकता है।
फिलहाल राजीव मसंद का यह बयान मनोरंजन और राजनीतिक दोनों हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ उन्होंने कंगना की अभिनय क्षमता की खुलकर तारीफ की, वहीं दूसरी तरफ उनकी मौजूदा सार्वजनिक छवि को लेकर तीखी आलोचना भी की।
मसंद के शब्दों में उनका झुकाव आज भी “एक्ट्रेस कंगना” की ओर ज्यादा है। यही वजह है कि उनका यह बयान केवल आलोचना नहीं, बल्कि कंगना के अभिनय करियर और उनकी बदलती सार्वजनिक पहचान की तुलना के रूप में भी देखा जा रहा है।