नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने खड़गे का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि खड़गे एक वरिष्ठ नेता हैं और उनकी उम्र करीब 83-84 साल है। ऐसे में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रतिक्रिया देते हुए वह इस तरह की बातें कह सकते हैं। सौगत रॉय के इस बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
सौगत रॉय ने किया खड़गे का बचाव
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कांग्रेस अध्यक्ष की विवादित टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस कार्यक्रम में खड़गे भाषण दे रहे थे, वहां मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर टिप्पणी की थी। उसी के जवाब में खड़गे ने अपनी बात कही।सौगत रॉय ने कहा, "खड़गे जी 83-84 साल के हैं। वह वरिष्ठ नेता हैं और ऐसी बातें कह सकते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि खड़गे की प्रतिक्रिया को उस समय की परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। रॉय के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष ने सामने से आई टिप्पणी का तत्काल जवाब दिया था।
पटना में कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम से शुरू हुआ। बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सभा को संबोधित कर रहे थे।इस दौरान वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे थे। तभी सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जाएंगे।इस टिप्पणी के जवाब में खड़गे ने प्रधानमंत्री के पिता का उल्लेख करते हुए विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया। उनका यह बयान सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई और कांग्रेस अध्यक्ष से माफी मांगने की मांग शुरू कर दी।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने साधा निशाना
दूसरी ओर, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय का उदाहरण देते हुए कहा कि जब विदेशी नेताओं ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था, तब विपक्ष के नेताओं ने भी प्रधानमंत्री पद की गरिमा का समर्थन किया था।उन्होंने कांग्रेस पर लगातार चुनावी हार के बाद राजनीतिक संयम खोने का आरोप लगाया। हालांकि, यह भाजपा सांसद की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जिस पर विपक्षी दलों का अलग दृष्टिकोण है।
अमित शाह समेत कई नेताओं ने जताई आपत्ति
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी खड़गे की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के परिवार के सदस्यों को इस तरह की बयानबाजी में शामिल करना उचित नहीं है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई। भाजपा ने खड़गे से माफी की मांग करते हुए विभिन्न स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन किए। बेंगलुरु में प्रदर्शन के दौरान कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया।
कांग्रेस ने भी दी विवाद पर सफाई
विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस नेताओं ने खड़गे की टिप्पणी का बचाव किया। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि खड़गे की बात को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष का इशारा प्रधानमंत्री के वैचारिक मार्गदर्शक संगठन की ओर था।वहीं, कार्यक्रम में टिप्पणी करने वाले व्यक्ति संतोष कुमार ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका आशय यह था कि जब तक जनता विरोध नहीं करेगी, तब तक प्रधानमंत्री सत्ता से नहीं हटेंगे। उन्होंने खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता बताया।
बयान को लेकर राजनीतिक विवाद जारी
खड़गे की टिप्पणी और सौगत रॉय के बचाव के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। भाजपा इसे सार्वजनिक भाषा की मर्यादा से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस और उसके समर्थन में बयान देने वाले नेता पूरे घटनाक्रम के संदर्भ पर जोर दे रहे हैं।फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। इस विवाद ने राजनीतिक नेताओं के सार्वजनिक बयानों और व्यक्तिगत टिप्पणियों की सीमाओं को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
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