नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता मजबूत करने के लिए रक्षा क्षेत्र में बड़ी खरीद की तैयारी चल रही है। दोनों सेनाएं सरकारी एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से करीब 200 स्वदेशी लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) खरीदने की योजना पर आगे बढ़ रही हैं। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, सेना और वायुसेना को कम से कम 187 आधुनिक हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता है। इनका उपयोग पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों के स्थान पर किया जाएगा। इस परियोजना से सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी, सैनिकों की आवाजाही और आपातकालीन अभियानों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारतीय सेना को 126 और वायुसेना को 61 हेलीकॉप्टरों की जरूरत
रक्षा क्षेत्र से जुड़ी जानकारी के अनुसार, भारतीय सेना और वायुसेना की संयुक्त आवश्यकता 187 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों की है।प्रस्तावित योजना के तहत भारतीय सेना को 126 और भारतीय वायुसेना को 61 हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराए जाने की संभावना है।हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि नहीं हुई है। खरीद प्रक्रिया तकनीकी प्रमाणन, वित्तीय मंजूरी और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं पर निर्भर करेगी।इन हेलीकॉप्टरों के आने से दोनों सेनाओं की हल्के परिवहन और निगरानी अभियानों से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों की लेंगे जगह
भारतीय सेना और वायुसेना लंबे समय से चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही हैं। इन हेलीकॉप्टरों का मूल डिजाइन करीब छह दशक पुराना है।बढ़ती उम्र, रखरखाव की चुनौतियों और आधुनिक परिचालन जरूरतों को देखते हुए इन्हें चरणबद्ध तरीके से बदलने की योजना बनाई गई है।सेना अगले एक-दो वर्षों में पुराने हेलीकॉप्टरों को सेवा से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। इनके स्थान पर स्वदेशी LUH हेलीकॉप्टरों को शामिल करने की प्रक्रिया अगले आठ से दस वर्षों तक चल सकती है।नई तकनीक वाले हेलीकॉप्टरों से दुर्गम इलाकों में सैनिकों की सहायता और परिचालन सुरक्षा बेहतर होने की उम्मीद है।
अंतिम चरण में पहुंची तकनीकी प्रमाणन प्रक्रिया
HAL द्वारा विकसित लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर वर्तमान में अंतिम तकनीकी प्रमाणन और मिशन उपकरणों के एकीकरण के चरण में है।सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC) हेलीकॉप्टर की सुरक्षा, उड़ान क्षमता और सैन्य जरूरतों के अनुरूप प्रदर्शन की जांच कर रहा है।विशेष रूप से ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों, गर्म मौसम और रेतीले इलाकों में सुरक्षित उड़ान भरने की क्षमता का परीक्षण किया जा रहा है।इन परीक्षणों के पूरा होने और आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद हेलीकॉप्टरों को सैन्य सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
2027-28 में मिल सकते हैं पहले 12 हेलीकॉप्टर
HAL का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 के दौरान शुरुआती 12 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर भारतीय सेना और वायुसेना को उपलब्ध कराना है।इनमें छह हेलीकॉप्टर सेना और छह वायुसेना के लिए निर्धारित किए जाने की योजना है।शुरुआती हेलीकॉप्टरों के संचालन से प्राप्त अनुभव के आधार पर आगे तैयार होने वाले मॉडलों में आवश्यक सुधार किए जाएंगे।हालांकि, डिलीवरी की समयसीमा तकनीकी प्रमाणन और उत्पादन की तैयारियों पर निर्भर करेगी।
तुमकुरु में तैयार होंगे स्वदेशी हेलीकॉप्टर
इन हेलीकॉप्टरों का निर्माण कर्नाटक के तुमकुरु स्थित HAL की अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर निर्माण इकाई में किया जाएगा।इस संयंत्र की शुरुआती उत्पादन क्षमता लगभग 30 हेलीकॉप्टर प्रतिवर्ष है। आवश्यकता के अनुसार इसे बढ़ाकर करीब 60 हेलीकॉप्टर सालाना किया जा सकता है।स्वदेशी निर्माण से भारतीय रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी हेलीकॉप्टरों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।परियोजना से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, तकनीकी अनुसंधान और रक्षा उपकरण निर्माण से जुड़े घरेलू उद्योगों को भी अवसर मिलने की उम्मीद है।
ऊंचाई वाले इलाकों में सेना को मिलेगी मदद
लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों को बहुउद्देश्यीय सैन्य अभियानों के लिए विकसित किया गया है।इनका इस्तेमाल सीमा पर निगरानी, टोही अभियान, सैनिकों की सीमित आवाजाही, रसद पहुंचाने, घायल जवानों की निकासी और प्रशिक्षण में किया जा सकेगा।इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं बचाव अभियानों में भी ये हेलीकॉप्टर उपयोगी साबित हो सकते हैं।विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में इनकी तैनाती सेना की परिचालन क्षमता को मजबूत कर सकती है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बढ़ावा
HAL का स्वदेशी LUH कार्यक्रम रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है।रक्षा क्षेत्र में घरेलू तकनीक विकसित करने से भारतीय कंपनियों को अनुसंधान और उत्पादन क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलेगा।27 अक्टूबर को रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपये के विभिन्न सैन्य खरीद प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। हालांकि, प्रारंभिक मंजूरी को अंतिम खरीद अनुबंध नहीं माना जाता।भारतीय सेना और वायुसेना के लिए प्रस्तावित LUH खरीद आने वाले वर्षों में देश की सैन्य विमानन क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

Tags: