नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत बड़े स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार अब तक 31,63,930 नोटिस तैयार किए गए हैं और इन्हें संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाया जा रहा है। ये नोटिस ऐसे मतदाताओं को जारी किए जा रहे हैं जिनकी प्रविष्टियां पिछली मतदाता सूची से लिंक नहीं हो पाई हैं या जिनकी मैपिंग में नाम, जन्मतिथि अथवा अन्य विवरणों से संबंधित तार्किक विसंगतियां सामने आई हैं।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अशोक कुमार ने शनिवार को बताया कि निर्वाचन कार्यालय ने SIR के दौरान चिह्नित मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक की है। इसमें दो प्रमुख श्रेणियां हैं—पहली ऐसे मतदाताओं की, जिनका पिछली SIR मतदाता सूची से मिलान नहीं हो पाया है और दूसरी ऐसे मतदाताओं की, जिनका मिलान तो हुआ लेकिन उनके विवरण में विसंगतियां मिली हैं।
नाम और जन्मतिथि में मिली विसंगतियां
अशोक कुमार के मुताबिक मैप किए गए कुछ मतदाताओं के नाम या जन्मतिथि जैसे विवरण में अंतर पाया गया है। ऐसे मतदाताओं को नोटिस देकर जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का मौका दिया जा रहा है। वहीं जो मतदाता पिछली SIR मतदाता सूची से लिंक नहीं हो पाए हैं, उनसे भी अपनी पात्रता से संबंधित दस्तावेज देने को कहा जा रहा है।
निर्वाचन कार्यालय ने बूथ स्तर पर भी जानकारी प्रकाशित की है, जिसमें संबंधित मतदाता के खिलाफ चिह्नित विसंगति का विवरण दिया गया है। इससे मतदाताओं को यह जानने में मदद मिल सकती है कि उन्हें किस वजह से सत्यापन प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
31,63,930 नोटिस किए गए तैयार
दिल्ली निर्वाचन कार्यालय के बयान के अनुसार 19 सितंबर तक 31,63,930 नोटिस तैयार किए जा चुके थे। इन्हें संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी किए जाने का उद्देश्य संबंधित मतदाता के विवरण और पात्रता का सत्यापन करना है।
मतदाताओं को नोटिस मिलने के बाद आवश्यक दस्तावेजों के साथ संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के सामने अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में निर्वाचन अधिकारियों की टीमें दावे और आपत्तियों की सुनवाई के लिए शिविर भी आयोजित कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे शिविरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
31 अगस्त को जारी हुई थी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
दिल्ली में SIR के बाद निर्वाचन आयोग ने 31 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की थी। इस सूची में करीब 97.53 लाख मतदाता शामिल थे, जबकि 30 जून को मतदाता सूची में करीब 1.45 करोड़ नाम दर्ज थे। इस तरह ड्राफ्ट सूची तैयार होने के दौरान लगभग 47 लाख नाम पिछली सूची की तुलना में शामिल नहीं हुए।
हालांकि ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होना अपने आप में मतदाता की अंतिम अपात्रता का फैसला नहीं है। निर्वाचन अधिकारी के स्पष्टीकरण के मुताबिक पात्र व्यक्ति दावे और आपत्तियों की अवधि में निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन और जरूरी दस्तावेज जमा कर सकते हैं।
मतदाताओं को दिया जा रहा जवाब देने का मौका
SIR की प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को अपनी जानकारी में सामने आई विसंगतियों को दूर करने का अवसर दिया जा रहा है। जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकते हैं। इसके लिए Form 6 और आवश्यक दस्तावेज जमा करने का प्रावधान है। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 30 सितंबर तक निर्धारित है।
इस दौरान मतदाता अपने नाम, उम्र, जन्मतिथि और अन्य विवरणों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर सकते हैं। यदि किसी विवरण में गलती या अंतर है तो संबंधित निर्वाचन अधिकारी के सामने दस्तावेज देकर उसे स्पष्ट करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
घर-घर जाकर भी किया गया था सत्यापन
दिल्ली में SIR अभियान के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म उपलब्ध कराने और उनका सत्यापन करने की प्रक्रिया अपनाई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दिल्ली के करीब 67.18 प्रतिशत मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म प्राप्त कर डिजिटल किए गए। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में इसकी दर अलग रही।
जिन मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त नहीं हुए या जिनकी जानकारी पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खाई, उनके मामलों को आगे सत्यापन के लिए लिया गया है।
अंतिम मतदाता सूची से पहले पूरी होगी प्रक्रिया
निर्वाचन अधिकारियों के सामने अब बड़ी जिम्मेदारी लाखों नोटिसों के जवाब और दस्तावेजों की जांच करने की है। दिल्ली CEO कार्यालय के अनुसार नोटिसों के निस्तारण की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएगी।
दिल्ली में SIR की यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चल रही है। इस दौरान किसी मतदाता को नोटिस मिलना अपने आप में नाम हटाए जाने का अंतिम फैसला नहीं है। संबंधित व्यक्ति को दस्तावेज प्रस्तुत करने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित प्रविष्टि पर निर्णय लेंगे।