नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता पंजीकरण से जुड़े **फॉर्म-6** में किए गए बदलाव "गैर-कानूनी और एकतरफा" थे। राहुल गांधी ने कहा कि यह मामला अब "बिना किसी शक के साबित" हो चुका है और आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। हालांकि चुनाव आयोग ने पहले भी अपने फैसलों को नियमों के अनुरूप बताया है और राहुल गांधी के आरोपों पर आधिकारिक रूप से कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच **'X'** पर एक पोस्ट के जरिए अपने आरोप दोहराए। उन्होंने लिखा कि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में गैर-कानूनी और एकतरफा तरीके से बदलाव किया। उनके अनुसार यह चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर मामला है।अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा, **"अब यह बिना किसी शक के साबित हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने 'फॉर्म 6' को गैर-कानूनी और एकतरफा तरीके से बदला। यह इस बात का एक और सबूत है कि उन्होंने BJP की मदद करने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्हें और हमारे लोकतंत्र पर किए गए इस आपराधिक हमले में शामिल सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।"**
राहुल गांधी ने अपने आरोपों के समर्थन में चुनाव आयोग की पहले जारी की गई एक प्रेस विज्ञप्ति की तस्वीर भी साझा की। उनका दावा है कि इससे फॉर्म-6 से संबंधित बदलावों और चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि उन्होंने अपने पोस्ट में किसी न्यायिक आदेश या स्वतंत्र जांच का उल्लेख नहीं किया।फॉर्म-6 चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में नया नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला आवेदन पत्र है। मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में यह एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। हाल के दिनों में इस फॉर्म में किए गए कुछ बदलावों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।
राहुल गांधी और कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े बदलावों का असर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर पड़ सकता है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दलों ने चुनाव आयोग से इन बदलावों पर स्पष्टीकरण मांगा है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को सभी राजनीतिक दलों का विश्वास बनाए रखने के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए।दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना रहा है कि मतदाता सूची में संशोधन और पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रियाएं कानून तथा निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जाती हैं। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अद्यतन रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है और समय-समय पर आवश्यक बदलाव इसी प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर राजनीतिक बहस तेज बनी हुई है। विपक्षी दल हाल के दिनों में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण, फॉर्म-6 और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है, जबकि आयोग ने अपने कदमों को नियमसम्मत बताया है।कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग को अपने सभी फैसलों और प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण आयोग के हर निर्णय पर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को पहले भी राजनीतिक बताया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज पर इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। भाजपा का आरोप है कि चुनावी हार के बाद विपक्ष आयोग पर सवाल उठाने की रणनीति अपनाता रहा है।राहुल गांधी ने अपने ताजा बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जवाबदेही तय करने की भी बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने वाले सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। हालांकि यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है और इसकी पुष्टि किसी न्यायिक निर्णय या स्वतंत्र जांच से नहीं हुई है।
फिलहाल फॉर्म-6 और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। एक ओर विपक्ष इस मुद्दे को लोकतांत्रिक पारदर्शिता से जोड़कर देख रहा है, वहीं चुनाव आयोग और सत्तापक्ष नियमों के तहत प्रक्रिया अपनाने की बात कह रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से किसी नए स्पष्टीकरण या आधिकारिक प्रतिक्रिया पर भी निगाह रहेगी।
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