दिसंबर में अमेरिका जा सकते हैं पीएम मोदी, G20 के दौरान ट्रंप से द्विपक्षीय वार्ता की संभावना
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस साल दिसंबर में अमेरिका जाने की संभावना को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में भाग ले सकते हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है। हालांकि इस यात्रा और बैठक के कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
संभावित मोदी-ट्रंप वार्ता में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य पहले से तय है। फरवरी 2025 में दोनों नेताओं ने 'मिशन 500' के तहत भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया था।
G20 के दौरान मुलाकात की संभावना
अमेरिका 2026 में G20 की अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की मौजूदगी में कई द्विपक्षीय बैठकें भी होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री मोदी की संभावित अमेरिका यात्रा को इसी लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर मोदी और ट्रंप की द्विपक्षीय बैठक होती है तो दोनों देशों के संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
इसके साथ ही क्वाड के स्तर पर भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग भी भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
जून में मिले थे मोदी और ट्रंप
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप इससे पहले जून 2026 में फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे। व्हाइट हाउस के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 17 जून को दोनों नेताओं के बीच G7 के इतर द्विपक्षीय बैठक हुई थी।
इसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में बातचीत जारी रही है। ऐसे में दिसंबर की संभावित बैठक को जून की वार्ता के बाद उच्चस्तरीय संवाद की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जाएगा।
व्यापार रहेगा महत्वपूर्ण मुद्दा
भारत और अमेरिका के संबंधों में व्यापार सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।
फरवरी 2026 में अमेरिका और भारत ने पारस्परिक और लाभकारी व्यापार के लिए अंतरिम समझौते के फ्रेमवर्क की घोषणा की थी। इसके तहत अमेरिका ने भारतीय मूल के सामान पर लागू पारस्परिक टैरिफ दर को 18 प्रतिशत करने की बात कही थी। दोनों देशों ने व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखने की भी प्रतिबद्धता जताई।
ऐसे में मोदी-ट्रंप की संभावित दिसंबर बैठक में व्यापार समझौते की प्रगति और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना रहेगी।
500 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
भारत और अमेरिका ने अपने आर्थिक संबंधों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। फरवरी 2025 के संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने 'मिशन 500' की घोषणा की थी। इसका लक्ष्य 2030 तक दोनों देशों के कुल द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं, बाजार पहुंच, सप्लाई चेन और निवेश जैसे विषय महत्वपूर्ण होंगे।
दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन, ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर रहा है।
रूसी तेल पर बदल चुकी है टैरिफ की स्थिति
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच पहले टैरिफ विवाद सामने आया था। अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल की खरीद का हवाला देते हुए भारत से आने वाले सामान पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था।
लेकिन फरवरी 2026 में अमेरिका ने इस अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को हटा दिया। व्हाइट हाउस ने कहा कि यह फैसला भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद रोकने की प्रतिबद्धता सहित उठाए गए कदमों के बाद लिया गया। अमेरिकी आदेश में यह भी कहा गया कि यदि भारत दोबारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल का आयात शुरू करता है तो अतिरिक्त कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
इसलिए वर्तमान स्थिति को भारत पर रूसी तेल के कारण 100 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ की मौजूदा धमकी के रूप में पेश करना उपलब्ध आधिकारिक अमेरिकी रिकॉर्ड से पुष्ट नहीं होता।
रक्षा सहयोग पर भी नजर
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। दोनों देश सैन्य अभ्यास, रक्षा उपकरण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं।
फरवरी 2025 के संयुक्त बयान में भी दोनों नेताओं ने रक्षा साझेदारी को मजबूत करने, लॉजिस्टिक्स और खुफिया सहयोग बढ़ाने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य सहयोग को आगे ले जाने पर सहमति जताई थी।
दिसंबर में संभावित बैठक होने पर रक्षा उद्योग और संयुक्त उत्पादन जैसे विषय भी एजेंडे का हिस्सा बन सकते हैं।
ऊर्जा संबंध भी अहम
भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है और अमेरिका के साथ ऊर्जा व्यापार दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फरवरी 2026 में जारी अमेरिकी दस्तावेजों में भी ऊर्जा खरीद को द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों से जोड़ा गया था।
ऐसे में कच्चे तेल, LNG और दूसरे ऊर्जा उत्पादों के व्यापार पर भी उच्चस्तरीय वार्ता में चर्चा हो सकती है।
टेक्नोलॉजी सहयोग पर रहेगा फोकस
भारत-अमेरिका संबंधों में उभरती टेक्नोलॉजी का महत्व तेजी से बढ़ा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, दूरसंचार और महत्वपूर्ण तकनीकों में दोनों देश सहयोग के नए अवसर तलाश रहे हैं।
अमेरिका के साथ टेक्नोलॉजी साझेदारी भारत के लिए निवेश और अत्याधुनिक तकनीक तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण है, जबकि अमेरिका भारत को बड़े बाजार और रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।
क्वाड भी रहेगा महत्वपूर्ण मंच
भारत और अमेरिका के अलावा जापान और ऑस्ट्रेलिया क्वाड के सदस्य हैं। चारों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत, महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करते हैं।
अगर अमेरिका यात्रा के दौरान क्वाड नेताओं की बैठक होती है तो क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और इंडो-पैसिफिक से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना रहेगी। बैठक के औपचारिक कार्यक्रम की पुष्टि होने पर इसका विस्तृत एजेंडा स्पष्ट होगा।
आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी की दिसंबर की संभावित अमेरिका यात्रा और राष्ट्रपति ट्रंप के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक के पूरे कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
अगर दोनों नेताओं की बैठक होती है तो व्यापार समझौता, 500 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य, रक्षा सहयोग, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी जैसे मुद्दे चर्चा के प्रमुख विषय बन सकते हैं।
जून में फ्रांस में हुई मोदी-ट्रंप बैठक के बाद दिसंबर की संभावित मुलाकात दोनों देशों को लंबित मुद्दों पर उच्च स्तर पर बातचीत का एक और अवसर दे सकती है। दोनों पक्षों की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम जारी होने के बाद यात्रा और बैठकों की अंतिम तस्वीर साफ होगी।