नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से कई बड़े वैश्विक मुद्दों पर अहम फैसले और साझा संदेश सामने आने की उम्मीद है। नई दिल्ली में जुटे ब्रिक्स नेताओं के एजेंडे में आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता, संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं में सुधार, बहुपक्षवाद को मजबूत करना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की दावेदारी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान 50 से ज्यादा ठोस और व्यावहारिक परिणाम तैयार किए गए हैं। हालांकि इन्हें सभी को औपचारिक ‘समझौते’ कहना सटीक नहीं होगा; इनमें फ्रेमवर्क, एक्शन प्लान और सहयोग संबंधी पहल भी शामिल हैं।

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस का संदेश
ब्रिक्स के दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख प्रमुखता से सामने आने की उम्मीद है। सदस्य देश आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का विरोध करते हुए इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने पर जोर दे सकते हैं। इस साल मई में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भी आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात कही गई थी। मंत्रियों ने आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, टेरर फाइनेंसिंग और सुरक्षित पनाहगाहों पर चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की जरूरत बताई थी।
UNSC में भारत की दावेदारी अहम
ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक संस्थाओं में सुधार भी बड़ा मुद्दा है। प्रस्तावित दिल्ली घोषणा में संयुक्त राष्ट्र सहित वैश्विक शासन संस्थाओं को वर्तमान दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने पर जोर दिए जाने की संभावना है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका और दावेदारी के समर्थन का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की मुलाकात में भी बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार पर चर्चा हुई। दोनों ने इस जरूरत पर बात की कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को 21वीं सदी की वास्तविकताओं को बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित करना चाहिए।
50 से ज्यादा ठोस परिणाम तैयार
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चार प्रमुख स्तंभों—Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability—पर काम किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक इन क्षेत्रों में 50 से ज्यादा ठोस और व्यावहारिक नतीजे सामने आए हैं। इनमें विभिन्न कार्ययोजनाएं, सहयोग ढांचे और नई पहल शामिल हैं। इसलिए ‘50 ऐतिहासिक समझौते’ की जगह ‘50 से ज्यादा अहम नतीजे और पहल’ कहना अधिक तथ्यात्मक होगा। भारत ने अपनी अध्यक्षता में विकास, तकनीक, नवाचार, वित्तीय सहयोग और ग्लोबल साउथ की जरूरतों को प्रमुखता दी है। ब्रिक्स के 11 सदस्य देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी, करीब 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
दिल्ली घोषणा पर दुनिया की नजर
ब्रिक्स नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग वैश्विक मुद्दों पर सर्वसम्मति बनाने की भी है। ईरान को लेकर मौजूदा पश्चिम एशिया तनाव और सदस्य देशों के अलग-अलग रणनीतिक हितों के कारण साझा घोषणा की भाषा पर बातचीत महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स सर्वसम्मति के आधार पर काम करता है, इसलिए दिल्ली घोषणा में इस्तेमाल होने वाले शब्दों पर भी दुनिया की नजर है। अगर आतंकवाद, वैश्विक संस्थागत सुधार और विकास से जुड़े मुद्दों पर मजबूत सहमति बनती है तो नई दिल्ली सम्मेलन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की महत्वपूर्ण उपलब्धि बन सकता है। भारत की कोशिश ब्रिक्स को केवल राजनीतिक संवाद के मंच के बजाय व्यावहारिक सहयोग और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने वाले समूह के रूप में आगे बढ़ाने की है।
Tags: