गुरुग्राम। सर्दियों की शुरुआत से पहले हरियाणा के कई शहरों में वायु प्रदूषण के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। सितंबर 2026 की मासिक रिपोर्ट में देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर शामिल रहे। इनमें पानीपत, जींद, यमुनानगर, गुरुग्राम और मानेसर हैं। पानीपत पहले और जींद दूसरे स्थान पर रहा। यह सूची सितंबर की औसत पीएम2.5 सांद्रता के आधार पर तैयार की गई है। इसे किसी एक दिन की एक्यूआई रैंकिंग या अक्टूबर की वर्तमान स्थिति की सूची नहीं माना जाना चाहिए।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर यानी सीआरईए ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निगरानी आंकड़ों का विश्लेषण किया है। अध्ययन में देश के 251 शहर शामिल किए गए, जहां पर्याप्त निगरानी डेटा उपलब्ध था। पानीपत में सितंबर का औसत पीएम2.5 स्तर लगभग 78 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। जींद में यह लगभग 66 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ। हरियाणा के पांच शहरों का शीर्ष दस में शामिल होना दिखाता है कि प्रदूषण की समस्या गुरुग्राम या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
पानीपत की स्थिति महीने के कई दिनों में खराब रही। रिपोर्ट के अनुसार, उपलब्ध 29 दिनों के आंकड़ों में पांच दिन ‘बहुत खराब’, छह दिन ‘खराब’ और नौ दिन ‘मध्यम’ श्रेणी में रहे। तीन दिन ‘संतोषजनक’ और छह दिन ‘अच्छे’ दर्ज किए गए। पानीपत में 20 दिनों तक पीएम2.5 की दैनिक सांद्रता राष्ट्रीय मानक की 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर सीमा से ऊपर रही। इससे स्पष्ट है कि ऊंचा मासिक औसत केवल एक-दो दिन की बढ़ोतरी का परिणाम नहीं था।
गुरुग्राम में भी पिछले साल के मुकाबले बदलाव दिखाई दिया। सितंबर 2026 में शहर का औसत पीएम2.5 स्तर 58.94 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। सितंबर 2025 में यह 38.81 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। इस तरह सालाना तुलना में करीब 52 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई। पीएम10 का मासिक औसत इस साल 106.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जबकि पिछले सितंबर में 86.95 था। बड़े और छोटे, दोनों आकार के प्रदूषक कणों की बढ़ी सांद्रता शहर की हवा में गिरावट का संकेत देती है।
गुरुग्राम में सितंबर के दौरान केवल एक दिन हवा ‘अच्छी’ श्रेणी में रही। बीस दिन ‘संतोषजनक’, तीन दिन ‘मध्यम’, तीन दिन ‘खराब’ और तीन दिन ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज हुए। इसके मुकाबले सितंबर 2025 में दस दिन ‘अच्छे’, अठारह दिन ‘संतोषजनक’ और दो दिन ‘मध्यम’ रहे थे। पिछले साल इसी महीने ‘खराब’ या ‘बहुत खराब’ दिन दर्ज नहीं हुए थे। इस साल ऐसी दोनों श्रेणियों में कुल छह दिन आने से सर्दी से पहले ही शहर की वायु गुणवत्ता पर चिंता बढ़ी है।
जींद में सितंबर के दौरान दो दिन ‘खराब’ और सोलह दिन ‘मध्यम’ श्रेणी में रहे। बाकी बारह दिन हवा ‘संतोषजनक’ रही और कोई दिन ‘अच्छा’ दर्ज नहीं हुआ। मानेसर में दस दिन ‘मध्यम’ और तीन दिन ‘खराब’ रहे। यमुनानगर में तेरह दिन ‘मध्यम’ तथा दो दिन ‘खराब’ श्रेणी में आए। राष्ट्रीय शीर्ष दस की सूची में अन्य पांच शहर उत्तर प्रदेश के खोड़ा और गोरखपुर, पंजाब का मंडी गोबिंदगढ़, मध्य प्रदेश का पीथमपुर तथा असम का बर्नीहाट रहे।
इन आंकड़ों को समझते समय पीएम2.5 सांद्रता और एक्यूआई का अंतर ध्यान रखना जरूरी है। पीएम2.5 सांद्रता हवा में सूक्ष्म कणों की मात्रा बताती है और इसे माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में मापा जाता है। एक्यूआई वायु गुणवत्ता को सूचकांक के रूप में प्रस्तुत करता है। इसलिए गुरुग्राम का लगभग 59 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मासिक पीएम2.5 स्तर, एक्यूआई 59 के बराबर नहीं है। इसी तरह मासिक औसत को सीधे दैनिक या वार्षिक मानक का उल्लंघन बताना उचित नहीं होगा; संबंधित अवधि के आंकड़ों की तुलना करनी होती है।
सीपीसीबी की एक्यूआई व्यवस्था में शून्य से 50 तक ‘अच्छा’, 51 से 100 ‘संतोषजनक’ और 101 से 200 ‘मध्यम’ श्रेणी है। 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 ‘गंभीर’ माना जाता है। स्वास्थ्य प्रभाव भी श्रेणी के अनुसार बदलते हैं। ‘मध्यम’ स्तर पर फेफड़ों, अस्थमा और हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ‘खराब’ श्रेणी में लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क से अधिक लोगों को सांस संबंधी असुविधा हो सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, गुरुग्राम के बढ़े प्रदूषण में स्थानीय उत्सर्जन, आसपास के क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषक और उनके फैलाव को सीमित करने वाली मौसम परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव है। सर्दियों में तापमान गिरने और हवा स्थिर होने पर प्रदूषकों का फैलाव कम हो सकता है। हालांकि, आगामी महीनों का वास्तविक स्तर उस समय की परिस्थितियों और निगरानी आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा। सितंबर की रिपोर्ट फिलहाल यह दिखाती है कि हरियाणा के कई शहरों में प्रदूषण बढ़ा हुआ है और सर्दियों के चरम प्रदूषण काल से पहले ही समस्या सामने आ चुकी है।