जयपुर। राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश की जनता का आभार जताया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश जारी करते हुए चुनाव परिणाम को भाजपा की सुशासन और विकास की नीतियों के प्रति जनता के समर्थन का प्रमाण बताया। उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज करने वाले पार्टी प्रत्याशियों और प्रचार अभियान में जुटे कार्यकर्ताओं को भी बधाई दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में भाजपा को प्रचंड जीत दिलाने के लिए जनता-जनार्दन का हृदय से आभार। यह झूठ की गूंज के सामने सत्य की विजय का प्रमाण है।” उन्होंने कहा कि इस जनादेश से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश के लोगों का डबल इंजन सरकार की सुशासन और विकास से जुड़ी नीतियों को पूरा समर्थन मिल रहा है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि यह जनादेश राजस्थान को प्रगति की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने और जन-जन के जीवन में खुशहाली लाने के संकल्प को अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने सभी विजयी प्रत्याशियों के साथ पार्टी के समर्पित और परिश्रमी कार्यकर्ताओं को भी शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री के संदेश के बाद भाजपा नेताओं ने चुनाव परिणाम को राज्य सरकार की नीतियों और संगठन की मेहनत की जीत बताया।
राजस्थान के 309 शहरी निकायों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से अधिक पार्षद सीटें हासिल कीं। उपलब्ध परिणामों के अनुसार, 10 हजार से अधिक वार्डों में भाजपा लगभग 4,166 सीटों पर विजयी रही, जबकि कांग्रेस को करीब 3,595 सीटें मिलीं। भाजपा ने कांग्रेस पर लगभग 571 सीटों की बढ़त बनाई। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी बड़ी संख्या में जीत दर्ज की है, जिससे कई नगर निकायों में अध्यक्ष और महापौर के चुनाव के दौरान उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है।
भाजपा ने 85 शहरी निकायों में बहुमत का आंकड़ा पार किया और 60 अन्य निकायों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। इस तरह पार्टी ने कुल 145 निकायों में बढ़त या निर्णायक स्थिति हासिल की। कांग्रेस ने 46 निकायों में बहुमत प्राप्त किया, जबकि 54 निकायों में वह सबसे बड़ी पार्टी रही। कांग्रेस कुल 100 निकायों में मजबूत स्थिति में दिखाई दी।
राज्य के नगर निकाय चुनाव दो चरणों में कराए गए थे। पहले चरण के लिए नौ सितंबर और दूसरे चरण के लिए 11 सितंबर को मतदान हुआ। पहले चरण में 162 निकायों में लगभग 76.42 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि दूसरे चरण में 147 निकायों के मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया और मतदान प्रतिशत करीब 70.68 रहा। इन चुनावों में 1.44 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान के पात्र थे।
चुनाव के दायरे में 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल थीं। जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, बीकानेर और अलवर जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों के नतीजों पर राजनीतिक दलों की विशेष नजर रही। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों का चुनाव भी महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि शहर की पुरानी निगम व्यवस्था में बदलाव के बाद इस बार चुनावी समीकरण अलग थे।
भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान राज्य और केंद्र की योजनाओं को प्रमुखता से मतदाताओं के सामने रखा था। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया। संगठन ने केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार होने को विकास कार्यों के लिए लाभकारी बताते हुए डबल इंजन सरकार के पक्ष में समर्थन मांगा था।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में भी इसी मुद्दे को उठाया। उन्होंने चुनाव परिणाम को डबल इंजन सरकार की नीतियों पर मतदाताओं की मुहर बताया। भाजपा नेताओं का कहना है कि शहरी विकास, बुनियादी सुविधाओं, सड़क, पेयजल, स्वच्छता और केंद्र एवं प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कारण पार्टी को समर्थन मिला है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी कई निकायों में मजबूत प्रदर्शन किया है। कुछ बड़े शहरों और नगर पालिकाओं में कांग्रेस भाजपा से आगे रही, जबकि कई जगह किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। अजमेर नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। कुछ निकायों में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा। ऐसे क्षेत्रों में निर्दलीय पार्षद सत्ता गठन की प्रक्रिया में निर्णायक बन सकते हैं।
नगर निकायों की तस्वीर केवल पार्षद चुनाव के परिणाम से पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी। अगला महत्वपूर्ण चरण महापौर, सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव का होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, इन पदों के लिए 21 सितंबर को चुनाव कराया जाना है। इसके बाद 22 सितंबर को उपमहापौर, उपसभापति और उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव होगा। जिन निकायों में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय और छोटे दलों के पार्षदों का समर्थन अहम होगा।
राजनीतिक दृष्टि से नगर निकाय चुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा था। भाजपा राज्य की सत्ता में है और निकाय चुनाव में मिली बढ़त से उसका संगठन उत्साहित है। वहीं कांग्रेस ने भाजपा से पीछे रहने के बावजूद कई क्षेत्रों में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखी है। परिणामों को आगामी राजनीतिक मुकाबलों और वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले शहरी मतदाताओं के रुझान के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की बधाई के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर चुनावी सफलता का जश्न मनाया। पार्टी अब उन नगर निकायों में बोर्ड बनाने की रणनीति पर काम करेगी, जहां उसे स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ है। जिन निकायों में वह सबसे बड़ा दल है, वहां निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से सत्ता गठन की कोशिश की जा सकती है।