स्कॉलरशिप और लोन से की पढ़ाई: Dipke

Update: 2026-08-03 09:06 GMT

दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने विदेश में अपनी पढ़ाई के खर्च को लेकर उठ रहे सवालों पर सोमवार को पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी उच्च शिक्षा पूरी तरह वैध और पारदर्शी तरीके से हुई थी। दिपके ने कहा कि उन्हें बोस्टन यूनिवर्सिटी से छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) मिली थी और शेष राशि की व्यवस्था उन्होंने एजुकेशन लोन लेकर की थी। उन्होंने यह भी बताया कि यह शिक्षा ऋण अभी पूरी तरह चुकाया नहीं गया है और वह अब भी इसकी किस्तें चुका रहे हैं।

हाल के दिनों में अभिजीत दिपके की विदेश में पढ़ाई और उस पर हुए खर्च को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठाए जा रहे थे। इन सवालों के बीच उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी शिक्षा से जुड़ी पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप रही है और इसमें किसी तरह की अनियमितता या छिपाने जैसी कोई बात नहीं है।

उन्होंने कहा, "मुझे बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिली थी और बाकी रकम के लिए मैंने एजुकेशन लोन लिया था। यह लोन अभी भी बाकी है और इसे चुकाना है।" दिपके ने कहा कि यह तथ्य पहले भी सार्वजनिक रहे हैं और यदि कोई जानकारी चाहता है तो वह संबंधित दस्तावेजों के आधार पर इसकी पुष्टि कर सकता है।

अभिजीत दिपके ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ उठाए जा रहे सवालों को राजनीतिक नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उनके व्यक्तिगत जीवन और शिक्षा को विवाद का विषय बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि किसी भी व्यक्ति की शैक्षणिक उपलब्धियों या आर्थिक व्यवस्था को बिना तथ्यों के आधार पर कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।

उन्होंने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान विवाद को वह व्यक्तिगत लड़ाई नहीं मानते। उनके अनुसार, "यह लड़ाई पर्सनल नहीं है।" उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के मुद्दों को आगे बढ़ाना है। इसलिए व्यक्तिगत आरोपों के बजाय सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।

अभिजीत दिपके से जब सूचना के अधिकार (आरटीआई) से जुड़े मामलों को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने किसी प्रकार की चिंता या असहजता नहीं दिखाई। उन्होंने संकेत दिया कि यदि किसी ने कानूनी प्रक्रिया के तहत जानकारी मांगी है तो उसका जवाब भी कानून के अनुसार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्हें पारदर्शिता से कोई आपत्ति नहीं है और वे आवश्यक होने पर संबंधित तथ्यों को सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन किसी भी आरोप या टिप्पणी का आधार तथ्य और प्रमाण होने चाहिए। बिना सत्यापन के लगाए गए आरोप न केवल व्यक्ति की छवि को प्रभावित करते हैं बल्कि सार्वजनिक विमर्श को भी भटका सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों की शिक्षा, आय और खर्चों को लेकर सवाल उठना असामान्य नहीं है। हालांकि ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति द्वारा स्पष्ट और तथ्यात्मक जानकारी देना विवादों को कम करने में मददगार हो सकता है। अभिजीत दिपके का यह बयान भी इसी दिशा में देखा जा रहा है।

दिपके ने कहा कि विदेश में पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था। छात्रवृत्ति मिलने के बावजूद उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा और इसलिए एजुकेशन लोन लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि पढ़ाई पूरी होने के बाद से वह लगातार उस ऋण का भुगतान कर रहे हैं और अभी भी कुछ राशि बाकी है।

उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि यदि उन्हें छात्रवृत्ति या शिक्षा ऋण के माध्यम से उच्च शिक्षा का अवसर मिलता है तो उसका लाभ उठाना चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा में किया गया निवेश भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण निवेश होता है और इसके लिए लिया गया ऋण भी जिम्मेदारी के साथ चुकाया जा सकता है।

अपने बयान के अंत में अभिजीत दिपके ने कहा कि वह सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही के पक्षधर हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी शिक्षा, छात्रवृत्ति और एजुकेशन लोन से जुड़ी सभी बातें तथ्यात्मक हैं और इनमें छिपाने जैसा कुछ भी नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे की चर्चा व्यक्तिगत आरोपों के बजाय जनहित और नीतिगत मुद्दों पर केंद्रित होगी।

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