New Delhi नई दिल्ली: शनिवार को दिल्ली में CEC के विरोध में प्रदर्शन करने वाले 3,000 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें CJP के अभिजीत दिपके और ममता बनर्जी व अरविंद केजरीवाल जैसे नेता भी शामिल थे। पुलिस ने जंतर-मंतर पर अफरातफरी रोकने के लिए राजधानी में सुरक्षा का कड़ा घेरा बना दिया था, जिससे प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन शहर भर में कई छोटी-छोटी सभाओं में बंट गया।
CJP नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को पुलिस ने सुबह करीब 10:30 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हिरासत में लिया। वे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे थे और चुनावी रोल के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। CJP नेता अजिंक्य शिंदे ने घोषणा की कि प्रदर्शनकारी रविवार को फिर से जंतर-मंतर की ओर मार्च करेंगे और CEC के इस्तीफे के बाद ही रुकेंगे।
अधिकारियों ने पहले ही प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था और बिना अनुमति के जमा होने पर चेतावनी दी थी। साथ ही, इंटरनेट पर पाबंदियां लगाईं, रास्ते बंद किए और ट्रैफिक डायवर्ट किया ताकि जंतर-मंतर पर CJP के जुलाई वाले हिंसक विरोध प्रदर्शन जैसी स्थिति दोबारा न बने। पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को छत्रसाल स्टेडियम और अलग-अलग पुलिस स्टेशनों सहित कई जगहों पर ले जाया गया। उनमें से ज़्यादातर को शाम को रिहा कर दिया गया।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम में उनके घर से हिरासत में लिया गया। CJP के X हैंडल पर एक पोस्ट के अनुसार, सादे कपड़ों में करीब 50 पुलिसकर्मी सुबह 8 बजे के आसपास गुरुग्राम में राठी के घर पहुंचे और उन्हें हिरासत में ले लिया। शहर के कुछ हिस्सों में मामूली झड़पें भी हुईं। नई दिल्ली के झंडेवालान इलाके में हिरासत में लिए गए लोगों को ले जा रही बस पर पत्थर फेंके गए। पुलिस ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने के बाद आकाशवाणी भवन के पास पुलिस से झड़प की।
विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में 30,000 से ज़्यादा पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों को तैनात किया गया था। जंतर-मंतर के आस-पास 45 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए, सेंट्रल दिल्ली में इंटरनेट पर रोक लगा दी गई, बैरिकेड्स लगाए गए और सुबह 6 बजे से सेंट्रल दिल्ली के कई रास्तों पर ट्रैफिक पर पाबंदियां लगाई गईं। साथ ही, स्कूलों, कॉलेजों और अदालतों को उस दिन के लिए ऑनलाइन मोड में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
अहम जगहों पर ड्रोन से निगरानी की जा रही है, जबकि सुरक्षा उपायों के तहत सुप्रीम कोर्ट और मंडी हाउस समेत कई मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। दिल्ली की सीमाओं पर गाड़ियों की जांच की गई, और बॉडी कैमरों से लैस पुलिसकर्मी शहर भर में प्रदर्शनकारियों पर कड़ी नज़र रखे हुए थे। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट रविवार को एक अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई के लिए विशेष बैठक कर सकता है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि CEC विरोधी प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए दिल्ली मेट्रो स्टेशनों और ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बंद करना कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील ने बताया कि जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस विशेष सुनवाई को कर सकती है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजनीतिक हितों के लिए राजधानी के निवासियों की शांति और सुरक्षा में खलल डालने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी, AAP नेता अरविंद केजरीवाल और CJP की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि उन्हें शहर को बंधक बनाने की इजाज़त नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, "यह जान लें: दिल्ली को बंधक नहीं बनने दिया जाएगा।" उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में किसी को भी अराजकता न फैलाने देने का संकल्प लिया।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार को विरोध करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे युवा पुरुषों और महिलाओं को हिरासत में लिए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के लिए सुरक्षा पाबंदियां यह दिखाती हैं कि सरकार इस बात से "डरी हुई" है कि उसकी "अवैधता" उजागर हो रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "हमारे युवा, छात्र, वकील, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, किसान संघ के नेता, यूट्यूबर, कंटेंट क्रिएटर - जो कोई भी इस शासन (BJP सरकार) से सवाल कर रहा है, उसे हिरासत में लिया जा रहा है। मोदी सरकार ने 'लोकतंत्र की जननी' (Mother of Democracy) को 'दबे हुए लोकतंत्र' (Muzzled Democracy) में बदल दिया है।" कांग्रेस के कम्युनिकेशन इंचार्ज और जनरल सेक्रेटरी जयराम रमेश ने X पर एक पोस्ट में कहा, "देश की राजधानी को एक किले में बदल दिया गया है। हर जगह हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। संविधान के आर्टिकल 326 के तहत मिले वोटिंग के अधिकार को सुनियोजित तरीके से छीनने की कोशिश के खिलाफ़ चिंतित युवाओं के शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन से PM-HM की जोड़ी बुरी तरह घबरा गई है और परेशान है।"
ममता बनर्जी को सेंट्रल दिल्ली के साउथ एवेन्यू से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) के कई सांसदों के साथ हिरासत में लिया गया। अरविंद केजरीवाल, जिनके घर को सुबह से ही दिल्ली पुलिस ने घेरा हुआ था, उन्हें भी विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बाहर निकलते ही हिरासत में ले लिया गया। केजरीवाल ने कहा, "वे 'वोट चोरी' के इस मुद्दे को दबाना चाहते हैं और ऐसा करना जारी रखना चाहते हैं। लेकिन देश की जनता ऐसा नहीं होने देगी।"
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