नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राहुल गांधी ने दावा किया था कि राष्ट्रपति ने विपक्षी गठबंधन के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का खंडन नहीं किया। हालांकि, सरकारी सूत्रों ने इस दावे को गलत बताया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी राहुल गांधी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन पर संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया है।
यह विवाद उस समय सामने आया, जब विपक्षी गठबंधन इंडिया के नेताओं ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से संबंधित मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा था। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी उठाई।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी सहित विपक्षी गठबंधन के कई नेताओं ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी सहित अन्य विपक्षी नेता भी शामिल थे।
मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों को खारिज नहीं किया। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति ने विपक्षी नेताओं से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत देने को कहा। राहुल गांधी के मुताबिक, विपक्ष को उम्मीद थी कि राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर स्पष्ट प्रतिक्रिया देंगी।
विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति के सामने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल हैं और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
सरकारी सूत्रों ने राहुल गांधी के दावे पर उठाए सवाल
राहुल गांधी के बयान के बाद सरकारी सूत्रों की ओर से कहा गया कि यह दावा गलत है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विपक्षी गठबंधन के चुनाव में धांधली या ‘वोट चोरी’ के आरोपों का खंडन नहीं किया। सूत्रों ने राष्ट्रपति को विपक्ष के राजनीतिक आरोपों से जुड़े विवाद में शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई।
इस प्रतिक्रिया के बाद राष्ट्रपति से मुलाकात को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक तरफ राहुल गांधी ने मुलाकात के बाद की बातचीत का अपना विवरण दिया, वहीं सरकारी सूत्रों ने उनके दावे की व्याख्या पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, राष्ट्रपति की ओर से इस विवाद को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। इसलिए मुलाकात के दौरान हुई बातचीत और राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया के बारे में अलग-अलग पक्षों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
भाजपा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
भाजपा ने भी राहुल गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के दावे को गलत बताते हुए उन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता अपने राजनीतिक विरोध के लिए संवैधानिक संस्थाओं को विवाद में घसीट रहे हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और विचित्र बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार कर लिया, ऐसा दावा करना गलत है। उन्होंने राहुल गांधी पर राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठाने का आरोप भी लगाया।
भाजपा की प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की स्थिति बन गई है। विपक्ष जहां चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा ने राहुल गांधी के बयानों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ज्ञापन में क्या मांग?
विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन के जरिए चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दे उठाए। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच तथा चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही।
विपक्ष की ओर से यह भी मांग उठाई गई कि मतदाता सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं। इसके अलावा, कुछ विपक्षी नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के स्थान पर मतपत्र से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई।
ये मांगें विपक्ष के आरोपों और राजनीतिक रुख का हिस्सा हैं। चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े दावों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों, आंकड़ों और सक्षम संस्थाओं की जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक टकराव तेज
राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने और उसके बाद राहुल गांधी की टिप्पणी से चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। विपक्ष लगातार मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहा है। दूसरी तरफ भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बताते हुए उनका विरोध कर रही है।
इस विवाद में राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान हुई बातचीत की व्याख्या भी महत्वपूर्ण हो गई है। राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति ने आरोपों का खंडन नहीं किया और सबूत मांगे, जबकि सरकारी सूत्रों ने इस दावे को गलत बताया। भाजपा ने भी राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए उनके बयान को खारिज किया है।
फिलहाल, राहुल गांधी के बयान और उस पर आई सरकारी तथा भाजपा की प्रतिक्रियाओं के बाद विवाद गहरा गया है। राष्ट्रपति की ओर से इस मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आने और विपक्ष के आरोपों से संबंधित तथ्यों की जांच के बाद ही विवाद के विभिन्न पहलुओं पर अधिक स्पष्टता मिल सकेगी।